मीडिया Now - पेट्रोल की आकाश छूती कीमतों के बाद फिर जरूरी है साइकिल

पेट्रोल की आकाश छूती कीमतों के बाद फिर जरूरी है साइकिल

medianow 03-06-2021 14:47:06


अमित प्रकाश सिंह / पूरी दुनिया में घूमते पहिए की बडी इज्जत है। पहिए के आज विभिन्न रूप और उपयोग हैं।कवियों ने भी घूमते पहिए की आभाओं को अपनी कविताओं से पूरी दुनिया में उभारा है।आज भी युवाओं में साइकिल देख कर कहीं दूर घूम आने का मन होता है। युवा सपनों में आज यदि  साइकिल है तो साफ है कि वे अपने स्वास्थ्य और परिवेश के लिए भी अब चिंता कर रहे हैं। यह जरूर है कि विज्ञापनों के चलते पैदल चलने वालों के देश में आज कारों की भरमार है । गति, समय और ताजगी के दावों को भारत सरकार ने पेट्रोल और डीजल की लगातार बढ़ती कीमत से धराशाई कर दिया है।

 सौ रुपए  के पार की कीमत पर आज पेट्रोल है।डीजल भी बहुत पीछे नहीं है। रसोई गैस हजार पार हो रही है। सोचिए ये कीमतें क्या होंगी जब 2024 में लोकसभा चुनाव होगा।सोचिए, अगले ही साल जब वूपी,उत्तराखंड ,और दूसरे प्रदेशों में चुनाव होगें तो क्या कीमतें देश के नागरिक अपनी गाढी कमाई से देंगे। ऐसे में जरूरी है कि जनता और युवा अपनी मोटरसाइकिल,स्कूटर,कारें घर पर ही छोडें और साइकिल  चलाने शुरू करें ।

युवा जब यह फैसला लेंगे तो पूरे यूरोप, लैटिन अमेरिकी देशों के युवाओं के साथ उनका अपनापा बढेगा। यह ज्यादा जरूरी है उनके स्वास्थ्य और शहरों के परिवेश के लिए। साइकिल निर्माता भी बैट्री चालित साइकिल और उनके विभिन्न नए रूपों को भारत में बनाने लगेंगे जो विभिन्न देशों में दिखते हैं। तब सडक पर गति भी होगी और साफ सफाई ।अभी तो गाने के टेप बजाए जाते हैं कि' स्वच्छ भारत बनाने का हमने इरादा ' किया है तब शायद  स्वच्छता भी हो।

दिल्ली के उप मुख्यमंत्री जो खुद दुनिया घूमे राजनीतिक हैं ।शिक्षा को सरकारी स्कूलों में बेहतर बनाने का काम उन्होंने किया है ।एक बार कहने लगे कि दिल्ली के आंतरिक  और बाह्य रोड ऐसे होने चाहिए कि साइकिल पथ बन सके ।साइकिल चलाते हुए युवा अपने स्कूल,कॉलेज, विश्वविद्यालय ,चिडिया घर, विभिन्न पार्क ,बाजार और घरों को आ जा सकें।लेकिन बसों ,कारो,स्कूटर बनाने वालों से उनकी ऐसी दोस्ती बनी कि फिर उनकी बात सिर्फ बात बन कर उड गई।  दूसरी पार्टियों से उम्मीद नहीं है क्योंकि उनके तमाम नेता बूढे,तोंदियल,और इस कदर लिजलिजे से अब हो गए  हैं जो  बिना कार के पार्क तक भी नहीं जा पाते। 

पढेलिखे युवाओं के लिए साइकिल को लोकप्रिय बनाने की कोशिश करने वाले लेखक समाजसेवी राजेंद्र रवि ने हिंदी और अंग्रेजी में एक बेहतर किताब 'साइकिल गाथा :शहर में साइकिल की दशा और दिशा ' लिखी है जिसकी चर्चा भी रही है ।यह उनकी संस्था इंस्टीच्यूट फार डेमोक्रेसी एंड   सस्टेनेबिलिटी  ,मकान नंबर-सात,गली नंबर एक,ब्लाक ए,हिमगिरि एन्क्लेव पेप्सी रोड,मेन बुराडी रोड, नई दिल्ली 84 से प्रकाशित हुई है।

यह पुस्तक उन युवाओं के लिए है जो कोविड काल में अपने घर पिता ,मां,पत्नी,बच्चों के साथ उन महानगरों से साइकिल चलाते हुए  लौट सके। ये रोजी रोटी के लिए महानगरों को आए। लाकङाउन घोषित हुआ ।उनके मालिकों ने हाथ खडे कर दिए। ठेकेदार ने पैसे रोक लिए।घर  की गुल्लक  तोड कर किसी तरह कुछ इंतजाम किया ।इनकी मदद न सरकारों ने की और न प्रशासन ने। बल्कि एक कलक्टर ने इन पर रासायनिक छिड़काव तक करा दिया जिससे दूसरी भी बीमारियों ने धर दबोचा।

इन तमाम आपदाओं से बचने की कोशिश में साइकिल ही उपयोगी है।यह हो सकता है कि ड्यूटी पर तैनात सिपाही किसी  भी बहाने से रोक ले।पहिए से हवा निकाल दे ।डंडा भांजने लगे ।क्योंकि उसे यही प्रशासन और सरकार ने सिखाया है। तकलीफ झेलिए और इस बर्बरता की शिकायत एस पी को जरूर कीजिए ।साइकिल ठीक करा कर अपने घर तक पहुंचिए। साइकिल में गुण बहुत हैं ।उसे चलाइए और अन्याय का प्रतिरोध जरूर कीजिए।इसलिए कि जो है उससे बेहतर चाहिए।
- लेखक एक वरिष्ठ पत्रकार हैं

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