मीडिया Now - क्यों ? तुम्हारा यूनिफॉर्म आज ठीक नही है?

क्यों ? तुम्हारा यूनिफॉर्म आज ठीक नही है?

medianow 28-05-2021 12:24:12


नवीन जैन,वरिष्ठ पत्रकार / मुनादी हो चुकी है।सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इनवेस्टिगेशन ऊर्फ़ सीबीआइ के नए मुखिया सुबोध कुमार जायसवाल होंगे। मुहर लग चुकी है। सीनियर आइपीएस अफसर सुबोधकुमार जायसवाल 1985 की महाराष्ट्र कॉडर के अफसर हैं। वे,अनुशासन, भ्र्ष्टाचार के ख़िलाफ़, और कानूनों की सरपरस्ती के लिए वे राष्ट्रपति से सम्मान पत्र पा चुके हैं, तो जिस तेलगी प्रकरण ने उन्हें नेकनामी के सातवें आसमान पर चढ़ाया,उसी ने उन्हें मुम्बई पुलिस महकमे में खलनायक का दर्ज़ा दे दिया। इस प्रकरण का केन्द्र अब्दुल करीम तेलगी माना जाता था। यह फर्जी स्टाम्प पेपर काण्ड मुंबई पुलिस के कई बंदों की सात पीढ़ियों का इंतज़ाम करने वाला था। लिहाजा, जब पुलिस के  कई बड़े  छोटे लोग सुबोधकुमार जायसवाल की ज़द में आए,तब सुबोधकुमार का अपने ही कई लोग ब्लैकआउट  बाइकाट या सामाजिक बहिष्कार करने लगे। दुआ सलाम नाम की। दावतनामे आने बंद। कहा जाने लगा हमारा बॉस हमें ही नहीं बख्श रहा। अब चूँकि,जायसवाल  मजबूत मेटल वाले अफसर रहे,तो उन्हें क्या फर्क पड़े।न कभी मीडिया के सामने आना,न कोई इंटरव्यू।

मीडिया  के एक ब्लॉक के अनुसार जायसवाल राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल के विश्वस्त हैं। इसमें बुरा क्या है? ठीक है कि डोभाल केन्द्र सरकार के खासमखास हैं, मग़र उनके पूरे कार्यकाल पर जो सवाल करे,तय मानिए कि उसकी अक्ल पर ताला  पड़ गया है। सरकार का तोता, मिट्ठू,पोपट होने के यदि कुछ फायदे होते हैं, तो ज्यादा नुकसान भी।इसीलिए सुबोधकुमार जायसवाल को कभी  नक्सल प्रभावी इलाकों में भेजा गया तो कभी किसी लूप लाइन में डाल दिया गया। कई आइएएस, और आइपीएस क़ानूनों के इतने पक्के होते हैं, कि अच्छे अच्छे तीसमारखाँओं की घड़ी कर दे। फिर वे स्व. टी. एन. शेषन हों, अनिल धस्माना हों, नजीब जंग हों, सावली धूरत हों,के. पी . एस गिल हों,स्व. सुरजीत सिंह हों या डॉ. अशोक खेमका हों।विडंबना हमारी राजनीति की है।संविधान के प्रति निष्ठावान इस तरह के अफसरान की चाहे जब नपती कर दी जाती है।बावजूद इसके सुबोधकुमार जायसवाल जब मुंबई के पुलिस कमिश्नर थे,तब महाराष्ट्र के राजकरण की बडी भारी तोप एनसीपी के नेता छगन भुजबल,और उनके भतीजे समीर तक उक्त बेखौफ अफसर के हाथ पहुँच ही गए थे।ऋषि कुमार शुक्ला की जगह लेने वाले जायसवाल के करियर की एक दहाई इंटलीजेंस ब्यूरोउर्फ आई. बी. और रिसर्च एण्ड एनलीसिस विंग ऊर्फ़ रॉ के साथ बीत चुकी है।

सुबोधकुमार जायसवाल अनुशासन के प्रति इतने निष्ठावान बताए जाते हैं ,कि यदि किसी भी पुलिस कर्मी के यूनिफॉर्म  को ज़रा सा भी अस्त व्यस्त देख लें,तो बेसाख़्ता बोल पड़ते हैं, क्यों ,तुम्हारा यूनिफॉर्म आज अस्त व्यस्त क्यों है?जायसवाल की नियुक्ति दो साल के लिए हुई है। जानकार कहते हैं, कि सुबोधकुमार जायसवाल बेहद ईमानदार, और सख्त शख्सियत हैं, इसलिए अगला सफ़ऱ उनसे ज़्यादा सरकार के लिए चुनौती पूर्ण होगा।सीबीआइ का इतिहास कुल मिलाकर रोशन रहा है।इस देश में जहाँ भ्रष्टाचार न जाने कब का शिष्टाचार बन चुका है,वहाँ इस एजेंसी की सफलताएँ जानकर हैरत होती है हैरत। क्या कोई सोच भी सकता है, कि इसी एजेंसी ने रिश्वत देने के आरोपी एक पूर्व दिवंगत प्रधानमंत्री को पद पर रहते हुए तीन साल की सजा सुनवा दी थी।हालांकि उक्त निर्णय पर तत्काल स्थगन भी दे दिया गया था। बिहार के  पूर्व सीएम लालू प्रसाद यादव के करोड़ों रुपए के चारा घोटाले को सफलतापूर्वक सीबीआइ ने ही उजागर किया था।किक्रेट मैच फिक्सिंग, पिछले साल का हाथरस सामूहिक  बलात्कार काण्ड जैसी कई सफलताएँ इस एजेंसी के खाते में दर्ज़ है।संसद कभी किसी इश्यू  को लेकर गुस्से से उबल रही होती थी,तो सीबीआइ से जांच की घोषणा से माहौल शांत हो जाया करता था।आवश्यकता सिर्फ़ इस बात की रही  है कि सीबीआइ को फ्री हेण्ड दे दिया जाए।

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