मीडिया Now - मुर्दों की लाइन के बाद भोजन के लिए बच्चों की लाइन

मुर्दों की लाइन के बाद भोजन के लिए बच्चों की लाइन

medianow 11-05-2021 16:49:45


संजय कुमार सिंह / इस देश में लाइन कहां नहीं लगती है। सबको आदत है। हद तो तब हुई जब लोगों को बैंकों से अपने पैसे निकालने के लिए लाइन लगनी पड़ी और तब भी जरूरत भर पैसे नहीं मिले। लोगों ने स्वीकार किया। जिसने यह स्थिति बनाई थी वह, "घर में शादी है, पैसे नहीं हैं" कहकर हंसता रहा। (ज्यादातर) लोगों को ना बुरा लगा ना लोगों ने कहा कि बस करो, तुम्हारे कारण ही यह स्थिति है। जो विरोध कर सकते थे और नहीं किया उनकी नीन्द तब खुली जब पांच सितारा अस्पताल भी कहने लगे कि जगह नहीं है और सरकारी नालायकी से ऑक्सीजन के बिना मौत होने लगी। बढ़ते हुए श्मशान में लाइन लगी और अब बच्चे खाने के लिए लाइन में लगे हैं। टीका तो लोग लाइन लगकर, पैसे देकर लगवा ही रहे हैं। 

द हिन्दू में आज प्रकाशित यह तस्वीर देखिए। कैप्शन है, धैर्यपूर्वक – दिल्ली में लॉकडाउन एक और हफ्ते के लिए बढ़ाए जाने के बाद सोमवार को ताहिरपुर में भोजन के लिए लाइन में खड़े बच्चे। आप चाहें तो इनके धैर्य की तारीफ कर सकते हैं। वैसे यह एक दो साल की उपलब्धि नहीं है। सात साल से ज्यादा का कठिन परिश्रम और रोज 18 घंटे काम करने का हश्र है। बुरा मत मानिए, एक आदमी खुद काम करके खुश होगा और बाकियों के समय की चिन्ता नहीं होगी तो यही होना था। बिना काम के खाना तो ऐसे ही मिलेगा। लंगर में सम्मान से खा सकते थे पर हमें तो मंदिर चाहिए।
- लेखक जनसत्ता में वरिष्ठ पत्रकार रहे हैं

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