मीडिया Now - पानी बरसे सदर में , छाता मछलीशहर में?

पानी बरसे सदर में , छाता मछलीशहर में?

medianow 11-05-2021 14:58:49


चंचल / मोदी के साथ एक नया दुमछल्ला लगा है ' मुमकिन 'जनाब मोदी साहब ने ऐलान किया कि हम चौकीदार हैं , पूरे देश मे चौकीदार की एक नई प्रजाति निकल आयी । अब मुमकिन चलने लगा है, बकैयाँ ही  सही। बिहार में भी एक  मोदी हैं - सु मोदी । कई बार नीतीश के साथ जूनियर मुख्यमंत्री रहे , वाचाल हैं, बढ़ने लगे तो पार्टी ने इन्हें दिल्ली बुला लिया । लेकिन सु मोदी बिहार को नही छोड़ पाए  उसे कंधे पर लिए घूमते रहे । अचानक एक बड़ा हादसा हुआ । छपरा के नेता राजीव प्रताप रूडी के आवास से दर्जनों एम्बुलेंस  तिरपाल ओढ़े दुबके मिली। पप्पू यादव ने सब उघार कर दिया। हड़बड़ी में रूडी साहब ने सही सही बोल दिया कि ये एम्बुलेंस सांसद निधि से मंगाई गई हैं, कोई ड्राइवर नही मिल रहा इसलिए इन्हें ढंक कर रखा गया है । यह बयान एक नेता का सच है । पप्पू यादव सांसद भले रहे पर हैं बिहारी पहलवान । खुला खेल फरुक्खावादी।  भिड़ गए सरकार से , ये जानते हुए कि नीतीश सरकार भाजपा के यहां रेहन पर है । कानून की भाषा मे पप्पू  'दोखी' करार दिए गए हैं पुलिस की निगाह में, बाद बाकी अदालत जाने से क्या करना है ।क्यों कि रूडी की एम्बुलेंस देखने सु मोदी सामने आ गए। तो मुमकिन हो गया। और पप्पू यादव को गुरफ्तार कर लिया गया ।  

हुकूमत को खलल कत्तई नही  पसन्द   है । इसे पुलिस की भाषा कहती है सरकारी कामकाज (?)  में रुकावट या  वाधा । दिल्ली में बैठा बुद्धि विलाषी नई पीढ़ी से है , बोलता कम है चीखता ज्यादा है वह तय नही कर पा रहा है असल दोखी कौन है - रूडी या पप्पू यादव ? असल निजाम देखना हो तो बिहार देखो । नौकरशाही अपने बरामदे में बैठ कर  सियासतदां को जूते  की नोक पर तौल रहा है । असल अपराधी नौकरशाह है । पहला सवाल - रूडी सांसद हैं 5 करोड़ सालाना मिलता है अपने संसदीय क्षेत्र में जन्मुखी उयोजनाओं को सहयोग देने के लिए । इसे ही कहा जाता है सांसद निधि । यह पांच करोड़ सांसद को नही मिलता । सांसद को मिलता है साल भर में पांच करोड़ की योजना बना कर सरकार को देना होता है , और सरकार की कुछ गाइडलाइन है कृपया उसे देख लें । गाइड लाइन के अनुसार यह पैसा जिला प्रशासन के पास आता है , सांसद निधि का लेखा जोखा , खर्च की पारदर्शिता जिला कलेट्टर देखता है और अगली क़िस्त के पहले खर्च की गई रकम का व्योरा  केंद्रीय सांख्यकीय मंत्रालय से पास कराना   होता है । मजेदार पेंच है सरकार उधर देख नही रही है - ये एम्बुलेंस किसके नाम पर खरीदी गई ? क्यों कि सांसद या सांसद का कोई निकटतम सम्बन्धी इस निधि से फायदा  नही उठा सकता । दो - वाहन की खरीद किसी संस्था और एम्बुलेंस किसी अस्पताल के ही नाम आ सकती है यह किसी के निजी अहाते के लिए नही । 

सांसद निधि से खर्च होनेवाले रकम की गिनती तय होती है कि पहली किस्त कितने की है और और एक साल के अंदर उसी संस्था या व्यक्ति को दूसरी क़िस्त नही दी जा सकती ।इसकी निगरानी जिला प्रशासन करता है । रूडी साहब ने कितने  किस्तों में , कितने वाहन और कितनी रकम में खरीदे इसका व्योरा सांख्यकी मंत्रालय को दिया गया या नही ? सांसद निधि का खेल बनारस संसदीय सीट पर भी उलझा पड़ा है । यहां से सांसद है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं । उनके सांसद निधि का कुल 25  करोड़ रुपये के  लेखा में मात्र 17   करोड़ ही खर्च हुआ बाकी पर सांख्यकीय मंत्रालय ने रोक लगा दी यह कहते हुए कि बनारस जिला प्रशासन ने जो व्योरा भेजा है वह त्रुटिपूर्ण  है । एक तरफ प्रशासन में प्रधान मंत्री के  संसदीय निधि पर सवाल उठाया तो बिहार की क्या मजबूरी थी या कौन सा दबाव था जिसके चलते जनता के टैक्स से बनी साँसदनिधि किसी की निजी पूंजी बन रही है। सवाल जब उठा तो पहलवान पप्पू जेल? नौकरशाहों ! अभी कल की बात है , चांदनी चौक से सांसद थे विजय  गोयल । साँसदनिधि से दो बसों की माग किये कि ये बसें चांदनी चौक में पर्यटकों के लिए चलाई जांयगी । सांख्यकीमंत्रालय ने सांसद निधि के आवंटन पत्र को वापस कर दिया । फिर इन्होंने दूसरी मांग की अस्पताल के लिए बस चाहिए । वह भी वापस । सौभाग्य देखिये एक दिन विजय गोयल उसी सांख्यकीयमंत्रालय के मंत्री बने और बस पास हो गयी ।वो भी दूसरे क्षेत्र में ।  तो जनाबेआली ! ये सरकार है। इसे जौनपुर की भाषा मे कहते हैं पानी बरसे सदर में , औ छाता मछलीशहर में । निजाम में खलल रूडी नही डाल रहे , पप्पू खुराफात कर रहे । यह रपट पॉजटिव है ।
- लेखक एक वरिष्ठ पत्रकार हैं

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