मीडिया Now - WHO ने रेमडेसीविर को कोविड के इलाज के लिए दवाओं की सूची से 21 नवंबर को ही हटा दिया था

WHO ने रेमडेसीविर को कोविड के इलाज के लिए दवाओं की सूची से 21 नवंबर को ही हटा दिया था

medianow 18-05-2021 11:15:10


सौमित्र रॉय / विश्व स्वास्थ्य संगठन ने रेमडेसीविर को कोविड के इलाज के लिए दवाओं की सूची से 21 नवंबर को ही हटा दिया था। फिर भी भारत में कोविड की दूसरी लहर के दौरान डॉक्टरों ने मरीज़ों को घपा-घप रेमडेसीविर ठूंसे। आपदा में कमाई का यह बड़ा जरिया जो था। 7500 की एमआरपी वाले इंजेक्शन को 15-30 हज़ार में बेचा गया। फिर तो डॉक्टरों का कमीशन भी मोटा ही रहा होगा। रेमडेसीविर की कालाबाज़ारी और इसके लिए चीख-पुकार और हाय-तौबा के बीच ICMR चुपचाप तमाशा देखता रहा, जबकि रेमडेसीविर को लेकर पिछले साल ट्रम्प की बेताबी को कई डॉक्टरों ने मूर्खता बताया था। 

बावज़ूद इसके, ICMR ने उसके बाद भी कोविड के इलाज का कोई देशव्यापी एक समान प्रोटोकॉल नहीं बनाया। उस वक़्त मैंने लिखा था कि रेमडेसीविर कोविड मरीज़ के वायरल लोड और जान पर खतरे को कम नहीं करता। लेकिन नक्कारखाने में तूती की बात कौन सुनता है। रेमडेसीविर जैसी और बेज़ा दवाओं और स्टेरॉइड्स ने फार्मा उद्योग को 56% बढ़त दिलाई है। नतीज़ा ब्लैक फंगस के रूप में मौत बनकर खड़ा है। मोदी सरकार को दवा कंपनियों से टैक्स मिला और बदले में मरीजों को दिल की बीमारी, डायबिटीज जैसी लाइलाज बीमारियां। 

ऐसी ही मूर्खता प्लाज़्मा डोनेट करने को लेकर भी की गई। अब इसको भी कोई नहीं पूछ रहा। दरअसल, हम खुद ही मेडिकल लिट्रेसी को नहीं समझते। फिर गौमूत्र से कोविड ठीक करने का दावा करने वाली प्रज्ञा पर क्यों हंसते हैं? समाज मूर्ख है तो सरकारी पैनल भी मूर्ख होगा, जिसने कल कह दिया कि कोविशिल्ड ठूंसवाकर कुछ लोग ही बीमार हुए हैं। 700 लोगों की गंभीर हालत उनके लिए एक आंकड़ा ही तो है। इस चरम मूर्खता के बीच लोगों को व्हाट्सएप ज्ञान पर लुटता देखकर अब मुझे तरस भी नहीं आता।
- लेखक एक नामी समीक्षक हैं

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