मीडिया Now - केरल में 'लव जेहाद' के विरुद्ध कानून क्यों नहीं है?

केरल में 'लव जेहाद' के विरुद्ध कानून क्यों नहीं है?

medianow 02-04-2021 10:07:49


उर्मिलेश / एक महाशय कह रहे हैं केरल में 'लव जेहाद' के विरुद्ध कानून क्यों नहीं है? कुछ साल पहले, इस देश में कुछ लोगों ने मिलकर 'लव जेहाद' जैसा शब्द बनाया था, ठीक वैसे ही जैसे पिछले साल दिल्ली स्थित तब्लीगी जमात के मरकज वाली घटना के संदर्भ में एक नया शब्द बनाया गया था: 'कोरोना जेहाद!' 

एक साल के अंदर ही 'कोरोना जेहाद' का झूठ भरभरा कर गिर पड़ा. देश भर की अदालतों में जहां-जहां इस अपराध में गिरफ्तार किये लोगों का मामला गया, अदालतों ने उन सबको बेगुनाह पाया और 'कोरोना जेहाद' जैसे फर्जी शब्द को संज्ञान लेने योग्य भी नही पाया. 'लव जेहाद'  जैसे फर्जी शब्द के प्रचारकों को न 'लव' का मर्म मालूम है और न 'जेहाद' का! दोनों को ईट-पत्थर की तरह जोड़ देने से सच बन जायेगा? सच ज़बरन गढ़ा नही जाता, जनाब! इधर, चुनाव हैं, इसलिए  कुछ लोगों ने केरल पहुंचकर कहा: 'यहां 'लव जेहाद' के विरुद्ध कानून क्यों नही है?' 

साधारण सी बात है: केरल में 'फर्जी शब्द' और 'झूठ गढ़ने वाली' फैक्ट्रिया नहीं चलतीं. इसलिए वहां 'लव जेहाद' जैसे नफ़रत फैलाने के लिए गढ़े शब्द पर कोई कानून क्यों बनेगा! यह सवाल उस प्रदेश के 'महाशय' ने उठाया, जहां हाल ही में राष्ट्रीय राजमार्ग से किडनैप कर एक नवविवाहिता के साथ उसके पति के सामने ही अपराधी-तत्व गैंगरेप करते हैं! 

बड़े-बड़े समाज सुधार आंदोलनों, आजादी से पहले और उसके बाद  राजनीतिक-प्रशासनिक स्तर पर उठाये रेडिकल कदमों से  केरल भारत का अनोखा प्रदेश बना, जहां का मानव विकास सूचकांक(HDI) देश के सभी प्रदेशों में अव्वल तो है ही, दुनिया के कई विकसित मुल्कों के बराबर है. साक्षरता, शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी केरल देश का अव्वल राज्य है. इसलिये वहां किसी फर्जी या साजिश के तहत उछाले गये शब्द पर 'फर्जी कानून' कैसे बन सकते हैं, जनाब!
- लेखक एक नामी पत्रकार हैं

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