मीडिया Now - केरल: शैलजा का मंत्री ना बनना दुर्भाग्यपूर्ण है

केरल: शैलजा का मंत्री ना बनना दुर्भाग्यपूर्ण है

medianow 18-05-2021 19:46:57


राकेश कायस्थ / केरल से एक विचित्र ख़बर आई है। कोरोना संकट के दौरान सुपर स्टार के तौर पर उभरने वाली स्वास्थ्य मंत्री और टीचर के नाम से मशहूर के.के.शैलजा को नई सरकार में शामिल नहीं किया गया है। केरल में हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर को ग्रास रूट लेबल तक मजबूत करने के लिए शैलजा ने पांच साल में जो काम किया है, उसकी वाहवाही पूरी दुनिया में हुई। निपाह वायरस के संक्रमण से निपटने के लिए अपनाये गये शैलजा के तरीकों पर वायरस नाम से एक चर्चित मलयालयम फिल्म भी बनी थी।

कोरोना संकट में भी शैलजा प्रॉब्लेम शूटर की तरह सामने आईं थीं। ना जाने कितने राज्यों के स्वास्थ्य मंत्री और मुख्यमंत्री शैलजा से सलाह मशविरा किया करते थे। ये भी कहा जाता था कि उनकी विशेषज्ञता का फायदा केंद्र सरकार को उठाना चाहिए। हाल ही में केरल के सीएम विजयन ने प्रधानमंत्री को बताया था कि उनके राज्य ने कोरोना टीकों की बर्बादी रोकी है और केरल टीकों का सबसे अच्छा इस्तेमाल करने वाला राज्य बना है। पीएम ने इसकी तारीफ की थी। इस टीका प्रबंधन के पीछे भी शैलजा ही थीं। 

लेफ्ट ने केरल सरकार के कोरोना प्रबंधन को इस बार अपना मुख्य चुनावी मुद्धा बनाया। अगर परंपरा के उलट अगर सरकार को दूसरा टर्म मिला तो इसकी बहुत बड़ी वजह यही रही कि वोटरों ने माना कि केरल सरकार ने महामारी से बेहतर तरीके से निपटने की कोशिशें की हैं। शैलजा टीचर की लोकप्रियता का आलम ये है कि इस बार वो 60 हज़ार वोट से जीती हैं।  विधानसभा चुनाव में यह बहुत बड़ा मार्जिन है। शैलजा को नई सरकार में शामिल ना किये जाने के पीछे सीपीएम ने जो तर्क दिया है, वो बहुत लोगों के गले नहीं उतर रहा है। 

पार्टी का कहना है कि इस बार सरकार नई है और पिछली बार मंत्री रहे किसी भी व्यक्ति को शामिल ना करना एक नीतिगत फैसला है। मुख्यमंत्री विजयन को छोड़कर पूरी सरकार नई है। समझना मुश्किल है कि यह सत्ता की राजनीति से व्यक्तिवाद को कम करने की कोशिश है या खुद सीएम विजयन का व्यक्तिवाद है?  चुनाव से पहले विजयन ने घोषणा की थी कि दो बार विधायक रह चुके किसी भी व्यक्ति को टिकट नहीं दिया जाएगा। नतीजा ये हुआ कि कई मंत्रियों तक को विधानसभा पहुँचने का मौका नहीं मिला।

लेफ्ट की राजनीति के हिसाब से ये फैसले दूरदर्शी हैं या फिर ज्योति बसु को प्रधानमंत्री ना बनने देने जैसे बेतुके हैं, इस बारे में कुछ कह पाना जल्दबाजी होगी। मगर शैलजा का मंत्री ना बनना दुर्भाग्यपूर्ण है क्योंकि सवाल किसी पार्टी का नहीं बल्कि पब्लिक हेल्थ सिस्टम का है।
- लेखक एक वरिष्ठ पत्रकार हैं

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