मीडिया Now - उत्तराखंड की जंगलों में आग हुई बेकाबू, वन सम्पदा सहित जैविक विविधता तक हुई नष्ट, छह की गई जान, सीएम ने गृह मंत्री से मांगी मद

उत्तराखंड की जंगलों में आग हुई बेकाबू, वन सम्पदा सहित जैविक विविधता तक हुई नष्ट, छह की गई जान, सीएम ने गृह मंत्री से मांगी मद

medianow 04-04-2021 14:11:27


देहरादून। उत्तराखंड के के जंगल गढ़वाल से लेकर कुमाऊं मंडल तक धधक रहे हैं। बेकाबू होती आग की स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि आग आबादी के पास तक पहुंच रही है। नैनीताल, पिथौरागढ़ के साथ ही गढ़वाल के कई जिलों के जंगलों में आग धधक रही है। पिथौरागढ़ जिले में पाताल भुवनेश्वर के पास जंगल की आग से दो मकान राख हो गए, जबकि तीन मकान को आंशिक रू प से नुकसान पहुंचा। जंगलों में लगी आग से कई जगह धुंध छाई है। प्रदेश में बीते 24 घंटे में आग की 39 घटनाएं दर्ज की गईं हैं।

प्रदेश में जंगलों के धधकने का सिलसिला पिछले साल अक्टूबर से जारी है। यही वजह है कि सरकार ने पूरे वर्ष को ही फायर सीजन घोषित कर दिया है। आमतौर पर फायर सीजन 15 फरवरी से 15 जून तक रहता है। बीते छह माह में प्रदेश में आग की 983 घटनाएं दर्ज की जा चुकी हैं। इनमें सर्वाधिक 584 गढ़वाल और 378 कुमाऊं मंडल में हुईं। इसके अलावा 21 घटनाएं संरक्षित वन क्षेत्रों में हुई हैं। इससे कुल 1291.13 हेक्टेयर जंगल को क्षति पहुंची है, जबकि पांच लोग जान गंवा चुके हैं।

केंद्र से मांगी मदद
उधर, स्थिति काबू से बाहर होते देख उत्तराखंड के मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित साह से मदद की गुहार लगाई। उन्होंने ट्विट किया कि प्रदेश में वनाग्नि की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित साह से बात कर उनसे आग बुझाने के लिए हेलिकॉप्टर और एनडीआरएफ के सहयोग के लिए अनुरोध किया है।

उन्होंने कहा कि वनों की आग से न सिर्फ वन सम्पदा की हानि हो रही है, बल्कि जन हानि और वन्य जीवों को भी नुकसान हो रहा है। वनाग्नि की घटनाओं की गम्भीरता को देखते हुए तत्काल प्रदेश के वरिष्ठ अधिकारियों, वन विभाग, आपदा प्रबंधन विभाग और सभी ज़िलाधिकारियों की आपातकालीन मीटिंग बुलायी है। उत्तराखंड की वन सम्पदा सिर्फ़ राज्य ही नहीं पूरे देश की धरोहर है। हम इसे सुरक्षित और संरक्षित रखने के लिए कृत संकल्प हैं। उत्तराखंड में इस बार जाड़ों में वर्षा सामान्य से भी कम हुई है और इस कारण भी वनों में आग लगने की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं।

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