मीडिया Now - कोविड-19 से इस वर्ष छुटकारा मिलते हुए नहीं दिखाई दे रहा है

कोविड-19 से इस वर्ष छुटकारा मिलते हुए नहीं दिखाई दे रहा है

medianow 02-04-2021 14:38:31


जया सिंह /  मार्च 2020 में जिस तरह से कोविड-19 हमारे देश में प्रवेश कर अचानक हमारी दौड़ती भागती दुनिया को एक विराम लगा दिया था जो कि एक अविश्वसनीय और अकल्पनिक घटना ही कही जा सकती है। हजारों वर्षों का इतिहास साक्षी है की एक से बढ़कर एक समस्याएं आई परतुं इस अकल्पनीय समस्या के सामने बौनी दिखाई देती है। हमारे गुरु श्री केएन राव सर का कहना है कि जब वै छोटे थे तो द्वितीय विश्वयुद्ध के समय, जब हमारा देश गुलाम था हमने बचपन में इतनी समस्याओं का सामना नहीं किया था।

आज के समय में सामान्य जनजीवन अब जैसे दुर्लभ बनता जा रहा है। 2020 के चैत्र प्रति पदा चार्ट में बहतु ही मुश्किल समय का संकेत मिला था, जिसे मैंने आपके साथ साझा भी किया था। वाराह- मिहिर के समय से यह सिद्धांत अनकों बार फलित हुआ है कि जब-जब कर्क और मकर राशि की धुरी गोचर मे पीड़ित होती है तो देश को संकटों का सामना करना पड़ता है। इसके अनके उदाहरण हमें मिल सकते हैं जैसे-
1)1947 में कर्क और मकर राशि की धुरी पीड़ित थी तो हमारे देश का बटंवारा हुआ और 2000000 से भी ज्यादा लोग मारे गए थे। 
2)1962 में भी कर्क और मकर राशि की धुरी पीड़ित थी तो चाइना के साथ हमारा 1962 में अक्टूबर में युद्ध हुआ जिसमें न केवल हम हारे बल्कि हमारा मान एवं देश का गौरव भी पीड़ित हुआ। 
3) मई 1991 में भी कर्क और मकर धुरी पीड़ित थी लिहाजा तत्कालीन प्रधानमंत्री श्री राजीव गांधी आतकिंयों के चपेट में आकर मारे गए ।

26 दिसंबर 2019 का सूर्य ग्रहण जिसने बहुत पहले ही हमें इस भयानक अप्राकृतिक घटना के संकेत दे दिए थे। जिसका जिक्र मैंने उस ग्रहण के समय भी किया था एवं चैत्र प्रति पदा 2020 में मकर और कर्क राशि की धुरी भी पीड़ित थी। पीछे गए वर्ष में एक ऐतिहासिक अकल्पनीय घटना के रूप को पूरे वर्ष को देखा गया। उसी समय मैंने यह भी शोध किया था कि जब गुरु और केतु का समीकरण धनु राशि में बनता है तो उसके क्या प्रभाव पड़ते हैं, उसका भी जिक्र मैंने अपने  लेख एवं वीडियो के माध्यम से किया था। जिसमें यह पाया गया था की किसी ना किसी प्रकार से बीमारियों का संक्रमण इस काल में बढ़ता है जिससे जान माल की काफी क्षति होती है । केतु और गुरु के इस समीकरण की पुनरावृत्ति 129 वर्षों के बाद होती है। इस कारण मुझे इस पर शोध करने के लिए 1000 वर्ष तक का पीछे जाना पड़ा और ऐतिहासिक पृष्ठ भूमि के साथ आंकलन करना पड़ा था। उसी समय मुझे एक चौंकाने वाला तथ्य सामने दिखा था, वह यह था कि जब भी केतु और गुरु का आपसी संबधं धनु राशि में बना तो उसका जो समय था वह बहतु छोटा होता था कुछ महीने या कुछ दिन कहीं-कहीं पर मैंने केवल 15 दिनों का ही समीकरण पाया था परंतु 2019 में जब यह गुरु केतु का समीकरण बना 5 नवबंर 2019 से प्रारभं होकर 24 सितबंर 2020 तक चला जो कि बहतु लंबा समय था और उस पर से सोने पर सुहागा यह कि 25 जनवरी 2020 तक इस पर शनि महराज ने भी संबधं बनाए रखा और इस समीकरण को एक खतरनाक रूप में परिणत कर दिया।

ज्ञात हो कि 17 नवंबर 2019 को पहला केस कोविड-19 से संबधिंत चीन के हुबेई प्रांत के वुहान शहर में पाया गया था और 26 दिसंबर 2019 के ग्रहण के बाद 31 दिसंबर 2019 को चाइना ने अपने देश में नए प्रकार के वायरस के संक्रमण को स्वीकार किया और 11 जनवरी 2020 को कोविड-19 से पहली डेथ को भी चाइना ने स्वीकार किया था। एवं 10 जनवरी 2020 तक कोविड-19 नामक वायरस ने पूरे बुहान शहर को अपनी गिरफ्त में ले लिया था । 20 जनवरी 2020 को डब्ल्यूएचओ ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वास्थ्य संबंधी इमरजेंसी घोषित कर दिया। ग्रहों और उनकी गति को देख कर ही प्राचीन काल से ही हमारे ज्योतिष विद्वान सटीक भविष्यवाणी करते आए हैं। 25 जनवरी 2020 शनि देव मकर राशि में प्रवेश करते है साथ ही धनु राशि पाप कर्तरी में पहुंच जाता है। चाइना इस समय अपने देश में बुहान शहर से जो भी आने जाने वाली सभी सेवाओं पर रोक लगा दी -ट्रेन पर, प्लेन ,रोड आदि पर रोक लगा दिया जिससे वह अपने बाकी प्रांतों को सुरक्षित कर सके।

वही योजनात्मक तरीके से बाकी देशों में फैलने दिया गया यानि वुहान शहर से बाकी देशों के साथ आवाजाही बरकरार रही । और 9 फरवरी 2020 को मंगल जैसे ही धनु राशि में गुरु और केतु के साथ समीकरण में शामिल होता है और 22 मार्च 2020 तक धनु राशि में रहकर इस वायरस को पूरे विश्व में एक विस्फोटक के रूप में प्रकट कर दिया। ज्ञात हो कि 12 फरवरी 2020 से 11 मार्च 2020 तक यह विश्व स्तर पर कोविड -19 फैल गया और लगभग 50 लाख से ज्यादा लोग इस वायरस से संक्रमित हुए एवं 300000 लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा था। 

यदि भारत की बात करें तो चैत्र प्रति पदा की कुंडली में हमारे देश के प्रधानमंत्री की स्थिति काफी मजबूत दिखाई दे रही थी। उन्होंने समय रहते ही सराहनीय कदम उठा लिए जिससे बहतु सारी जानमाल की सुरक्षा हो सकी। परंतु कर्क और मकर धुरी पीड़ित होने के कारण और ग्रहण के समय की कुंडली में भी भारत देश के लिए अच्छा संकेत नहीं मिला था। यह सारे समीकरण एक ही तरफ संकेत कर रहे थे -
सांप्रदायिक तनाव अतः भारत देश में एक धर्म विशेष के लोगो जिन्हें जमाती भी कहा जाता है के द्वारा इस वायरस को आतंकी विस्फोटक के तरह इस्तेमाल करते हएु योजनाबद्ध तरीके से पूरे देश में फैला दिया गया। गुरु एवं केतु का यह समीकरण निश्चित तौर पर पूरे विश्व में एक दीर्घकालीन परिवर्तन को लेकर उदय हुआ था। इस समीकरण में न केवल लोगों के स्वास्थ्य को बल्कि धार्मिक, सामाजिक, आर्थिक और विभिन्न व्यवस्थाओं से संबंधित परिवर्तन कर दिया। साथ ही नई टेक्नोलॉजी का भी बहुतयात में प्रयोग शुरू हो गया। 

अब हम चैत्र प्रति पदा 2021, नव वर्ष से संबधिंत कुंडली के द्वारा कोविड-19 से संबधिंत क्या संभावनाएं एवं किस रूप में प्रकट होगी का आकलन करेंगे। वृषभ लग्न उदय हो रहा है जोकि हमारे देश का लग्न भी है वहां पर राहु रोहिणी नक्षत्र में स्थित है। रोहिणी नक्षत्र पर जब भी शनि या राहु का गोचर होता है तो यह हमारे देश एवं पूरे विश्व के लिए घातक और संकट का कारण होता है। और साथ में मंगल की स्थिति इसे विस्फोटक बना रही है।

वायरस के लिए हम केतु एवं बुध और इनके नक्षत्रों को ही लेते हैं यहां पर केतु जेष्ठा नक्षत्र में वृश्चिक राशि में स्थित है जिस पर मंगल की दष्टिृ है जो इसे और खतरनाक स्वरूप प्रदान कर रही है। इसके साथ ही साथ सूर्य चंद्रमा एवं बुद्ध तीनों ही रेवती नक्षत्र में स्थित है । ऐसी स्थिति में मुझे अभी तो कोविड-19 से इस वर्ष छुटकारा मिलते हुए नहीं दिखाई दे रहा है। ग्रहों के यह समीकरण एवं अष्टम भाव पाप कर्तरी में स्थित होने के कारण जान माल के नुकसान होने की संभावना को भी प्रकट कर रहा है। हमारे देश में सीमाओं पर युद्ध की संभावना तो बनी ही हुई है। साथ ही सांप्रदायिक तनाव भी लगातार दिखाई दे रहा है। आतंकी घटना की भी संभावना पूरी तरह से बनी हुई है। और साथ ही साथ बेहद दुखद है परंतु इन वायरस का इस्तेमाल आतंकी विस्फोटक के रूप में भी कर सकते हैं। इस तरह की संभावना यह चार्ट प्रकट कर रहा है या फिर हमारे विकास को रोकने के लिए वायरस रूपी विस्फोटक का इस्तेमाल अन्य देशों द्वारा किया जा सकता है। जिस तरह से ओपेक देशों ने जो कि अरब देश है, जो तेल का निर्यात करते हैं चाइना के साथ खड़े दिखाई दे रहे हैं हमें अपने व्यापार एवं निर्यात को खाड़ी देशों के स्थान पर अमेरिका से बढ़ाना पड़ रहा है। साथ ही quad देश जिसमें जापान ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका के साथ भारत भी शामिल है जिसमें से भारत देश की सीमाएं सबसे ज्यादा लंबी चाइना के साथ है ।

अतः वैमनस्यता बढ़ने पर भारत देश के ऊपर अच्छे प्रभाव पड़ने के संकेत हरगिज़ नहीं दिखाई देते हैं। इसका कारण चैत्रप्रतिपदा चार्ट में अष्टम भाव
की पीड़ा कोवड-19 के न्यूम्युटेंट्स के आने की संभावना को स्पष्ट रूप से प्रकट कर रहा है । इसलिए सावधानी ही सुरक्षा है। लगातार इस तरह के एक के बाद एक ग्रहों के समीकरण आगे आने वाले समय में विश्व स्तर पर वायरस जनित युद्ध की चेतावनी दे रहे हैं। आधुनिक टेक्नोलॉजी का प्रयोग बहुतायत में होने लगेगा एवं अब युद्ध मैदानों में न होकर वायरस के रूप में हॉस्पिटलों में होने की संभावना को प्रकट कर रहा है। 2010 में हमारे गुरु श्री केएन राव सर ने विशाखापट्टनम में एक विश्व स्तरीय ज्योतिष सम्मेलन में तृतीय विश्वयुद्ध की संभावना 2028 से 2030 के मध्य बताई थी उसका प्रारंभ 2019 दिसंबर से हो जाएगा। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद यह संभावना व्यक्त की गई थी अगला विश्वयुद्ध बायोलॉजिकल विश्व युद्ध हो सकता है जिसकी पुष्टि 2019 दिसंबर के सूर्य ग्रहण चार्ट से हो रही है और उसके बाद एक के बाद एक प्रति पदा चार्ट नई उन्नत विश्व की नकारात्मक विकास की पीड़ा को दिखा रहा है।
- लेखिका एक जानी मानी ज्योतिषी हैं। 

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