मीडिया Now - ज़रूरत से ज्यादा डराने पर लोग सचमुच एक दिन डरना बंद कर देते हैं

ज़रूरत से ज्यादा डराने पर लोग सचमुच एक दिन डरना बंद कर देते हैं

medianow 17-05-2021 17:42:01


राकेश कायस्थ / कहानी उन दिनों की है, जब पाकिस्तान में जनरल ज़िया उल हक की तानाशाही थी। ख़बर उड़ी कि कराची कि सड़कों पर कुछ ऐसे कुत्ते देखे गये हैं जिनकी पीठ पर ज़िया लिखा हुआ है। बस क्या था ज़िया नामधारी आवारा कुत्तों के लिए शूट एट साइट के ऑर्डर जारी हो गये। शक की वजह से कई ऐसे कुत्ते भी मारे गये जिनकी पीठ पर सदर-ए-पाकिस्तान का नाम नहीं लिखा था।  ये वास्तविक घटना है या एक राजनीतिक दतंकथा इस बारे में मैं आश्वस्त नहीं हूं। कहानी सिर्फ इसलिए याद आई क्योंकि चार दशक बाद दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में कुछ अनोखा हो रहा है।

जहां लोग अस्पतालों के बाहर ऑक्सीजन के बिना दम तोड़ रहे हैं, वहां दिल्ली पुलिस एक ऐसे काम में जुटी है, जो लोगों की मदद करने से कहीं ज्यादा ज़रूरी है। दिल्ली पुलिस को उन गुस्ताखों का पता लगाना है, जिन्होंने पोस्टर चिपकाकर यह पूछने की हिमाकत की है कि  " मोदीजी आपने हमारे बच्चों की वैक्सीन विदेश क्यों भेजी। " ख़बर है कि पुलिस की कई टीमों ने सघन छापेमारी की है और 25 आरोपियों को पकड़कर बकायदा उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।

क्या आपको इस घटना पर किसी तरह की हैरानी है? अगर हैरानी है तो 2019 के लोकसभा चुनावों से पहले प्रधानमंत्री की उन सभाओं को याद कर लीजिये जिनमें उन लोगों को खदेड़ा जा रहा था, जो गलती से काली शर्ट या कुर्ता पहनकर आ गये थे। सरकार ये मानकर चल रही थी कि काला रंग विरोध का प्रतीक है। अगर उसने काला पहना है तो यकीनन मोदी विरोधी होगा।  ख़बर देखकर मैं डर गया था कि इस तर्क के आधार पर कहीं लोगों के सिर ना मूड़ दिये जाये और उनकी आंखों की पुतलियां ना निकलवा दी जायें। 

घटनाएं चीख-चीखकर कह रही हैं कि तानाशाह भले ही लोकतांत्रिक होने का स्वांग करके सत्ता में आया हो, मगर तानाशाह असल में तानाशाह ही होता है। वह राष्ट्रीय संकट से नहीं डरता बल्कि अपनी इमेज खराब होने से डरता है। संकट काल में भी वह पूरी मशीनरी को अपनी इमेज बचाने की कसरत में लगाये रखता है।  मगर छवि ठीक करने की कोशिश का नतीजा क्या है।  जो पोस्टर मुश्किल से 100-200 लोग देखते अब वो सोशल मीडिया पर वायरल हो चुका है। साथ ही ट्विटर पर हैशटैग ट्रेंड कर रहा है #ArrestMeToo ज़रूरत से ज्यादा डराने पर लोग सचमुच एक दिन डरना बंद कर देते हैं।
- लेखक एक वरिष्ठ पत्रकार हैं

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