मीडिया Now - मूंछें हों तो नत्थूलाल जैसी

मूंछें हों तो नत्थूलाल जैसी

medianow 19-05-2021 20:58:39


वीर विनोद छाबड़ा / मुकरी को कौन नहीं जानता ! वही मुकरी यानि प्रकाश मेहरा की ‘शराबी’(1985) के नत्थूलाल, जिनकी मूंछो पर अमिताभ बच्चन बार-बार जुमला कसते थे - मूंछें हो तो नत्थूलाल जैसी वरना न हों. अमर अकबर अंथोनी का तैय्यब अली प्यार का दुश्मन हाय हाय.…वाला मुकरी. अभी उस दिन एक चैनल पर ऋषिकेश मुकर्जी की 'अनाड़ी' देख रहा था. राजकपूर को मुंशी बने मुकरी समझा रहे थे मालिक को आते हुए सलाम करो और जाते हुए भी सलाम करो. बस हो गयी नौकरी. मैं तो सुबह बीवी को भी सलाम करके निकलता हूं. बॉम्बे टाकिज़ की मालकिन और मशहूर अभिनेत्री देविका रानी की खोज थे मुकरी. गोल-मटोल और छोटे कद वाले मुकरी. टूथलेस मुस्कान वाले मुकरी.  

मुकरी ने लगभग छह सौ फिल्मों में काम किया. यह दर्शाता है कि मुकरी का फिल्म इंडस्ट्री में योगदान कितना महत्वपूर्ण रहा. पचास, साठ और सत्तर के सालों की हर दूसरी-तीसरी फिल्म की कहानी में मुकरी के लिये भले ही गंजाईश नहीं रही, मगर फिल्म में उनकी जगह पक्की रही. डिस्ट्रीब्यूटर्स की डिमांड भी होती थी - मुकरी चाहिए जिसे देख कर पब्लिक के चेहरे पर मुस्कान तैर जाये. अनायास रोल चाहे छोटा रहा हो या बड़ा, उन्होंने बड़े दिल से और पूरी ईमानदारी से निर्वाह किया. कुछ न बोल कर भी अपनी मौजूदगी का अहसास कराया.  वो दिलीप कुमार की लगभग सभी फिल्मों में दिखे. दिलीप के अच्छे निज़ी मित्र भी रहे. एक बार दिलीप कुमार से वो झगड़ भी पड़े. वो किस्सा फिर कभी.

मुकरी परदे से बाहर की दुनिया में भी बहुत मज़ेदार आदमी थे. एक बार ‘आन’ की शूटिंग के लिये गधे की ज़रूरत पड़ी.  चारों और बंदे दौड़ाये गये. पर गधा नहीं मिला.  निर्माता-निर्देशक महबूब खान झल्ला कर बोले - क्या वाकई दुनिया में गधों का अकाल पड़ गया है या मैं ही सबसे बदकिस्मत आदमी हूं, जिसके नसीब में एक गधा तक नहीं है... वहीं मुकरी भी खड़े थे. अनायास ही उनके मुंह से निकला - ऐसा न कहिए हुज़ूर.  इस बंदे में गधा बनने की सारी खूबियां मौजूद हैं. 

दिलीप कुमार के भाई नासिर खान तलवारबाज़ रंजन-नसीम बानो के साथ ‘बागी’बना रहे थे. अचानक हल्ला हुआ कि पानी में किसी ने गंदगी मिला दी है. इसे कोई न पिए. तब मुकरी ने कमान संभाली और सबसे पूछते फिरे कि ‘इरीगेटेड वाटर सप्लाई’ कहां से मिलेगी.  महीनों तक लोग मुकरी से चुहल करते रहे, मुकरी भाई, इरीगेटेड वाटर मिला कि नहीं. मुकरी का हाथ अंग्रेजी में काफी तंग रहा. उन्हें इसका इल्म था. मगर इस कमी को लेकर अहसास-से-कमतरी कतई नहीं थी.  बल्कि वो अपने इस अज्ञान पर लुत्फ़ उठाने की पहल खुद ही करते थे. सेट पर फन्नी किस्म की इंग्लिश बोल कर सबको हंसाते रहते.  अमिताभ बच्चन ने ‘नमक हलाल’ में इंग्लिश इज ए फन्नी लैंग्वेज...आई कैन टाक इंग्लिश, आई कैन वाक इंग्लिश... बोल कर खूब वाहवाही लूटी थी. आप हैरान होंगे कि यहां वो मुकरी से ही प्रेरित थे. मुकरी न होते तो अमिताभ के मुंह से ये फन्नी अंग्रेज़ी सुनने को कभी नहीं मिलती. 

सुनील दत्त की कल्चरल संस्था अंजता आर्टस के स्थाई सदस्य थे मुकरी. एक कार्यक्रम में धन्यवाद देने के लिये मुकरी मंच पर खड़े कर दिये गये. आयोजकों का इरादा चुस्की लेने का था. इधर मुकरी इसके लिये कतई तैयार नहीं थे. कार्यक्रम के चीफ गेस्ट एक विदेशी राजदूत थे. लिहाज़ा स्पीच अंग्रेजी में होनी थी. मुकरी अपने साथ हुई शरारत को समझ गये. परंतु घबराये नहीं.  पूरे आत्मविश्वास से चिर-परिचित अंदाज़ में अपनी फन्नी अंग्रेज़ी में बोले - सर, वी होप यू एनजाय प्रोग्राम. वी टू एंज्वाय यू... ये सुनते ही चीफ गेस्ट सहित सभी हंसते-हंसते लोट-पोट हो गये. मुकरी के अंतिम दिन शारीरिक कष्ट में गुज़रे.  उनके गाल ब्लैडर में तकलीफ़ थी. इसका आपरेशन भी हुआ. मगर इसके बावजूद उनकी तकलीफ बनी रही.  उन्हें अक्सर बुखार रहने लगा. अस्पताल में भर्ती होना पड़ा. लेकिन मुकरी नहीं बच सके. 05 जनवरी 1922 को जन्मे मुकरी 04 सितंबर 2000 को इस फ़ानी दुनिया को अलविदा कह गए. 
- लेखक एक नामी फिल्म समीक्षक हैं

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