मीडिया Now - प्रवासी भारतीय समुदाय को अब साफ दिख रहा है कि महामारी के प्रबंधन में मोदी पूरी तरह विफल साबित हुए हैं

प्रवासी भारतीय समुदाय को अब साफ दिख रहा है कि महामारी के प्रबंधन में मोदी पूरी तरह विफल साबित हुए हैं

medianow 13-05-2021 14:36:36


गिरीश मालवीय / देश में तो मोदी के अंधभक्तों  की भक्ति में थोड़ी कमी आयी है लेकिन उससे ज्यादा जरूरी है कि विदेश में बसे एनआरआई भारतीय अंधभक्तों में भी अब थोड़ी अक्ल आए !.....दरअसल विदेशों में बसी हिंदू आबादी मोदी की सबसे बड़े चीयरलीडर्स है.....बीबीसी में कल छपी रिपोर्ट बताती है कि प्रवासी भारतीयों की अक्ल अब ठिकाने पर आने लगी है, प्रवासी भारतीय समुदाय में मोदी की क्षमता पर बहस शुरू हो गई है उन्हें यह साफ दिख रहा है कि महामारी के प्रबंधन में मोदी पूरी तरह विफल साबित हुए. बीबीसी ने अपनी रिपोर्ट में एक ऐसे एनआरआई का जिक्र किया जो पिछले साल  'हाउडी मोदी' समारोह में उत्साहपूर्वक भाग ले चुका था न्यूयॉर्क में बसे भारतीय मूल के योगेंद्र शर्मा 'हाउडी मोदी' समारोह में अपनी गर्लफ्रेंड के साथ गए थे.

अब शर्मा जी कहते हैं, "उस समय हम सब मोदी के अंधे भक्त थे. हमारा परिवार नोएडा में रहता है, वो भी भारत में बैठे हमें ह्यूस्टन जाने के लिए जोश दिला रहे थे. लेकिन भारत में जो संकट आया है और मोदी के नेतृत्व वाली सरकार जिस तरह से कोरोना से मरने वालों को बचाने में विफल रही है और जिस तरह से हम अब हर देश के आगे मदद के लिए हाथ फैला रहे हैं उससे मोदी और भारत दोनों का क़द छोटा हुआ है". उनका कहना था कि भारत में केवल उनके परिवार और परिचित कोरोना से नहीं मरे हैं बल्कि उनके जानने वाले कई दोस्तों के सगे-संबंधी भी अपनी जान गँवा चुके हैं. "यहाँ अब मोदी हीरो से ज़ीरो हो चुके हैं''

इस बीच पिछले हफ्ते दिल्ली के एक लेखिका विनीता मोक्किल ने अमेरिका में बसे प्रवासी भारतीयों के नाम एक खुला पत्र भी लिखा है शीर्षक है......
'आपके भगवान के पैर मिट्टी के और हाथ खून से सने” यह पत्र दक्षिण एशियाई अमेरिकी समाचार वेबसाइट ‘अमेरिकन कहानी’ पर प्रकाशित हुआ है। इस पत्र में वह लिखती हैं “यह समय भक्तों के आत्मनिरीक्षण के लिए बिलकुल सही है। खास कर उनके लिए जिन्होंने राम मंदिर के नाम पर वोट दिया था और अब महामारी से प्रभावित हैं।”

वे लिखती हैं “जबकि भारत सांस के लिए तड़प रहा है, जब अस्पतालों में मरीज ऑक्सीजन की कमी से मर रहे हैं, जब सड़कों पर बीमार गिरे पड़े हैं और अस्पतालों के गेट पर बिस्तर के लिए लाइन लगी है, ऐसे समय में तुम्हारा भगवान दिल्ली में अपने लिए 22,000 करोड़ का महल तैयार करवा रहा है। अपनी इस घमंडी परियोजना के चलते वह अपनी सरकार को पर्याप्त वैक्सीन की आपूर्ति करने का निर्देश देना ही भूल गया। यही एक चीज़ थी जो भारत के लोगों को कोरोना की दूसरी लहर से बचा सकती थी।”

उन्होंने कहा कि वह चुनाव जीतने के लिए केवल जय श्री राम का जाप करता हैं। वह मुस्लिमों को हिंदुओं के खिलाफ खड़ा कर देता है और जब तनाव बढ़ जाता है तो उसमें माचिस लगाने का काम भी आपका यही करता है। विनीता ने लिखा “अगर आपका भगवान हिंदुओं का रक्षक है जैसा कि वह दावा करता है, यदि आपका ईश्वर हिंदू राष्ट्र का दाढ़ी वाला मसीहा है, तो उसने सब कुछ जानते हुए भी कुंभ मेले को आयोजित करने की अनुमति क्यों दी? जब उन्हें पता था कि उन्हीं के समर्थक इसमें जाएंगे और संक्रमित होंगे।” दरअसल विदेश में बसे भारतीय मूल के लोग प्रधानमंत्री मोदी के सबसे जबरदस्त समर्थकों में से माने जाते रहे हैं. साथ ही वह भाजपा के उदार दानदाता भी माने जाते हैं इसलिए उनको अक्ल आना बहुत जरूरी है.
- लेखक एक नामी समीक्षक हैं

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