मीडिया Now - शायद इसीलिए गंगा माता ने अपने प्रिय शिष्य को बनारस बुलाया था

शायद इसीलिए गंगा माता ने अपने प्रिय शिष्य को बनारस बुलाया था

medianow 13-05-2021 11:43:11


प्रदीप यदु / जिन्हें श्मशान या कब्रिस्तान नसीब नहीं हुये - उन्हें गंगा नसीब हुई। शायद  इसीलिए गंगा माता ने अपने प्रिय शिष्य को बनारस बुलाया था ताकि गंगा की सफाई हो जाय? अंधभक्तों जरा बताओ कि इनमें हिन्दू कौन हैं और मुसलमान कौन ? आपके "सर्वशक्तिमान" तो कपड़े देख कर ही जाति/धर्म बता देते हैं? सत्तारूढ़ दल के नेताओं को सिर्फ " सेंट्रल विस्ता " नज़र आता है , " कोरोना हत्याकांड " नहीं ? देर है अंधेर नही , बड़ी बलवान होती है समय की छड़ी? उस समय ना श्मशान, ना कब्रिस्तान, ना गंगा नसीब होगी, नसीब होगी तो एक कष्टदायक मौत। जैसा बीज बोओगे वैसे फल भी पाओगे। कंहां है चड्डीधारी नकली हिंदू? कंहा हैं "जय श्री राम" का जयकारा लगाने वाले? कंहा हैं "अल्लाह हो अकबर" का उद्घोष करने वाले? चाहे श्मशान के रास्ते जाओ या कब्रिस्तान के रास्ते जाओ, जाना एक ही जगह है । जलने के बाद जाओ या दफन होकर जाओ, जाओगे तो सिर्फ "स्वर्ग में या जहन्नुम में" ही?

धर्म का प्रवचन करने वाले " पंडित, मौलवी , पादरी या ग्रन्थी " अब इतना तो बताएं कि " कोरोना हत्याकांड " में मारे गये निर्दोष लोग , जिनकी लाशें लावारिस की तरह गंगा में बह रही हैं, इनकी आत्माएं कंहा जायेंगी;  धर्मगुरुओं अभी समय है, इस पर प्रवचन करिये। वेदों का, पुराणों का,  क़ुरान का, बाइबल का, ग्रँथसाहिब का तो बहुत प्रवचन हो गया, सभी ने सिर्फ और सिर्फ नेकी ही सिखाई है। अब ये "धर्म" के नाम व्यापार करने वाले ढोंगी बताएँ कि " कोरोना हत्याकांड" किस धर्म के अनुसार उचित है? मुंह खोलें, चुप्पी मारकर तो कायर बैठते हैं ?  दाढ़ी वाले चेहरे के सर पर अगर भगवा गमछा तो हिन्दू, सफेद गोल टोपी हो तो मुस्लिम, पगड़ी हो तो सिख और कुछ भी ना हो तो ईसाई? बहुरूपिया समय समय के अनुसार अपना उल्लू सीधा करने के लिए भेष बदलता रहता है? " कोरोना हत्याकांड में आपदा का अवसर " भी मिलता रहता है ? 

     जयहिंद,

ब्रिगेडियर प्रदीप यदु , सेवानिवृत्त
रायपुर , छत्तीसगढ़

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