मीडिया Now - हेमंत सोरेन के एक ट्वीट ने पूरी मोदी सरकार की लंगोट उतार दी है

हेमंत सोरेन के एक ट्वीट ने पूरी मोदी सरकार की लंगोट उतार दी है

medianow 07-05-2021 22:46:08


श्याम मीरा सिंह / हेमंत सोरेन के एक ट्वीट ने पूरी मोदी सरकार की लंगोट उतार दी है. जिसकी भरपाई के लिए भाजपा के मुख्यमंत्रियों से लेकर नोर्मल नमूनों तक को लगा दिया गया है और सिखाया जा रहा है कि हेमंत ने पद की गरिमा का ख़्याल नहीं रखा. पहली बात ये कि पद और पद पर बैठा आदमी, ये दो अलग चीजें हैं ये एक चीज़ नहीं है. अगर कोई अयोग्य आदमी छल, बल, कपट से उस पर बैठ गया है तो ज़िम्मेदारी बनती है कि पद की गरिमा बचाने के लिए उस अयोग्य आदमी को पद से उतारा जाए. राम मनोहर लोहिया ने तो कहा भी है कि  “ज़िंदा क़ौमें पाँच साल तक इंतज़ार नहीं करतीं”. प्रधानमंत्री ने जिस अयोग्यता का परिचय दिया है उस हिसाब से पहली कोविड वेव के समय ही उनसे इस्तीफ़ा लेकर उन्हें हिमालय भेज देना चाहिए था. पर देश का दुर्भाग्य है कि जब हर रोज़ 4 लाख से ज़्यादा कोविड मामले आ रहे हैं, और चार हज़ार से ज़्यादा निर्दोष नागरिकों की जान जा रही है, वैसे महासंकट के समय में भी इस देश को एक निहायत अयोग्य आदमी की ओर देखना पड़ रहा है, कि वो कुछ बोलेगा तो नीति बनेगी. वो कुछ आदेश देगा तो ऑक्सिजन मिलेगी. वो कुछ निर्देश देगा तो रेमडेसिविर आएगी. वो कुछ मीटिंग लेगा तो सख़्ती आएगी. इससे बड़ा दुर्भाग्य क्या होगा कि देश आज़ादी के बाद सबसे बड़े संकट से गुजर रहा है और उसे सँभालने के लिए आज़ादी के बाद सबसे अयोग्य नेतृत्व उसपर राज कर रहा है. 

वैसे में ‘पद की गरिमा’ बचाना क्या है? एक अयोग्य आदमी को पद से हटाना? या एक मूर्ख आदमी के क़ब्ज़े को सहते जाना है? अगर कोई बंदर डॉक्टर के कपड़े पहनकर किसी ‘ऑपरेशन थिएटर’ में घुस जाए और उसके हाथ ‘सर्जिकल चाकू’ पड़ जाएं और सामने गंभीर मरीज़ हो. तो आप क्या निर्णय लेंगे. तब कोई कहे कि बंदर के हाथ से ‘सर्जिकल चाकू’ छुड़ाना, डॉक्टर के पद की गरिमा का अपमान है तो वह कितना सही है? अगर मरीज़ और डॉक्टर के पद की गरिमा, ये दोनों ही बचानी हैं तो सबसे पहले डॉक्टर बने बंदर को भगाने की ज़रूरत है. यही काम हेमंत सोरेन ने किया. पिछले डेढ़ साल से ये देश आंशिक या पूर्ण लॉकडाउन से गुजर रहा है. हज़ारों डॉक्टर अस्पतालों में डेढ़ साल से बिना कोई छुट्टी लिए कोविड ड्यूटी कर रहे हैं. हर चौथा हेल्थ वर्कर मानसिक तनाव से गुजर रहा है. वैसे में प्रधानमंत्री चुनाव रैलियाँ करके “हुलुल हुलुल” करते हैं तो क्यों न विरोध किया जाएगा? एक अयोग्य प्रधानमंत्री की इमेज ब्रांडिंग की चिंता की जाए कि हर रोज़ अस्पतालों के बाहर मरते निर्दोष नागरिकों की. अगर इस देश के प्रधानमंत्री पद की गरिमा बचानी है तो सबसे पहले मोदी से इस पद से इस्तीफ़ा लेना चाहिए. अब गाँव गाँव कोरोना पहुँच गया है, वहाँ से लाशें आना शुरू हो गया है, प्रोटोकॉल बचाना है कि जनता, ये फ़ैसला आपको करना है.

ये देश एक गंभीर मरीज़ के रूप में भविष्य के सामने लेटा हुआ है, ऑपरेशन थिएटर में एक अयोग्य आदमी घुस आया है. जिसके हाथ में सर्जिकल चाकू के रूप में “संवैधानिक शक्तियाँ, आर्मी, केबिनेट, राज्यपाल” पड़ गए हैं. तय आपको करना है कि उससे ही इलाज कराना है या उसे ऑपरेशन थिएटर से बाहर निकालकर, इस देश को बचाना है. 

प्रधानमंत्री पद की गरिमा बचानी है तो मोदी का इस पद से इस्तीफ़ा लेना चाहिए.
- लेखक आजतक के पत्रकार हैं

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