मीडिया Now - मोदी सरकार वैक्सीन को लेकर कोई गंभीर प्रयास करती नहीं दिख रही

मोदी सरकार वैक्सीन को लेकर कोई गंभीर प्रयास करती नहीं दिख रही

medianow 20-05-2021 18:25:04


गिरीश मालवीय / VK पॉल जिन्होंने दिसम्बर तक 216 करोड़ टीको की उपलब्धता की बात की थी वह आधुनिक युग के शेखचिल्ली साबित होते नजर आ रहे हैं.......राज्यों द्वारा रिलीज किया गया वैक्सीन का ग्लोबल टेण्डर भी फेल दिख रहा है. भारत मे वैक्सीन की उपलब्धता दिनों दिन घटती जा रही है, आने वाले दो महीने तक यही हालत रहने वाली है लेकिन उसके बावजूद भी मोदी सरकार द्वारा वेक्सीन को लेकर कोई गंभीर प्रयास करती नही दिख रही है.......दो दिन पहले दिल्ली हाईकोर्ट ने परसो पैनासिया बायोटेक की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि जब सरकार के पास लाखों टीकों की डोज प्राप्त करने का अवसर है तब भी कोई दिमाग नहीं लगा रहा, जबकि सरकार को इसे एक अवसर के तौर पर अपनाना चाहिए। दरअसल 5 अप्रेल को रूस का प्रत्यक्ष निवेश कोष आरडीआईएफ और भारत की पैनेसिया बॉयोटेक ने सोमवार को कहा कि वे स्पुतनिक वी कोविड-19 टीके की भारत में सालाना 10 करोड़ खुराक का उत्पादन करने पर सहमत हुए हैं। इस बात को दो महीने होने को आए हैं लेकिन कोई प्रगति नजर नही आ रही संभवतः इसी बात को मद्देनजर रखते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने सरकार से कहा है'कि आपके पास टीकों की इतनी कमी है और आप इस पर ध्यान नहीं दे रहे। यह आपके लिए अवसर हो सकता है। इतने नकारात्मक मत होइए। यह आग भड़काने जैसा है और किसी को कोई फिक्र नहीं है।'

भारत में स्पुतनिक वी के उत्पादन के लिए 6 कंपनियों से करार हुए हैं लेकिन इस करार को पूरा करने के बारे में क्या प्रगति हुई है कितनी गंभीरता से प्रयास हो रहे हैं यह दिल्ली हाईकोर्ट की टिप्पणियां बता रही है. कल के गडकरी के बयान से बिल्कुल स्पष्ट है कि मोदी ने वैक्सीन की उपलब्धता बढ़ाने के प्रयास की चर्चा तक किसी कैबिनेट मंत्री से नहीं की है...... सब कुछ नोकरशाही के भरोसे है......…महाराष्ट्र की एक कम्पनी के अलावा अभी तक कोई दूसरी भी कम्पनी सामने नही आई है जो कहे कि हम कोवेक्सीन का उत्पादन कर रहे हैं....बिजनेस स्टेंडर्ड की एक रिपोर्ट बताती है कि चेन्नई में देश के बड़े सरकारी टीका विनिर्माण संयंत्र में टीका तैयार करने के लिए कोई आगे नहीं आ रहा है इस का स्वामित्व एचएलएल बायोटेक के हाथों में है और इसे इस सप्ताह आठवीं बार एकीकृत टीका विनिर्माण (आईवीसी) केंद्र के लिए बोली लगाने की समय-सीमा बढ़ाने के लिए मजबूर होना पड़ा क्योंकि कंपनी को जनवरी में अभिरुचि पत्र प्रकाशित कराने के बाद भी निजी कंपनियों की तरफ  से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है.........एक अधिकारी ने इस संयंत्र की क्षमता के बारे में बताया है, 'इस संयंत्र में चार विनिर्माण लाइनें थी जो  और फिलिंग कर सकती हैं। इसमें वेयरहाउस, पैकेजिंग यूनिट, जानवरों पर प्रयोग की सुविधा भी है। इस संयंत्र में वायरल टीकों का भी थोक उत्पादन होता है। यहां एक साथ दो टीकों का निर्माण किया जा सकता है। उदाहरण के लिए, रेबीज टीके और जापानी इंसेफेलाइटिस टीका दोनों को छह महीने की अवधि के लिए तैयार किया जा सकता है।'पर कोई आगे नही आ रहा है......

भास्कर की पड़ताल बताती है कि देश में 16 ऐसी कंपनियां हैं जो वैक्सीन तुरंत बनाना शुरू कर सकती हैं। अगर केंद्र सरकार इन्हें जरूरी परमिशन दे तो ये कंपनियां हर महीने 25 करोड़ और साल में 300 करोड़ डोज बना सकती हैं। पर सरकारी लालफीताशाही से कौन जीत सकता है ? केंद्र के एक एम्पावर्ड ग्रुप के प्रमुख रहे सीनियर IAS अफसर का कहना है कि सरकार ने देर कर दी है। वैक्सीन बनाने वाली कंपनियों के साथ लगातार बात करनी थी और शुरुआत में ही आर्थिक मदद देनी थी। लगता है कि देश मे कोरोना वैक्सीन निर्माण भी लालफीताशाही में ही उलझ कर रह जाएगा, नेगवैक के प्रमुख प्रो.वी.के.पॉल का कहना है कि भारत में अगस्त से दिसंबर-2021 तक वैक्सीन की 216 करोड़ डोज उपलब्ध होगी , वी के पॉल आधुनिक युग के शेखचिल्ली साबित होने जा रहे हैं वे जिन वेक्सीन की डोज की बात कर रहे हैं उसमें जाइडस कैडिला, सीरम की नोवावैक्स, भारत बॉयोटेक की नेजल वैक्सीन और जीनोवा कंपनी की वैक्सीन का ट्रायल तीसरे फेज में चल रहा है......वह हवा में बनाए गए प्रोडक्शन प्लान की बात कर रहे वो प्लान जो कम्पनियो ने उन्हें दिए हैं..... ओर जब कम्पनिया सामने आती है तो उपरोक्त बाते सामने आती है.......सरकार को समझना होगा कि हमे वैक्सीन की जरूरत है न कि कम्पनियो को ! आज की परिस्थिति में देश मे उपलब्ध संसाधनों को बेहतर से बेहतर उपयोग करने की जरूरत है पर मोदी धृतराष्ट्र की तरह व्यवहार कर रहे हैं।
- लेखक एक नामी समीक्षक हैं

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