मीडिया Now - महाराष्ट्र: मई महीने में 9,900 बच्चों के कोरोना पॉजिटिव होने से हड़कंप? DM ने बताई ये वजह

महाराष्ट्र: मई महीने में 9,900 बच्चों के कोरोना पॉजिटिव होने से हड़कंप? DM ने बताई ये वजह

medianow 01-06-2021 21:38:08


मुंबई। महाराष्ट्र के अहमदनगर में पिछले महीने यानी मई में 9900 बच्चों के कोरोना पॉजिटिव आने के बाद लगातार ये सवाल उठ रहा है कि क्या कोरोना की तीसरी लहर तो नहीं आ गई. क्योंकि एक्सपर्ट ने तीसरी लहर में ज्यादातर बच्चों के कोरोना की चपेट में आने की आशंका जताई गई है. इस बीच, अहमद नगर के डीएम राजेन्द्र भोसले एबीपी न्यूज़ के साथ बात करते हुए कहा कि मई के महीने में अहमदनगर में कुल 86 हजार पॉजिटिव केस आए हैं. लेकिन मौत नहीं हुई है.

क्यों अहमदनगर में कोरोना की गिरफ्त में बच्चे
राजेन्द्र भोसले ने आगे बताया कि चूंकि अप्रैल के महीने में जो शादियां थीं उनमें 18 साल के नीचे के लोगों की भीड़ ज्यादा थी. उसके बाद लॉकडाउन के दौरान भी बच्चे खेल रहे थे. उनका मूवमेंट जारी थी. इसलिए बच्चों का पॉजिटिविटी रेट 11 फीसदी आया है. उन्होंने बताया कि अहमदनगर जिले में टास्क फोर्स का गठन किया है. उन्होंने कुछ सुझाव दिए हैं उसके हिसाब से सिविल हॉस्पिटल में पेडियाट्रिक वॉर्ड्स कर रहे हैं. 100 बेड का पेडिएट्रिक वॉर्ड हम कर रहे हैं. उसमें से 15 बेड आईसीयू रख रहे हैं. हालांकि इसमें से किसी की डेथ नहीं हुई है.

95 फीसदी लोगों में नहीं संक्रमण के लक्षण
जिलाधिकारी ने बताया कि जिन 9,928 नाबालिगों में संक्रमण की पुष्टि हुई है, उनमें से 6,700 लोग 11 से 18 वर्ष की आयु के हैं, 3,100 एक से दस वर्ष के बीच हैं वहीं कुछ एक वर्ष से कम आयु के भी हैं. उन्होंने कहा, ‘‘ चूंकि इनमें से 95 प्रतिशत लोगों में संक्रमण के लक्षण नहीं थे, इसलिए चिंता की बात नहीं है. संक्रमण की तीसरी लहर की आशंका के चलते यह जरूरी है कि बच्चों पर ज्यादा ध्यान दिया जाए.’’

अहमदनगर के बालरोग कार्यबल के सदस्य डॉ सचिन सोलाट ने कहा कि यह संख्या काफी अधिक है लेकिन ‘‘हालात चिंताजनक कतई नहीं हैं’’ क्योंकि संक्रमण की चपेट में आए नाबालिगों में संक्रमण के लक्षण नहीं थे. उन्होंने कहा कि जिले के निगम अस्पताल में भर्ती 350 से 370 मरीजों में से पांच या छह बच्चे हैं. इतनी बड़ी संख्या में बच्चों के संक्रमण की चपेट में आने के कारण के बारे में पूछे जाने पर डॉ सोलाट ने कहा, ‘‘अधिकतर मामलों में बच्चों में संक्रमण अभिभावकों या परिवार के अन्य वयस्क सदस्यों से पहुंचा.’’

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