मीडिया Now - मोदी साफ झूठ बोल रहे हैं! मोदी सरकार पूरी तरह से अमेरिकन फार्मा लॉबी के दबाव में काम कर रही है

मोदी साफ झूठ बोल रहे हैं! मोदी सरकार पूरी तरह से अमेरिकन फार्मा लॉबी के दबाव में काम कर रही है

medianow 31-05-2021 16:10:04


गिरीश मालवीय / कल मोदी ने मन की बात में कहा कि 'अब भारत दूसरे देशों की सोच और उनके दबाव में नहीं, अपने संकल्प से चलता है' ......मोदी साफ झूठ बोल रहे हैं मोदी सरकार पूरी तरह से अमेरिकन फार्मा लॉबी के दबाव में काम कर रही है, आप कहेंगे कैसे ? तो जानने के लिए पोस्ट अंत तक जरूर पढ़िएगा...रोशे ने कुछ दिन पहले कोरोना के लिए अपनी एंटीबॉडी कॉकटेल भारत में लॉन्च की है इस एंटीबॉडी कॉकटेल की एक डोज भारत में 60 हजार रुपए की है..... किसी ने पूछा कि आप इतनी महंगी दवा कैसे ओर क्यो बेच रहे हैं ? क्या आपने कभी फार्मा कम्पनियो की मचाई गयी लूट पर पॉपुलर प्रिंट मीडिया में कोई लेख पढ़ा है या इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में कोई बहस चलती देखी है ? भारत के अधिकांश बुद्धिजीवी कभी बड़ी फार्मा कपनियो द्वारा ली जा रही बेशर्म कीमत और अनैतिक मुनाफे की आलोचना नही करते ! न ही वह यह बताते हैं कि वर्तमान की मोदी सरकार किस तरह से बिग फार्मा के हाथों बिक चुकी है...... 

रोशे की इस नयी ऐंटीबॉडी कॉकटेल ओर गिलियड की रेमडेसिविर को मंज़ूरी देने की प्रक्रिया में तेज़ी का कारण मोदी सरकार द्वारा लाई गई नई ड्रग एंड क्लिनिकल ट्रायल नियमावली 2019 रही है, जिसमें भारत मे  विशेष स्थिति में बगैर क्लिनिकल ट्रायल के दवा को मंज़ूरी देने का प्रावधान किया गया है...... गिलियड को रेमेडिसवीर का पेटेन्ट तो फरवरी 2020 में दिया गया अगर ये पेटेन्ट नही होता तो भारत की जेनेरिक दवा निर्माता कम्पनिया दूसरी लहर में रेमेडिसवीर का ढेर लगा देती ......

दरअसल मोदी सरकार  अमेरिकी फार्मा कम्पनियो के हित मे देश की पेटेंट नीतियों को मोल्ड करती जा रही है .........जैसे गिलियड की रेमेडिसवीर है वैसे ही गिलियड की एक ओर दवा है जो हेपेटाइटिस के लिए बनाई गई है जिसे सोफोसबुवीर के नाम से जाना जाता है इसे सोवाल्डी भी कहा जाता है पूरी दुनिया मे गिलियड की इस दवा की उलजुलूल कीमत के लिए काफी आलोचना होती रही है. विदेशों में हेपेटाइटिस के इलाज के लिए इसकी एक खुराक की कीमत लगभग 75 हजार रुपए है. इस हिसाब से इस दवा के 84 दिनों के कोर्स की कीमत साढ़े 63 लाख पड़ता है इस दवा के कारण विदेशों में नागरिकों के लिए हैल्थ इंश्योरेंस के वार्षिक प्रीमियम अनाप शनाप तरीके से बढ़ गए हैं, अब इस दवा के भारत आगमन की कथा सुन लीजिए यह कथा 2016 में कारवाँ मैगजीन के लिए विद्या कृष्णन ने लिखी थी।

जुलाई 2014 में, गिलियड ने भारत मे सोफोसबुवीर के लिए एक पेटेंट के लिए एक आवेदन दिया जो भारत के पेटेन्ट कार्यालय में हरदेव करर नामक एक अधिकारी के सामने आया। गिलियड का प्रतिनिधित्व करने वाले वकीलों ने हरदेव करार से बार-बार संपर्क किया  उन्हें पेटेंट देने के लिए "मनाने के लिए कहा  गिलियड ने उस पर  बेतरह दबाव डाला लेकिन जनवरी 2015 में, अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के भारत दौरे से ठीक दो हफ्ते पहले, हरदेव करार ने गिलियड के आवेदन को  आविष्कार और नवीनता की कमी के कारण खारिज कर दिया

इस फैसले ने दुनिया भर में सुर्खियां बटोरीं क्योकि फार्मा की दुनिया के हिसाब से यह बहुत बड़ा फैसला था लेकिन उसके बाद क्या हुआ यह भी जान लीजिए

इस फैसले के बाद जो हुआ उसकी कारवाँ के लेख में पूरी डिटेल है...... पेटेन्ट नामंजूर करने का फ़ैसले लेते ही हरदेव करार को  तुरंत ही तीव्र प्रतिक्रिया का सामना करना पड़ा। "बस, फायरिंग शुरू हो गई" , फैसले के दिन एक अधिकारी के अनुसार, करर को अपने बॉस, चैतन्य प्रसाद का फोन आया, जो उस समय भारत के पेटेंट, डिजाइन और ट्रेडमार्क के महानियंत्रक थे, उन्होंने फोन पर करर पर चिल्लाते हुए कहा, "दिमाग का इस्तमाल नहीं किया क्या?" अधिकारी ने कहा कि प्रसाद ने ओबामा की यात्रा का समय नहीं रखने के लिए भी करर को फटकार लगा दी

फैसले के दो दिन बाद, उसी अधिकारी ने बताया कि , चैतन्य प्रसाद ने करर को अपने कक्षों में बुलाया। "वह हरदेव करार पर चिल्ला रहा था," इस अधिकारी ने बताया, यह कहते हुए कि ड्रेसिंग-डाउन पूरी मंजिल को सुनने के लिए काफी जोर से था। उनके अनुसार, प्रसाद ने करर को नागपुर स्थानांतरित करने की धमकी दी - जिसे आमतौर पर एक कम प्रतिष्ठित पोस्टिंग के रूप में देखा जाता था, 

अन्ततः गिलियड की फ़ाइल दोबारा खोली गई, तब तक हरदेव करर की जगह एक और अधिकारी लिया गया ओर 9 मई 2016 को भारत के पेटेंट, डिजाइन और ट्रेडमार्क के महानियंत्रक ने गिलियड साइंसेज को उसके हेपेटाइटिस सी की दवा सोफोस्बुविर ( ब्रांड नाम सोवाल्डी ) को भारत में पेटेंट दे दिया.

अब आप समझे कि मोदी सरकार में बिग फार्मा कितना ताकतवर है और निजी अस्पताल को कैसे कोरोना काल मे आप सबको लूटने की छूट मिली हैं.
- लेखक एक नामी समीक्षक हैं

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