मीडिया Now - धर्मनिरपेक्ष कोरोना 

धर्मनिरपेक्ष कोरोना 

medianow 06-05-2021 15:26:10


प्रदीप यदु /

1. चलिये शुरुआत करते हैं केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी के ट्वीट से ,नकवी जी ने ट्वीट किया, " भारत में कोरोना फैलाने तबलीगी अपने आपको कोरोना वॉरियर बता रहे हैं। कमाल है।तबलीगी अपने गुनाहों पर शर्म करने के बजाय लाखों कोरोना योद्धाओं का अपमान कर रहे हैं।इसे कहते हैं 'चोरी और सीनाजोरी" तो ये है सरकार की नज़र और सोच ? स्पष्ट है कि मंत्री जी के इस ट्वीट को प्रधानमंत्री जी का पूर्ण समर्थन भी प्राप्त होगा , क्योंकि उनकी अनुमति के बिना मजाल है कि उनका मंत्री कोई ऐसा बयान दे सके ? सरकार तो बस हाथ धोकर तबलीगी जमात के पीछे पड़ी है और पड़े भी क्यों ना- हिन्दू-मुस्लिम का खेल तो चलना ही चाहिए भले ही हज़ारों जीवन ही कोरोना की भेंट क्यों ना चढ़ जाएं ?

2. महीने भर पहले निज़ामुद्दीन में  सरकार को ऐसा नगीना मिल गया जिसकी चमक के चलते पूरे देश में ये सनसनी फैला दी गई कि भारत में कोरोना का बीज तो तबलीगी जमात ने ही बोया है । बेशक दुनिया इसे कोविड 19 के नाम से सम्बोधित करे या "नमस्ते ट्रम्प के महानायक" इसे चीनी वायरस का नाम दें , हमें कोई फर्क नही पड़ता , भारत में तो कोरोना को "तबलीगी जिहाद/तबलीगी बॉम्ब/तबलीगी आतंकवाद" ही बुलाया जाएगा । सरकार ने बड़ी सफलता पूर्वक निज़ामुद्दीन जमात को हिन्दू-मुस्लिम का जामा पहनाया और ये खेल अभी तक चल रहा है ।मीडिया भी इस खेल में घी डालने का काम बखूबी निभा रही है ।चाटूकार भी इसमें नमक मिर्च को सही मात्रा में मिला रहे हैं । नौकरशाही भीगी बिल्ली बन अपनी पदोन्नति को अंजाम देना चाहते हैं ,रिटायरमेंट के बाद राज्यसभा के सांसद ,राज्यपाल तथा अन्य पदों की गाजर को लपकना चाहते हैं। इससे बेहतर मौका उन्हें थोड़े ही मिलेगा जब अपनी पूरी वफादारी अपने  सुल्तान को दिखा सकें।कोई फर्क नही पड़ता कि कितने जीवन कोरोना निगल जाये ?

3. सवाल ये है कि नकवी साहेब ने इस ट्वीट को क्यों चालाकी से दुनिया के सामने लाया ? तबलीगी जमात को खलनायक तो बना ही दिया गया है पर जब एक जमाती तबरेज़ जो कोरोना संक्रिमत था , ठीक होने पर उसने डॉक्टरों के सुझाव पर अपना खून दिया ताकि उसके प्लाज़्मा को अन्य संक्रिमत लोंगों को दिया जा सके और उस प्लाज़मा की " एंटी बॉडीज़ "अन्य रोगियों की मदद कर सके । हालांकि ये कोई फाइनल इलाज़ नही है पर पूरी दुनिया में जो भी प्रयोग चल रहे हैं उनमें " प्लाज़्मा थेरेपी " भी एक विकल्प है । जब तबरेज़ ने खून दिया तो अन्य जमाती भी सामने आ गए , अभी तक 30 से ज्यादा जमातियों के रक्तदान किया है और करीब 300 जमातियों ने रक्तदान हेतु रजिस्ट्रेशन भी करवा लिया है । ये बात शायद सरकार को नागवार गुजरी कि तबलीगी जमाती "खलनायक से महानायक" कैसे बन सकते हैं ? बस क्या था , शुरू कर दिया मुस्लिम-मुस्लिम खेलना ? नकवी साहेब , बांग्लादेश में भी इस्कोन टेम्पल में 31 हिन्दू कोरोना संक्रिमत पाए गए हैं पर वँहा की सरकार ने इसे " हिन्दू कोरोना आतंकवाद " की उपाधि से नही नवाज़ा ?अगर वो ऐसा कर देते तो माननीय ग्रहमन्त्री अमित शाह जी अपने NRC/CAA के मुद्दे पर तो पूरे भारत में अपनी दूरगामी दृष्टि को सत्य बताते हुए हर मीडिया माध्यम में पूरे जोश के साथ वाहवाही लूटते नज़र आते ? बांग्लादेश, जिसे इंदिरा गांधी ने सन 1971 में पाकिस्तान के दो टुकड़े कर बनाया था , कम से कम उसी बांग्लादेश से कुछ सबक सीख लेते - क्या कहते हैं नकवी साहेब ? अब दूर क्यों जाना ,सुना तो ये भी है कि जयपुर , राजस्थान में एक "चिलम बाबा" ने संभावित 300 लोंगों को संक्रिमत कर दिया , अब क्या इसे "चिलम आतंकवाद" का नाम दे दिया जाये ? 

4. कहानी यंही समाप्त नही होती , ये तो शायद प्रारंभ है ? स्वास्थ मंत्रालय के प्रवक्ता लव अग्रवाल ने तो प्रेस ब्रीफिंग में इतना तक कह दिया कि "प्लाज़्मा थैरेपी गैरकानूनी है, मरीज़ को नुकसान मुमकिन है "।लव अग्रवाल ने कहा कि अभी इस पर प्रयोग चल रहा है और ICMR की अनुमति के बिना इसका उपयोग करना गैरकानूनी है ।श्रीमान लव अग्रवाल जी क्या दिल्ली में प्लाज़्मा थैरेपी के ऊपर काम बंद हो जाना चाहिए ? क्या कोरोना की दवाई बिना प्रयोगों के, एक जादू के डंडे को घुमाने से बन जायेगी ? क्या हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन, जो आपने ट्रम्प की धमकी मिलने के बाद अपनी दुम दबाकर अमेरिका को भेजी थी ; क्या ये मलेरिया की दवा कोरोना खत्म करने की सिद्ध दवा है ? अगर इस रक्तदान की शुरुआत एक हिंदू ने की होती तो क्या आप इसी प्रकार के बच्चों जैसे तर्क देते ? आप एक पढ़े लिखे अधिकारी हैं, आपके पास संवैधानिक अधिकार हैं , कब तक अनपढ़ नेताओं की चापलूसी करते रहोगे ? सच बोलने और सुनने की हिम्मत रखिये श्रीमान ?क्या सिर्फ आधे अधूरे आंकड़े देकर जनता को गुमराह करना ही आपका काम रह गया है ? आज आप अपनी चहेती "ICMR" से भी तो सवाल पूछने की हिम्मत जुटाइये की क्यों उन्होंने एक भारतीय कम्पनी के PPE तथा टेस्टिंग किट बनाने के सुझाव को अनुमति नही दी थी जबकि ये सुझाव दिसम्बर 2019 को दिया गया था जब भारत में एक भी कोरोना का मरीज नही था ? तब तो आपने कहा था कि भारत में कोरोना संकमण का खतरा है ही नही? अब आपकी इसी ICMR ने चाइना से 6 लाख टेस्टिंग किट मंगवाई जो बेकार ही सिद्ध हुईं और अब आप इसे वापस चाइना भेज रहे हैं ? आप ये भी तो देश को बताइये कि 300 रुपयों की एक किट को 650 रुपयों में क्यों खरीदा गया ? किसने कितना कमीशन लिया , किस लेवल तक लिया गया , बताइये देश को ? कभी ताबूत पर तो कभी कोरोना पर जेब गरम करना ही क्या जन्म सिद्ध अधिकार बन गया है ? डालिये ICMR के यमदूतों को तिहार में, दिखाइये अपना 40 इंच का सीना ? है हिम्मत ?

5. जिस प्लाज़्मा थैरेपी को आप गैरकानूनी बता रहे हैं उसे विश्व के अनेक देश एक ऐसा प्रयोग बता रहे हैं जो वैज्ञानिक माँपदण्ड में खरा उतरता है । आप या आपकी ICMR सही हैं या अन्य देशों के वैज्ञानिक चिकित्सक , ये आप नही तय करेंगे ,ये देश की जनता तय करेगी । लव अग्रवाल जी ,आपने डॉक्टर सौम्या स्वामीनाथन का नाम तो सुना ही होगा , जो वर्तमान में "WHO" की मुख्य चिकित्सा वैज्ञानिक हैं ? आपको इस बात की भी जानकारी होगी कि डॉक्टर सौम्या  " भारतीय चिकित्सा शोध परिषद" की पूर्व डायरेक्टर जनरल भी रह चुकीं हैं , इसके अलावा वो भारतीय स्वास्थ मंत्रालय की पूर्व सचिव भी रह चुकीं हैं ? उनका कहना ये है कि अभी तक विश्व में कोरोना के वैक्सीन या अन्य विकल्पों पर जो काम हो रहा है उनमें से प्लाज़्मा थैरेपी  वैज्ञानिक दृष्टिकोण से एक सशक्त विकल्प है तथा प्लाज़्मा थैरेपी ने भूतकाल में कई बीमारियों के खिलाफ सफलता पूर्वक इलाज़ भी किया है ।अब आप ही सोचिए देशवासियों , क्या प्लाज़मा थैरेपी का प्रयोग बंद कर देना चाहिए क्योंकि मुख्तार अब्बास नकवी साहेब को बुरा लगा कि तबलीगी जमातियों के आगे बढ़कर प्लाज़्मा थैरेपी के लिए ,डॉक्टरों के कहने पर अपना रक्तदान किया है ? क्या इसे लव अग्रवाल के कहने पर ठंडे बस्ते में डाल देना चाहिए क्योंकि उनकी "अनप्रोफेशनल तथा भृष्ट ICMR"  ऐसा सोच रही है ? कमाल की है सरकार , उनके मंत्री तथा उनके अधिकारी की सोच ? देश के स्वास्थ मंत्री हर्षवर्धन तो स्वयं एक डॉक्टर हैं ,बैठें आमने सामने और करें डॉक्टर सौम्या से दो दो हाथ , देखें किसका पलड़ा भारी है ?

6. अगर आप प्लाज़्मा थैरेपी को "तबलीगी जमात" नाम के मोहरे से कोरोना की लड़ाई में शतरंज  से हटाना चाहते हैं तो आगे कोई भी चर्चा करना अनुचित होगा क्योंकि भैंस के आगे बीन बजाने से भैंस नाचने तो लगेगी नही ? चलिए अब अन्य विकल्पों को आजमाते हैं ? बाबा रामदेव कंहा छुपकर बैठे हैं ? उन्हें  सामने लाइये ताकि वो ही कोई दवा बना सकें जो कोविड 19 को जड़ से ही समाप्त कर दे ? सुना है कि अब बाबा जी निश्चिन्त हो गये हैं , उनका काफी कर्ज ( NPA ) भी सरकार ने माफ कर दिया है , अब व्यापारी से चिकित्सक की भूमिका संभाल लें जैसे मुंबई की मेयर ने नर्स की भूमिका का पालन करना शुरू कर दिया है ? बाबा जी से बहुत अपेक्षा है कि एक भारतीय आर्युवैदिक औषधि " कोरोना मारकवटी" ही बना दें जो कोरोना के तोड़ का प्रमाणित विकल्प हो ताकि उस औषधि को पूरे विश्व में निर्यात कर देश की बदहाल अर्थव्यवस्था को ही थोड़ा सहारा दिया जा सके ? बेशक अगर ऐसा होता है तो हिन्दू, कोरोना की लड़ाई में मुस्लिम के ऊपर भारी पड़ जायेगा । एक तीर से दो शिकार हो सकते हैं , पहला कोरोना की लड़ाई में भारत को विश्वगुरु का खिताब ,दूसरा हिन्दू-मुस्लिम खेल और भी रोमांचक ? गलत तो नही कह रहा हूँ ? अगर बाबा रामदेव की डॉक्टरी , झोले तक ही सीमित हैं तो दूसरे महापुरुषों को सामने करिये जो " गौमूत्र तथा गोबर थैरेपी" के महान ज्ञानी हैं ? इसमें तो किसी शोध की भी ज़रूरत नही है , अगर गौमूत्र, आतंकी सांसद प्रज्ञा ठाकुर के कैंसर को दूर कर सकता है तो मजाल है कि कोविड 19 कोई पंगा ले सके ? इस औषधि को भी एक अच्छा सा नाम जैसे " गंगोत्री रामबाण कोरोना अमृत " देकर पूरे विश्व में निर्यात किया जा सकता है ? अगर प्लाज़्मा थैरेपी , रामदेव थैरेपी या गौमूत्र थैरेपी काम नही करती तो एक और विकल्प अभी भी शेष है " ट्रम्प थैरेपी " ये तो सटीक अचूक विकल्प है क्योंकि ये अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रम्प द्वारा बताई गई थैरेपी है ? ट्रम्प ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि इंसानों को कीटनाशक दवा के इंजेक्शन दिए जाएं ताकि चाइनीज़ वायरस को इंसान के शरीर के अंदर मारा जा सके ? "हाऊडी मोदी" के बाद "नमस्ते ट्रम्प" से तो सिर्फ हिसाब बराबर हुआ , हम तो विश्वगुरु हैं , हमें तो अमेरिका पर एक और उपकार करना है , पहले डर के मारे हाइड्रोऑक्सिक्लोरोक्विन भेजीं थीं अब निडर होकर "ट्रम्प थैरेपी" पर मुहर लगा दी जाय , मोदी जी, सच्ची दोस्ती निभाने का यही तो वक्त है ? इससे हमें कोई फर्क थोड़े ही पड़ता है कि अमेरिका ने भारत सरकार के सभी ट्विटर हैंडल्स को अनफॉलो कर दिया है ? इसके अलावा ,संयुक्त राष्ट्र ने भी भारत को एक जातिवाद देश के नाम से सम्बोधित करते हुए कई टिप्पणीयां की हैं । और तो और , अमेरिका के एक अधिकृत संगठन " यूनाइटेड स्टेट्स कमीशन ऑफ इंटरनेशनल रिलीजियस फ्रीडम" ने भारत को पहली श्रेणी में खड़ा कर दिया है जिसके अनुसार विश्व के 14 कट्टर जातिवाद देशों में भारत भी है , इसी श्रेणी में चीन,पाकिस्तान और ईरान भी आते हैं,  इसके पहले भारत को इस प्रथम श्रेणी में उस समय रखा गया था जब गुजरात में "गोधरा हत्याकांड" को अंजाम दिया गया था। गजब का संयोग है मोदी जी उस समय गुजरात के मुख्यमंत्री थे और अब देश के प्रधानमंत्री ? काश हम कट्टर जातिवाद में प्रथम श्रेणी में ना होकर कौमी एकता में पहली पादान में खड़े होते ? खैर, अब पछतात होत क्या - जब चिड़िया चुग गई खेत ? अब तो नाक बचाने और दोस्त-दोस्त खेल को जारी रखने के लिए , ट्रम्प थैरेपी पर जैसे ही भारत सरकार की मुहर लगी उधर सभी ट्विटर हैंडल्स फिर से चालू , साथ ही सभी पाप भी धुल जायेंगे ? कोई टेंशन नहीं ।

7. बात शुरू हुई थी नकवी साहेब के तबलीगी जमात के ट्वीट से , फिर पहुंची स्वास्थ मंत्रालय द्वारा प्लाज़मा थैरेपी को गैरकानूनी बताने पर , फिर पहुंची अन्य देशी विकल्पों पर और समाप्त हो रही है ट्रम्प थैरेपी पर ?

8. हम ऐसे कैसे सुधर सकते हैं ,जब बड़े बड़े खिलाड़ी इस हमाम में कौमी खेल को  सुनियोजित तरीके से अंजाम दे रहे हैं ? आज से करीब 5 महीने पहले मोहन भागवत ने पूरी 130 करोड़ की जनता को हिन्दू बताया था , सही समय पर हवन की आग में घी डाला था ,दिल्ली की सत्ता की कुर्सी जो सामने थी ? देश के गद्दारों को गोली भी मरवा दी, शाहीन बाग तक करंट भी भेज दिया, दिल्ली में दंगे भी करवा दिये , नमस्ते ट्रम्प का ओछा आयोजन भी हो गया पर कुर्सी केजरीवाल को मिल गई ।  देश की जनता उतनी मूर्ख नही है जितना ये शीर्ष कौमी खिलाड़ी समझते हैं ।अब यही मोहन भागवत बिना तबलीगी जमात का नाम लिए हुए कहते हैं कि एक समुदाय के कुछ लोंगों ने अगर ग़लती कर भी दी है तो इसका खामयाजा पूरी कौम क्यों भुगते ? दोष पूरे समुदाय पर नही मढ़ा जाना चाहिए ? गजब की स्ट्रेटेजी है ,पहले जातियों के बीच मारकाट करवाओ फिर मलहम लगाने का काम करो ? मोदी जी ने भी ट्वीट करते हुए कहा कि " कोरोना जाति और धर्म में कोई भेदभाव नही करता इसीलिए कौमी एकता ज़रूरी है , खासकर इस महामारी के परिपेक्ष में। मोहन भागवत जी , मोदी जी क्या सोचा था कि हिन्दू-मुस्लिम के खेल का टीवी प्रसारण सिर्फ देश में सीमित रह जायेगा ? महोदय , सेटेलाइट का जमाना है , सब कुछ , हर समय, हर देश को, हर धर्म के लोंगों को 24×7 नज़र आता है कि कंहा क्या हो रहा है , क्यों हो रहा है और कौन करवा रहा है ? जैसे ही अरब देशों ने सख्ती दिखाई , संघ प्रमुख तथा प्रधानमंत्री जी के तेवर ही बदल गये, इतने मीठे बोल जैसे कि कोई  तपस्वी संत प्रवचन कर रहा हो ? खुदा का शुक्रगुज़ार होना चाहिए कि मुस्लिम देशों के शासकों के पास संघी सोच नही है , अगर होती तो अरब देशों में कार्यरत हिन्दू या तो वँहा की जेलों में होते या फिर उन्हें देशनिकाला कर हिंदुस्तान में खदेड़ दिया जाता ? मोहन भागवत जी, देश तो तब विश्वगुरु बनेगा जब सर्वधर्म समान होंगे , एकांत में ध्यान कर सोचिएगा ज़रूर कि क्या आपकी "छद्म हिंदुत्व" की परिभाषा सही है या इसमें सुधार की आवश्यकता है और वह भी तुरन्त ? एक पुराना गाना बड़ा सार्थक प्रतीत होता लग रहा  है " लाख छुपाओ छुप ना सकेगा राज है इतना गहरा-दिल की बात बता देता है असली नकली चेहरा"। गलत तो नही है मोहन भागवत जी ?

9. कोविड 19 किसी खास धर्म का ना दोस्त है और ना ही दुश्मन । शायद कोरोना से बड़ा धर्मनिरपेक्ष कोई और हो ही नही सकता क्योंकि इसके लिए सभी जातियां , सभी धर्म , अमीर हो या गरीब , प्रधानमंत्री हो या मज़दूर , महिला हो या पुरुष , बूढ़ा हो या बच्चा , गोरा हो या काला , ब्राम्हण हो या दलित, सभी एक ही तराज़ू में तौले जाते हैं । इसकी मार भी सबके ऊपर एक समान है। अगर ठीक हो गए तो ठीक वरना श्मशान या कब्रिस्तान तो हैं ही ,जो खुले हाथों से सबके स्वागत के लिए बैचेन हो रहे है। सरकार , अधिकारी तथा मीडिया अगर आप कुछ सकारात्मक नही कर सकते तो कम से कम कोविड 19 वायरस से धर्मनिरपेक्षता का पाठ तो सीख ही लें और अपना घिनौना "हिन्दू-मुस्लिम" का खेल  बंद करिये ,इसी में आपकी भलाई भी है क्यों गरीब आदमी तथा कोरोना वारियर्स तो कोरोना से जूझ ही रहे हैं,बड़ी सहनशीलता के साथ सरकार के सभी निर्देशों का पालन भी कर रहे हैं , पर कब तक ? नकवी जी "चोरी और सीनाजोरी" का खेल जनता समझने लगी है ।

      जयहिंद ,

 ब्रिगेडियर प्रदीप यदु, सेवा निवृत्त
 रायपुर , छत्तीसगढ़

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