मीडिया Now - CDPHR ने जारी की पाकिस्तान, बांग्लादेश समेत इन 7 देशों की मानवाधिकार रिपोर्ट, हिंदुओं की घटती संख्या पर जताई गहरी चिंता

CDPHR ने जारी की पाकिस्तान, बांग्लादेश समेत इन 7 देशों की मानवाधिकार रिपोर्ट, हिंदुओं की घटती संख्या पर जताई गहरी चिंता

medianow 02-04-2021 23:35:26


नई दिल्ली। सेंटर फॉर डेमोक्रेसी प्लूरेलिज़्म एंड ह्यूमन राइट्स ने पाकिस्तान, बांग्लादेश, तिब्बत, अफगानिस्तान, मलेशिया, इंडोनेशिया और श्रीलंका की मानवाधिकार को लेकर एक रिपोर्ट जारी किया है। रिपोर्ट को सभी देशों में नागरिक समानता, उनकी गरिमा, न्याय और लोकतंत्र को आधार मान कर तैयार किया गया है। यह रिपोर्ट शिक्षाविद, अधिवक्ता, न्यायाधीश, मीडियाकर्मी और अनुसंधानकर्ताओं के एक समूह ने तैयार किया है। सेंटर फॉर डेमोक्रेसी प्लूरेलिज़्म एंड ह्यूमन राइट्स ने जारी की भारत के सात पड़ोसी देशों की मानवाधिकार रिपोर्ट में बताई कुछ ऐसी स्थिति। 

1. पाकिस्तान
सेंटर फॉर डेमोक्रेसी प्लूरेलिज़्म एंड ह्यूमन राइट्स की रिपोर्ट में पाकिस्तान में मानवाधिकार की स्थिति पर चिंता व्यक्त की गई है। रिपोर्ट के अनुसार वहां धार्मिक अल्पसंख्यकों के साथ-साथ अल्पसंख्यक शिया और अहमदिया की स्थिति भी काफी खराब है। वहां धारा 298 बी-2 के मुताबिक अहमदिया मुसलमानों द्वारा अजान शब्द का उपयोग भी अपराध है। इसके साथ साथ पाकिस्तान का कानूनी ढांचा भी अंतरराष्ट्रीय नागरिक और राजनीतिक अधिकारियों के अनुरूप नहीं है। वहां धार्मिक अल्पसंख्यकों- हिंदू, सिख और ईसाई धर्म की युवा महिलाओं के साथ अपहरण, बलात्कार, जबरन धर्मपरिवर्तन आदि घटनाएं काफी हैं। इसके साथ साथ धार्मिक अल्पसंख्यक को डराया और धमकाया भी जाता है।

 2. बांग्लादेश
बांग्लादेश में भी मानवाधिकार और धार्मिक अल्पसंख्यकों की स्थिति बहुत अच्छी नहीं है। ढाका यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर अबुल बरकत की एक रिपोर्ट के मुताबिक पिछले 4 दशकों में 2,30,612 लोग प्रत्येक वर्ष पलायन को मजबूर हो रहे हैं जिसका औसत 632 लोग प्रतिदिन है। इसी रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर वहां इसी गति के साथ पलायन होता रहा तो 25 साल बाद वहां कोई भी हिंदू नहीं रहेगा। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 1975 में वहां संविधान संशोधन के माध्यम से सेकुलरिज्म शब्द को हटाकर कुरान की पंक्तियों को रखा गया और 1988 में इस्लाम को देश का धर्म घोषित कर दिया गया। साथ ही चटगांव पर्वतीय क्षेत्र के डेमोग्राफी को भी योजनाबद्ध तरीके से बदल दिया गया। 1951 में 90 फ़ीसदी लोग यहाँ बौद्ध थे जो 2011 में घटकर 55 फीसदी रह गए।

3. तिब्बत
रिपोर्ट में कहा गया है कि विभिन्न प्रतिबंधों के माध्यम से चीन तिब्बत में मानवाधिकार की स्थिति को छुपाने की कोशिश करता रहा है। इसके साथ साथ चीन तिब्बत की सामाजिक, धार्मिक, संस्कृतिक और भाषाई  पहचान भी खत्म करने की कोशिश कर रहा है।

4. मलेशिया
सेंटर फॉर डेमोक्रेसी प्लूरेलिज़्म एंड ह्यूमन राइट्स की रिपोर्ट के अनुसार मलेशिया में भूमिपुत्र के पक्ष में विभेदकारी कानून है. यह सजातीय अल्पसंख्यकों के भी अधिकारों का हनन हो रहा है.

5. अफगानिस्तान
सेंटर फॉर डेमोक्रेसी प्लूरेलिज़्म एंड ह्यूमन राइट्स की रिपोर्ट के अनुसार अफगानिस्तान में भी मानवाधिकार और अल्पसंख्यकों के प्रति विभेदकारी नीति पर चिंता व्यक्त की गई है। अफगानिस्तान के संविधान के अनुसार कोई मुस्लिम व्यक्ति की देश का राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री बन सकता है. 1970 की जनसंख्या के अनुसार वहां 7,00,000 हिंदू और सिख थे। अब सिर्फ 200 हिंदू और सिख परिवार रह गए हैं।

6. श्रीलंका
सेंटर फॉर डेमोक्रेसी प्लूरेलिज़्म एंड ह्यूमन राइट्स ने श्रीलंका में भी मानवाधिकार और धार्मिक अल्पसंख्यकों की स्थिति पर चिंता जताई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि 26 साल तक चले गृह युद्ध में 1,00,000 लोगों की जान गई और 20,000 तमिल गायब हो गए।

7. इंडोनेशिया
सेंटर फॉर डेमोक्रेसी प्लूरेलिज़्म एंड ह्यूमन राइट्स की रिपोर्ट के अनुसार इंडोनेशिया में भी पिछले कुछ वर्षों में धार्मिक कट्टरता और असहिष्णुता बढ़ी है। यहां सिर्फ 6 देशों को ही पहचान दी गई है। 2002 में बाली में हुए धमाके में भी देश के ही एक बड़े धार्मिक इस्लामिक नेता का नाम आया था। 2012 में बालीनुर्गा हिंदुओं पर हमला सहित कई घटनाएं धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ देखने को मिली हैं।

Comments

Subscribe

Receive updates and latest news direct from our team. Simply enter your email below :