मीडिया Now - यूपी की सियासत में ढाक के तीन पात !

यूपी की सियासत में ढाक के तीन पात !

medianow 06-05-2021 12:13:19


अभयानंद कृष्ण / त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के नतीजों की तस्वीर तमाम अटकलों और आशंकाओं के बादलों से बाहर निकल आई है। जिला और क्षेत्र पंचायत सदस्यों के निर्वाचन की यह तस्वीर सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी को फौरी तौर पर निराश करने वाली है। फौरी तौर पर इसलिए क्योंकि जिला पंचायत अध्यक्ष और ब्लॉक प्रमुखों के पद पर भाजपा अपने लोगों को बैठाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ने वाली। सत्ता की माया से यह मुमकिन भी हो सकेगा। भाजपा खुद के लिए हासिल जनादेश को ढाक के तीन पात में बदल दे तो कोई हैरत नहीं। 

यूपी के कुल 3,050 सीटों के नतीजे गिनती शुरू होने के चौथे दिन आज सामने आए। इस देरी को लेकर प्रदेश भर में ऐतराज की आवाज बुलंद होने लगी थी। प्रशासन के स्पष्टीकरण को सिरे से अस्वीकार करते हुए राजनैतिक दल खास कर समाजवादी पार्टी खुलेआम यह आरोप लगाई कि नतीजों में फेरबदल का खेल किया जा रहा था।  नतीजों पर नजर डालें तो सपा-आरएलडी गठबंधन को 828, समाजवादी पार्टी को अकेले 760, बीजेपी को 750 और बीएसपी को 381 सीटें मिलीं हैं। कांग्रेस को 76 सीटें, आम आदमी पार्टी को 64 सीटें व निर्दलीयों एवं अन्य को 951 सीटें  हासिल हुईं हैं। यह परिणाम यकीनन समाजवादी पार्टी और आम आदमी पार्टी के लिए उत्साही कहा जायेगा। सत्ताधारी दल के नेताओं और जनप्रतिनिधियों के कमान संभालने के बावजूद सपा ने अच्छा प्रदर्शन कर दिखाया। जबकि यह भी कहा जा रहा था कि विपक्ष कहीं दिख तक नहीं रहा था।

यह नतीजे इसलिए भी महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं क्योंकि यूपी में अगले साल की शुरुआत में ही विधानसभा के चुनाव होने हैं। हालांकि राजनैतिक विश्लेषकों की मानें तो प्रमुख पद भाजपा के ही हिस्से में जायेंगे। इसलिए विधानसभा चुनाव में ये नतीजे कोई निर्णायक असर नहीं डालने वाले। लेकिन इस पहलू को भी नजरंदाज नहीं किया जा सकता कि जनादेश भाजपा के खिलाफ तो है। राजनैतिक विश्लेषक और पत्रकार वीरेंद्र दीपक कहते हैं कि जनादेश पूरी तरह भाजपा के खिलाफ है और इसकी दो प्रमुख वजहें किसान आंदोलन और कोरोना के मसले पर सरकार की संपूर्ण विफलता है।
- लेखक मीडिया नाऊ के कार्यकारी संपादक हैं

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