मीडिया Now - जाने वो कैसे लोग थे...

जाने वो कैसे लोग थे...

medianow 12-05-2021 11:27:02


....उस दिन 'प्यासा' (1957) के सेट पर हंगामा चल रहा था. एक तरफ म्यूज़िक डायरेक्टर सचिन देव बर्मन और दूसरी तरफ प्रोड्यूसर-डायरेक्टर गुरुदत्त. गुरू के साथ राइटर अबरार अल्वी भी थे. साहिर खामोश थे. मगर दिल से वो भी गुरू के साथ थे. मुद्दा था 'जाने वो कैसे लोग थे जिनके प्यार को प्यार मिला...' की रिकॉर्डिंग का. बर्मन दा चाहते थे इसे हेमंत कुमार से गवाया जाए. और उन्होंने हेमंत दा को बुला भी लिया था. वो बस स्टूडियो पहुँचने ही वाले थे. इधर गुरू ने मो.रफ़ी से कमिटमेंट कर रखा था. गीतकार साहिर का भी कहना था कि इसके लिए रफ़ी ही ठीक रहेंगे. मगर बर्मन दा अड़े रहे उन्होंने धमकी भी दे डाली कि अगर उनकी बात न मानी गयी तो फिल्म छोड़ देंगे. आख़िरकार गुरू को झुकना पड़ा.  बर्मन दा बहुत सीनियर थे और एक बड़ी हस्ती भी. मगर अंदर ही अंदर ये भी तय हुआ कि बर्मन दा को बिना बताये बाद में रफ़ी से गवा लिया जाएगा.

हेमंत दा की आवाज़ हटा दी जायेगी. बहरहाल, हेमंत दा आये. गाना रिकॉर्ड हुआ. बाद में रफ़ी साहब भी बुलाये गए. रफ़ी साहब को अब तक जो हुआ था उस सब से वाकिफ़ कराया गया. उन्होंने ज़ोर दिया कि उन्हें पहले हेमंत दा की आवाज़ में रिकॉर्ड हुआ गाना सुनाया जाए. तनिक झिझक के साथ गुरू ने उनकी मांग पूरी की. गाना सुन कर रफ़ी साहब ने गाने से इंकार कर दिया - हेमंत दा ने बहुत अच्छा गाया है. हेमंत दा की आवाज़ को हटा कर मेरी आवाज़ लगाने से उनका अपमान होगा. हम कह नहीं सकते कि अगर इस गाने को रफ़ी ने गाया होता तो उसका क्या इफ़ेक्ट होता? शायद बेहतर होता! मगर उस दिन रफ़ी साहब ने सही निर्णय लिया था. कालांतर में गुरू की 'साहिब बीवी और गुलाम' (1962) का म्यूज़िक हेमंत कुमार ने ही तैयार किया. 
- लेखक एक नामी फिल्म समीक्षक हैं

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