मीडिया Now - कहीं यह तीसरी लहर की आहट तो नही?

कहीं यह तीसरी लहर की आहट तो नही?

medianow 26-05-2021 14:44:22


**- छतरपुर जिले में दो सप्ताह में 18 साल से कम उम्र के लगभग 10 प्रतिषत बच्चे संक्रमित
**- पीएम केयर फंड से वेंटीलेटर की क्या बेईमान खरीदी- तीनो ख़राब 
**- जीवनरक्षक उपकरण सुधारने के लिये सरकार के पास इंजिनियर तक नही
**- सेना के विशेषज्ञ सुधार रहे उपकरण
**- कितनी तैयारी या फिर वहीं तड़फते बिलखते दिन देखने पढ़ेगे

(धीरज चतुर्वेदी) / राजस्थान का दौसा हो या मध्यप्रदेश का सागर संभागीय मुख्यालय जहां संभावित तीसरी लहर के उम्र दायरे में आने वाले बच्चो में कोरोना संक्रमण की संख्यां चितिंत करने जैसी है। यह अगाह है कि स्वास्थ्य और प्रशासनिक महकमे को तैयारियां अपडेट रखनी होगीं। क्या छतरपुर जिले में भी तीसरी लहर ने दस्तक दे दी है, इसकी पुष्टी नही है पर पिछले दो हफता में कुल जांच में 9.7 प्रतिशत कोरोना मरीजो की संख्या में वह बच्चे है जिनकी उम्र 18 साल से कम है। वैसे 18 से 25 साल तक के बच्चे की संख्या भी चौकांने जैसी है। इधर पूर्व तैयारियो की एक बार फिर दुर्दशा है। पीएम केयर फंड से मिले वेटिंलेटर खराब होकर प्रधानमंत्री और उनके खरीद करने वाली संस्थाओ की ईमानदारी को कटघरे में खडा कर रहे है। मप्र सरकार के पास जीवन रक्षक उपकरण सुधारने वाले तकनीकी विषेशज्ञ तक नही है। अब हालात यह है कि छतरपुर जिले में सेना के विशेषज्ञ इन उपकरणो को सुधारने का काम कर अपने देशभक्ति के जज्बे मिसाल बने हुये है। 

खबर चौकन्ना करने जैसी है जिसे देखकर प्रशासनिक अमले सहित स्वास्थ महकमे को पूर्व से तैयारियां चाकचौबंद करनी होगी। 11 मई से 25 मई तक के बीच कोरोना के कुल सेम्पल और पाजीटिव जांच रिपोर्ट पर अध्यन किया गया तो भविष्य के गंभीर संकेत का ईशारा है। छतरपुर शहर और ईशानगर अनुभाग में इस दौरान उपलब्ध आंकडो के आधार पर विश्लेषण किया गया है। इन दो हफते के बीच 225 सेम्पल पाजीटिव मिले है। जिसमें छतरपुर शहर में 18 साल से कम उम्र के संक्रमित बच्चो की संख्यां 19 है। इसी तरह उपलब्ध आंकडो में ईशानगर ब्लाक यानि इस अनुभाग के ग्रामीण अंचलो में 20 सेम्पल में संक्रमण की पुष्टी हुई है जिसमें 3 संक्रमितो की उम्र 18 साल से कम है। बच्चो की उम्र को विभाजित करते हुये विष्लेशण करे तो इनमें 3 साल की एक बालिका, 6 साल उम्र में एक बालक और बालिका, 8 साल की एक बालिका, 12 साल के चार बालक, 14 साल के दो बालक, 15 साल की एक बालिका और बालक, 16 साल की एक बालिका और तीन बालक, 17 साल के दो बालक और दो बालिका व 18 साल का एक बालक शामिल है। कुल परिदृश्य देखा जाये तो दो हफते में 225 संक्रमितो में 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चो की संख्यां 22 है।

इस आधार पर पाजीटिविटी रेट देखे तो कुल संक्रमितो में 9.7 प्रतिशत बच्चो की संख्या है। जब आज संभावित तीसरी लहर में विशेषज्ञो का अनुमान है कि बच्चो पर अधिक संक्रमण का प्रभाव होगा तो इन हालात में पिछले दो सप्ताह में बच्चो के संक्रमण होने की लगभग 10 फीसदी दर को सामान्य लहजे में लेकर नजरअंदाज नही किया जा सकता। याद करे कि पिछले साल अचानक आई पहली लहर में ही इस आपदा से निपटने की पूर्व तैयारियो की पोल खुल गई थी। जबकि कोरोना का संक्रमण तब विश्वव्यापी हो चुका था। कोरोना का एक तूफान सा आया और तबाही के निशान छोड गया था। विशेषज्ञ दूसरी लहर आने की भी चेतावनी दे रहे थे। पहली लहर के बाद प्रधानमंत्री के पृथक से बनाये फंड सहित स्थानीय जिला स्तर तक समाजसेवियो ने खुलकर फंड दिया। ताकि आपदा के समय कोरोना संक्रमण से निपटने के लिये फंड का रोना आढे ना आ पाये। जब दूसरी लहर आई तो हालात इस कदर हो गये कि चारो और केवल मातम का आलम रहा। दानवीरो ने जो सरकार और प्रशासन को मेडिकल उपकरण, दवाईयो के लिये दान दिया था वह राशि कहां खर्च कर दी गई  यह बताने को कोई तैयाार नही है। प्रधानमंत्री केयर फंड से खरीदे गये वेटिंलेटर की गुणवत्ता ही आरोपो के घेरे में है। जब देश के स्तर पर जान बचाने वाले वेटिंलेटरो की अमानक खरीद को लेकर चर्चाये होने लगी तो प्रशासन से तो हिसाब पूछना तक व्यर्थ है।

आपदा में अवसर की तलाश की बदनियत खोट का ही परिणाम रहा कि दूसरी लहर में ना जाने कितने मौंत के मुंह में समा गये। एक प्रकार से यह हत्याये है जिनकी जिम्मेदारी लेने को कोई तैयार नही है। सरकारी अस्पतालो में आक्सीजन ना मिलने से मरीजो ने तडफ तडफ कर दम तोड दिया। मरीजो के मर्ज को लाशो में तब्दील होते देखते समय आमजनमानस सरकार और प्रशासन से जीवन बचाने की भीख मांगते दिखा पर अफसोसजनक कि अस्पतालो में तो व्यवस्थाये भी यातनाओ का रूप ले चुकी थी। लोगो का जीवन बचाने के लिये एक बार फिर समाज आगे आया और जीवन रक्षक मेडिकल उपकरण व अन्य सुविधाये उपलब्ध कराई । तभी यह सवाल उठता है कि जब आपदा के समय सरकार और प्रशासन का क्रूर चेहरा सामने देख समाज को ही अपनो के जीवन बचाने के लिये संघर्ष करना पढता है तो फिर लोकशाही और कार्यपालिका की भूमिका क्या है। आमजनमानस के मन यह प्रश्न इसलिये कौंध रहे है कि दूसरी लहर पूरी तरह से समाप्त नही हुई है वहीं तीसरी लहर का प्रभाव दिखना शुरू हो गया हैं। संक्रमण के भयावह हालात में फंगस के मरीजो की संख्या भी तेजी से बढ रही है। हालात दिनोदिन चितां की लकीरे खीच रहे है। इधर पूर्व तैयारियो का राग तो अलापा जा रहा है लेकिन जानकार बताते है कि उसी पुराने ढर्रे पर ही कोरोना मरीजो को उनके हाल पर छोड दिया जायेगा। अस्पताल सूत्रो के अनुसार पीएम केयर फंड से छतरपुर अस्पताल को तीन वेटिलेटर प्राप्त हुये थे जो तीनो ही खराब हो चुके है। यानि पीएम फंड के वेटिलेटर खरीद में भ्र्ष्टाचार की हवा भरने से दम तोड चुके है। 

इस संदर्भ में छतरपुर जिला अस्पताल के सिविल सर्जन लखन तिवारी का कहना है कि जीवन रक्षक उपकरणो को सुधारने के लिये झांसी बटालियन में पदस्थ सेना के विशेषज्ञो की सेवाये ली जा रही है। आक्सीजन पैनल, आक्सीजन सप्लाई की लीकेज सेन्ट्रल लाईन, पिछले कई वर्षो से खराब सी-पेप (सेमीवेटिलेंटर), सहित अन्य उपकरण को सुधारने का काम सेना के विशेषज्ञ क़र रहे है। सिविल सर्जन लखन तिवारी अस्पताल के सीमित संसाधनो पर कोरोना मरीजो के ईलाज करने लिये आश्वस्त है पर यह नही भूलना चाहिये कि कोरोना का जब चरम सीमा पर संक्रमण होता है तब यह सीमित संसाधन की दम पर मरीजो के जीवन को बचाने के प्रयास असफल साबित हुये है। ऐसे समय कहां है सरकार और कहां है वह लोकशाही के जनप्रतिनिधी जो दावे तो तुर्रम खां जैसे करते है पर जब आपदा का दौर आता है, तब दुबके से नज़र आते हे और मरीज को जीवन की जगह मौंत मिलती हैं। लेख कर जाती है आपदा की विभीषिका में सरकार प्रशासन की असफलता की सच्ची कथाये।

Comments

Subscribe

Receive updates and latest news direct from our team. Simply enter your email below :