मीडिया Now - गवर्नेंस की विफलता की जिम्मेदारी से, आरएसएस मुक्त नहीं किया जा सकता है

गवर्नेंस की विफलता की जिम्मेदारी से, आरएसएस मुक्त नहीं किया जा सकता है

medianow 25-05-2021 10:49:55


विजय शंकर सिंह / जब कन्नौज से लेकर बलिया तक गंगा तट  या तो श्मशान बने हैं या कब्रिस्तान, तब आरएसएस, जो खुद को एक गैर राजनीतिक संगठन कहता है यूपी चुनाव की चर्चा में जुटा है। मौत के इस दारुण अवसाद काल मे जब केवल, कोरोना महामारी से बचने और निपटने, सुगम टीकाकरण और देश की आर्थिक स्थिति सुधारने पर चर्चा होनी चाहिए तो, भाजपा, संघ चुनाव जीतने की रणनीति बना रहे हैं ! 

देश मे सरकार की अक्षमता और गवर्नेंस की विफलता का  दारोमदार संघ के ऊपर भी है। आरएसएस, न केवल भाजपा के लिये चुनावो में प्रत्याशियों के टिकट तय करता है बल्कि चुनाव जीतने के बाद,  मंत्रिमंडल के गठन और महत्वपूर्ण शासकीय नीतियों के भी तय करने में अपनी सक्रिय भूमिका निभाता है। वह बिना किसी जिम्मेदारी के सरकार चलाता चाहता है। 

संघ, भाजपा सरकारों की सरकारी नीतियों को भी तय करता है, उनका पालन कराता है, और राजनीतिक फैसले तो वह लेता ही है, महत्वपूर्ण सरकारी फैसलों मे भी उसका दखल रहता है। कहते हैं, यूपी में तो संघ का एक बेहद कद्दावर नेता सरकारी अफसरों के तबादलों और नियुक्ति का भी काम करता है। उसकी हैसियत कुछ मामलों में मुख्यमंत्री से भी ऊपर रहती है। यह बात लखनऊ में किसी से छुपी नही है। 

आज देश की आर्थिक स्थिति दयनीय हो चली है। महामारी की आपदा से लगभग दस लाख लोग मर चुके है। हालांकि सरकारी आंकड़े इससे कम हैं। ऑक्सीजन की कमी से अच्छे और बड़े अस्पतालों में भी लोग सैकड़ों की संख्या में मरे हैं, पर आरएसएस ने एक बार भी यह सवाल अपनी सरकारों से नही पूछा कि, आखिर इतनी भयावह बीमारी में, सरकार ने इंतज़ाम क्यो नही किये और किये तो क्या क्या किये ? 

संघ राजनीति करता है। भाजपा के कंट्रोल रूम की तरह अपनी भूमिका रखता है तो इसमे किसी को कोई ऐतराज नहीं होना चाहिए, मुझे भी नहीं है। ऐतराज, झूठ पर है, फरेब पर है और इस मिथ्यावाचन पर है कि वह एक अराजनीतिक संगठन है। जब सरकार के गठन में, प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्रियों के छवि निर्माण में, भाजपा के सामने आए किसी भी राजनीतिक संकट में, आरएसएस एक संकट मोचक की भूमिका में आ जाता है तो देश के सामने आ पड़े इस आपदा मे, सरकार से उसका सवाल न पूछना और छवि सुधार कार्यक्रम चलाना, संघ को ही कठघरे में खड़ा करता है।  

आज गवर्नेंस की जो भी विफलता है उसके लिये सरकारे जितनी जिम्मेदार हैं, उससे कम जिम्मेदारी उस संगठन, समूह या दबाव ग्रुप की नहीं है जो उन सरकारों की नकेल रखती हैं और उन सरकारों की दशा तथा दिशा तय करती हैं। संघ गवर्नेंस के सारे महत्वपूर्ण निर्णय तो लेता है, अच्छे कार्यो का श्रेय भी लेना चाहता है, पर विफलता की जिम्मेदारी लेने से कतराता है। 
- लेखक एक पूर्व आईपीएस अधिकारी रहे हैं

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