मीडिया Now - वे इंदिरा राजे थीं!

वे इंदिरा राजे थीं!

medianow 12-05-2021 18:35:19


शंभूनाथ शुक्ल / वह बेहद खूबसूरत और बोल्ड थी। आख़िर वे इंदिरा राजे थीं। उस दकियानूस जमाने में उन्होंने वह क्रांति कर दी कि ब्रिटिश गवर्नमेंट भी घबरा गई। वह इंदिरा थीं, बड़ौदा के महाराजा सयाजी राव की इकलौती बेटी। महाराजा सयाजी राव ने दिल्ली दरबार में जार्ज पंचम के समक्ष सिर नहीं नवाया था, इसलिए ब्रिटिश सरकार उनसे नाखुश थी। दिल्ली दरबार के वक्त कूचबिहार के राज कुमार जितेंद्र नारायण सिंह से इंदिरा राजे की आँखें चार हुईं और इंदिरा राजे उनको पाने को व्यग्र हो उठीं। उधर राज कुमार जितेंद्र नारायण भी, जिनके पिता नृपेंद्र नारायण सिंह को दिल्ली दरबार में ही राजा से महाराजा की पदवी दी गई थी। पर यह संभव कैसे था, क्योंकि इंदिरा राजे ग्वालियर के महाराजा माधो राव सिंधिया की वाग-दत्ता थीं। बस ही कुछ ही रोज़ बाद उनकी शादी भी होने वाली थी। आख़िर इस राज कुमारी ने महाराजा माधो राव को पत्र लिखा और कह दिया, कि वे किसी और के प्रति मोहित हैं। इसलिए महाराजा माफ़ करें। यह तीन महाराजाओं का अपमान था। आख़िर महाराजा सयाजी राव ने अपनी बेटी को लंदन भेज दिया। इसकी भनक लगते ही उसी जहाज़ में वेटर बन कर जितेंद्र नारायण भी लंदन पहुँच गए। वहीं दोनों की शादी हो गई। उसके बाद वे भारत लौटे। उस समय कूच बिहार के महाराजा राजेंद्र नारायण सिंह थे।

उनको एक नाचने वाली अंग्रेज बाला से प्रेम हो गया था। लेकिन यह विवाह संभव नहीं था। देसी रियासतें देखने वाले विभाग के अंग्रेज अधिकारी यह पसंद नहीं करते थे कि कोई महाराजा एक नाचने वाली से प्रेम करे। उनका दिल टूट गया और शीघ्र ही उनकी मृत्यु हो गई। अब महाराजा हुए जितेंद्र नारायण किंतु वे भी लंबी उम्र न पा सके। उनकी भी मृत्यु हो गई। विधवा महारानी इंदिरा राजे ने रियासत अपने पास रखी और कुशल अधिकारी नियुक्त कर रियासत की तरक़्क़ी के लिए काम किए। इन्हीं की पुत्री थीं गायत्री देवी, जिनका विवाह जयपुर के महाराजा से हुआ था। महारानी इंदिरा राजे शौक़ीन महिला थीं। उनकी जूतियाँ इटली की एक कम्पनी बनाती थी। जूतियों में भी हीरे-जवाहरात जड़े रहते थे। शिफ़ॉन साड़ी उन्हीं की देन है। महाराजा जितेंद्र नारायण की माँ सुनीति देवी केशव चंद्र सेन की पुत्री थीं। केशव बाबू ब्राह्मो समाज के स्थापकों में से थे, किंतु ब्राह्मो सिद्धांतों के विपरीत इन्होंने अपनी पुत्री की शादी कुल 14 वर्ष की उम्र में कूच बिहार के राजा से की। इसलिए वे ब्राह्मो समाज में निन्दित हुए। इंदिरा राजे का जन्म 19 फ़रवरी 1892 को बड़ौदा में हुआ था। तथा मृत्यु 6 सितम्बर 1968 को मुंबई में।
- लेखक अमर उजाला अखबार के संपादक रह चुके हैं

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