मीडिया Now - वैक्सीन संकट: 3 लाख लोगों को लील चुका कोरोना, फिर भी नहीं चेत रही मोदी सरकार

वैक्सीन संकट: 3 लाख लोगों को लील चुका कोरोना, फिर भी नहीं चेत रही मोदी सरकार

medianow 24-05-2021 17:20:02


डॉ. अखंड प्रताप सिंह मानव / कोरोना की दूसरी लहर भारत पर कहर बनकर टूटी है, जिससे अभी भी देश उबर नहीं पा रहा है. कोरोना से होने वाली मौतों का आंकड़ा कल तीन लाख पार कर गया. मौतों के मामले में अब अपना देश उन टॉप थ्री देशों में शामिल हो गया है जहां कोरोना से अब तक तीन लाख से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. अब भारत से आगे सिर्फ अमेरिका और ब्राजील हैं.

 अब जबकि ये बात पूरी तरह से साफ हो चुकी है कि कोरोना की इस महामारी से वैक्सीन ही हमें बचा सकती है, फिर भी केंद्र कि मोदी सरकार अभी भी इसे युद्धस्तर पर नहीं ले जा रही है. और वैक्सीन खरीदने का ज़िम्मा राज्य सरकारों के भरोसे छोड़कर अपने इमोशनल एजेंडे और यूपी विधान सभा के आगामी चुनावों की तैयारियों में जुट गई है.

आज ही दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने बताया कि फाइजर और मॉडर्ना कंपनियों ने दिल्ली को वैक्सीन देने से इनकार कर दिया है. उन्होंने बताया कि इन दोनों कंपनियों से वैक्सीन खरीदने को लेकर हमारी बात हुई लेकिन दोनों ने कहा हम आपको वैक्सीन नहीं देंगे और इसके लिए केंद्र सरकार से बात करेंगे.

कुछ इसी तरह का मामला पंजाब का भी है. पंजाब के वरिष्ठ आईएएस और कोविड वैक्सीनेशन के नोडल अधिकारी विकास गर्ग ने बताया कि सरकार ने मॉडर्ना से वैक्सीन के लिए संपर्क किया था, लेकिन कंपनी ने उनसे सीधे डील करने से मना कर दिया और कहा कि वो वैक्सीन के लिए सिर्फ केंद्र सरकार से ही बात करेगी.

कोरोना महामारी की दूसरी लहर झेल रहे देश के लिए वैक्सीन ही अब सबसे बड़ी उम्मीद है. देश के बीस राज्यों ने अपने नागरिकों को फ्री वैक्सीन लगाने का ऐलान किया है. इन राज्यों में आठ राज्य ऐसे हैं जो सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े हैं. इंडिया स्पेंड में छपी खबर के मुताबिक इन राज्यों को वैक्सीन पर अपने स्वास्थ्य बजट का तीस प्रतिशत तक खर्च करना पड़ सकता है. 

18 साल से 44 साल तक के लोगों को फ्री वैक्सीन का इलाज करने वाले बीस राज्यों में यह आठ 'गरीब' राज्य हैं बिहार, छत्तीसगढ़, छारखंड, मध्य प्रदेश, राजस्थान, ओडिशा, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश. इन राज्यों को कोविशील्ड वैक्सीन के लिए 23% और कोवैक्सीन के लिए 30%  तक स्वास्थ्य बजट से खर्च करना पड़  सकता है. देश में इस वक्त कोविशील्ड और कोवैक्सीन वैक्सीन का इस्तेमाल हो रहा है.

केंद्र सरकार ने साफ किया है कि वो 150 रुपये में सीधे वैक्सीन निर्माताओं से वैक्सीन खरीदेगी. वहीं राज्यों को कोविशील्ड वैक्सीन 300 रुपये प्रति डोज़ और कोवैक्सीन 400 रुपये प्रति डोज़ मिलगी. नई वैक्सीन पॉलिसी के मुताबिक केंद्र सरकार आधी वैक्सीन खरीदेगी तो वहीं वैक्सीन निर्माता 50 % वैक्सीन सीधे राज्यों को और प्राइवेट अस्पतालों को बेच सकते हैं.

दुनियाभर में अब तक कोरोना से करीब 35 लाख लोगों की जान जा चुकी है. इनमें तीन लाख भारतीय भी शामिल हैं. अमेरिका में अब तक करीब छह लाख और ब्राजील में साढ़े चार लाख लोग कोरोना की भेंट चढ़ चुके हैं. वहीं कोरोना एक्टिव केसेज के मामले में दुनिया में भारत का दूसरा स्थान है. कुल संक्रमितों की संख्या के मामले में भी भारत का दूसरा स्थान है.

देश में अब तक 19.49 करोड़ लोगों को कोविड-19 रोधी टीकों की खुराक दी जा चुकी है. हालांकि बिहार, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में 18 से 44 साल की आयु के सिर्फ 10 लाख लोगों को ही अब तक टीके की पहली खुराक दी जा सकी है. 

पूरे देश में वैक्सीन को लेकर ज़बरदस्त किल्लत है, और हर तरफ त्राहि माम त्राहि माम मचा हुआ है. लोगों में इसको लेकर ज़बरदस्त आक्रोश है. एक तो जहां सरकार को ये वैक्सीन मुफ्त में लगानी चाहिए वो इसके लिए अच्छे खासे पैसे लेे रही है, फिर वो वैक्सीन भी उपलब्ध नहीं करवा पा रही है. आम जनता का मानना है, मोदी सरकार इसके प्रति उतनी गंभीर भी नहीं दिख रही है बल्कि वो फिर से चुनावों की तैयारियों में लग गई है. ऐसे में जनता अब राम भरोसे है.

- लेखक "मीडिया नाऊ" के प्रधान संपादक हैं

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