मीडिया Now - आयुर्वेद प्रकृति का सत्य सनातन वरदान है

आयुर्वेद प्रकृति का सत्य सनातन वरदान है

medianow 27-05-2021 13:09:07


दीपक गोस्वामी / मथुरा। विश्व की हर इलाज पद्वति  प्रकृति से प्राप्त मूल तत्वों , वनस्पतियों, धातुओं, फल, फूल, मृदा, द्रव्य और अन्य अन्य  वस्तुओं पर आधारित है। बड़े बड़े अस्पताल इलाज के नाम पर अंधाधुंध रसायनों का दुरूपयोग करके सिर्फ नये नये प्रयोग कर रहे है। आयुर्वेद जन ओषध पद्वति है और आजीवन रहेगी। जन सुलभ, सहज, सरल , किफायती, और किसी भी प्रकार के नुकसान से रहित। इस नवीन युग में राजश्रय के अभाव और धन पिपासु महाज्ञानियों के षड्यंत्र के दुष्प्रभाव से यह मृत प्राय हो गई है। आयुर्वेद देव विधा है। अमृत विधा है। आयुर्वेद मृत संजीवनी है। सम्पूर्ण विश्व  आयुर्वेद से उम्मीद और आस लगा कर इसको समझने जानने और महसूस करने का प्रयास कर रहा है। तथाकथित नव विज्ञान का कोई भी मनीषी क्या यह सिद्ध कर सकता है कि आर्युवेद के मूल सिद्धांतों ,दर्शन, और  दव्य विज्ञान के विना उनकी  चिकित्सा  पद्वति का कोई उपयोग और आधार है। पर कई यक्ष प्रश्न आज भी मुँह चिढ़ाते हमें परेशान कर रहे हैं?
-पूरे देश में कितने  शुद्ध आयुर्वेद अस्पताल और डॉक्टर मौजूद हैं?
-क्या आयुर्वेद को उचित राजश्रय,मान सम्मान देकर नए नए शोधों और प्रयोगों के लिए प्रोत्साहित किया जाता रहा है।या वर्तमान में ऐसा कुछ भी किया जा रहा है?
-क्या जन स्वास्थ्य  और आरोग्य  के नाम पर अदृश्य शक्तिशाली शक्तियों के माध्यम से चल रहे कुत्सित षडयंत्र में आम जन मानस से हो रही खुली लूट और उसके  स्वास्थ्य के साथ हो रही  प्रयोग धर्मी उपचार व्यवस्था से जन्य अन्य दुष्प्रभावों आदि के खिलाफ कोई भी दंडात्मक वैधानिक कार्यवाही और  रोकथाम के बारे में कभी भी गंभीरता से विचार चिंतन, मनन किया गया?
प्रश्न हजारों हो सकते हैं पर उत्तर देने वाला कोई नही। दादी नानी की रसोई ,गांव गांव के सरल सहज जन सेवक वैद्य जी, हर मौसम के अनुकूल स्वयं सिद्ध ,पूर्वजो के अनुभव के देशी इलाज, हर बड़े से बड़े रोग को  दूर बैठे मरीज की नाड़ी को सिर्फ एक सूत की पतली सी डोर से देख जान कर अक्षरक्ष सत्य सत्य बताने वाले आदर्श कर्मयोगी वैद्य जी आज अलोपित हो गए है। खैर जो भी हो मैं पूर्ण सत्यनिष्ठा और मन कर्म वचन से शुद्ध  प्राण प्रदाता ,जीवन रक्षक,मृत संजीविनी विद्या शुद्ध आयुर्वेद का पूर्ण समर्थक था ,हूँ,रहूँगा। आज समय की मांग हैं हम स्वस्थ रहना सीखें और दूसरों को भी स्वस्थ रहना सिखाए।

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