मीडिया Now - उत्तराखंड : हकीकत शून्य, लक्षण पर भर्ती के निर्देश, बेड हैं नहीं, मौत के आंकड़े छिपा रही सरकार, व्यवस्था ध्वस्त

उत्तराखंड : हकीकत शून्य, लक्षण पर भर्ती के निर्देश, बेड हैं नहीं, मौत के आंकड़े छिपा रही सरकार, व्यवस्था ध्वस्त

medianow 04-05-2021 21:14:36


देहरादून। उत्तराखंड में कोरोना नियंत्रण को लेकर बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं, लेकिन हकीकत कुछ अलग है। सरकार कुछ कह रही है और हकीकत में कुछ और हो रहा है। सरकार नंबर जारी कर रही है, हकीकत में फोन नहीं उठ रहे हैं। सरकार अधिक से अधिक टीकाकरण की बात कह रह है, हकीकत में टीके अब कम लग रहे हैं। वहीं, सामाजिक और राजनीतिक संस्थाओं के लोग कभी ऑक्सीजन सिलेंडर ले जाते तो कभी दूसरी मदद की फोटो मीडिया तक पहुंचा रहे हैं, हकीकत में उनमें से कई तो मदद मांगने वाले का फोन तक नहीं उठा रहे हैं।

टीकाकरण की हकीकत
अब बात करते हैं स्वास्थ्य महकमे की। पहले कोरोना की दूसरी डोज देने का समय 28 दिन के बाद तय किया गया था। अब इसे 42 से 56 दिन के बीच कर दिया गया। इसी तरह उत्तराखंड में एक मई को 249 केंद्र में 70175 को टीके लगे। दो मई को स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट में टीकाकरण का जिक्र ही नहीं था। यानी इस दिन कहीं टीके नहीं लगे। तीन मई को 173 केंद्र में 8941 को टीके लगाए गए। अब टीकाकरण की रफ्तार को देखकर ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि कोरोना को नियंत्रण करने में टीकाकरण की स्थिति कैसी है।

लक्षण पर भी मरीजों की किया जाए भर्ती
उत्तराखंड की स्वास्थ्य महानिदेशक तृप्ति बहुगुणा ने सभी जिलों के मुख्य चिकित्साधिकारियों, अस्पताल और सीएचसी प्रभारितों को पत्र भेजकर निर्देश दिए कि लक्षण वाले मरीजों को अस्पताल में भर्ती करने के निर्देश दिए। आदेश में कहा गया है कि आरटी-पीसीआर टेस्ट रिपोर्ट निगेटिव आने पर लक्षणयुक्त सभी लोगों को आवश्यकता पड़ने पर चिकित्सालय में भर्ती किया जाए। अब सवाल ये उठता है कि हकीकत में अस्पतालों में बेड तक नहीं हैं। लोग घरों में ही इलाज करा रहे हैं। ऑक्सीजन के लिए भटक रहे हैं। शिकायत ये भी आम है कि यदि कहीं किसी जिम्मेदार को फोन भी किया जाए तो उठता तक नहीं।

मौत के आंकड़े छिपा रही सरकार
घरों में उपचार कराते हुए लोगों की मौत भी हो रही है और ऐसे लोगों की मौत के आंकड़े कोरोना से हुई मौत में नहीं गिना जा रहा है। ऐसे कई उदाहरण हैं जब अस्पताल तक पहुंचते ही मरीज की मौत हो गई और शव को मार्चरी में रखने की बजाय अस्पताल प्रशासन ने परिजनों को सौंप दिया। यदि घरों में हो रही कोरोना संक्रमितों की मौत को आंकड़ों में जोड़ा जा रहा होता तो आंकड़े और अधिक होते।

क्योंकि हर शाम स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी रिपोर्ट में सिर्फ अस्पताल में होने वाली कोरोना संक्रमितों की मौत का ही जिक्र किया जा रहा है। घर में होने वाली मौत का इसमें कोई जिक्र नहीं होता। हर दिन ऐसी भी रिपोर्ट आती हैं कि कोरोना संक्रमित की घर पर मौत हुई और पुलिस ने उसका अंतिम संस्कार कराया। अब इन मौत को किस अस्पताल में दर्ज किया गया। इसका जवाब भी शायद किसी के पास नहीं है। वहीं, हर श्मशान घाट में शव जलाने की भीड़ बढ़ रही है।

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