मीडिया Now - 5 जून पर्यावरण दिवस पर विशेष समय की मांग ऑक्सीजन पार्क

5 जून पर्यावरण दिवस पर विशेष समय की मांग ऑक्सीजन पार्क

medianow 05-06-2021 10:52:20


एक ताजा अध्ययन में यह बात सामने आई कि शहर के रिहायशी इलाकों में हरे भरे ऑक्सीजन पार्क बनाये जाने की कवायद की जा रही है। ज्ञातव्य है कि कोरोना में या अन्य बीमारियों में या सामान्य जीवन मे भी ऑक्सीजन जिसे प्राणवायु कहते है सहज अनुमान इस तरह लग सकते मनुष्य भोजन के बिना कई दिनों तक जीवित रह सकता है लेकिन उसे वायु यानी ऑक्सीजन नही मिले तो उसका जीवित रहना असम्भव है। ऐसे में शहरों की खाली पड़ी जमीनों पर बाग बगीचों को घूमने फिरने के अलावा नए रूप में (यानी ऑक्सीजन पार्क ) में ढाले जाने की कोशिश कई शहरों में हुई है जिसमे रांची, तेलगाना , राजकोट ,छत्तीसगढ़, इंदौर तथा भोपाल जैसे शहर है। कोरोना काल खंड में जब ऐसी खबरें भी आ रही है कि ऑक्सीजन की भी आपूर्ति में कई जगह परेशानी आ रही है तो ऐसी खबरें सुकून देती है कि शहरों की खाली पड़ी सरकारी जमीनें, छात्रावासों के मैदान  जो उपयोग में नही आ रहे हो, नगरनिगम के डिवाइडरों जैसी जगहों पर ऐसे पेड़ पौधे लगाए जाएंगे जो ज्यादातर घण्टे ऑक्सीजन देते है। इन पेड़ पौधों में पीपल,नीम, बरगद,तुलसी,जामुन,गूलर, आँवला, बहेरा, अमरूद सीताफल, हर्रा तथा बांस के पेड़ है । घ्यान रहे कि पीपल 24 घण्टे में से 22 घण्टे से भी ज्यादा समय तक ऑक्सीजन देता है। बांस पृथ्वी पर सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रजाति है तथा वह हर 24 घण्टे में से 2 से 3 इंच बढ़ता है। इसके अलावा बांस दूसरे किसी पेड़ पौधों की अपेक्षा 33 फीसदी अधिक कार्बनडाई ऑक्साइड अवशोषित करता है और 35 फीसदी से अधिक ऑक्सीजन देता है।

यह बात सौ फीसदी सच है कि इंसान का शरीर सुचारू रूप से तभी काम कर पाता है जब उसके सभी भागों में ऑक्सीजन की पूर्ति आवश्यकतानुसार होती है। ऑक्सीजन की वजह से ही शरीर उचित तरह से काम करता है। ऑक्सीजन की ये पूर्ति पूरे शरीर मे खून के जरिये होती है। हमारे शरीर मे 90 फीसदी एनर्जी ऑक्सीजन की वजह से मिलती है। प्रातःकाल टहलने से तथा गहरी सांस लेने से फेफड़ो में ज्यादा से ज्यादा शुद्ध हवा आती है जिससे शरीर को भरपूर ऑक्सीजन मिलती है। इससे रक्तप्रवाह तेज होता है तथा स्फूर्ति  आती है। शुद्ध हवा से हड्डियों तथा मांसपेशियों को मजबूती मिलती है और नई कोशिकाओं का निर्माण होता है। त्वचा की चमक के साथ उसमे निखार भी आता है।

वैसे तो रांची में कई बाग बगीचे है पर एक अनोखा बगीचा जिसे शहीद नीलांबर पीतांबर पार्क यानी ऑक्सीजन पार्क भी कहा जाता है। एक संजीवनी की तरह इस पार्क में ऑक्सीजन देने वाले पेड़ पौधों के अलावा कई तरह के फूल और नई नई किस्म के पौधे भी लगाए गए है । सेहत के साथ यहाँ मनोरंजन का भी पूरा ख्याल रखा गया है। एक अच्छी खबर यह भी है कि रांची में इस तरह के कई और पार्क भी विकसित करने की योजना भी है।इसी तरह का एक प्रयास उपवन तथा जीवन पार्क सोसायटी के लोगो ने खुद ही कर दिखाया । 150 किस्मो से सजा यह ऑक्सीजन बगीचा लोगो को इमोशनली तथा फिजिकली स्ट्रांग बनाने में मदद कर रहा है। लखनऊ में पर्यावरण को बेहतर बनाने के अलावा इस कड़ी में कुपोषण से छुटकारा दिलाने के लिए शहरी क्षेत्रों में 20 ऑक्सीजन पार्क बनेंगे।

वहीं एक अच्छी बात यह भी है कि इन्ही पार्को में पोषण वाटिका भी बनेगी जहाँ ऑक्सीजन देने वाले पौधों के अलावा कुपोषित ग्राम पंचायतों में उपयोगी फल तथा ओषधि वाले पौधे लगाए जाएंगे। आंगनबाड़ी केंद्रों की निगरानी में इन पोषण वाटिका में होने वाले फल ,सब्जियों को कुपोषित बच्चो तथा गर्भवती महिलाओं को मुफ्त में दिए जाएंगे। इन पार्को में बाउंड्री वॉल के साथ फलदार तथा छायादार पौधों की नर्सरी बनाई जायगी। छोटे बच्चो के खेलकूद के इंतजाम भी होंगे ताकि बढ़ते वायु प्रदूषण पर भी रोक लगेभोपाल के जल एवम भूमि प्रबंधन संस्थान में 30 हेक्टेयर क्षेत्र में इकोलॉजिकल ऑक्सीजन पार्क जहाँ ऑक्सीजन देने वाले पौधे तो है ही इसके अतिरिक्त वाल्मी पहाड़ी पर उपलब्ध जैव विविधता के अस्तित्व को कायम रखने का प्रयास भी किया गया है कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार हरे भरे पेडों की पत्तियां एक घंटे में 5 मिलीमीटर ऑक्सीजन बनाती है। 

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में अटल स्मृति वन जो 18 एकड़ में फैला है। उसे भी ऑक्सीजन पार्क में तब्दील किया जा रहा है। इस ऑक्सीजन पार्क में 3500 प्रजाति के पेड़ पौधे लगाए जा रहे है। प्रथम चरण में बन चुके इस पार्क में ढेरों स्थानीय पेड़ पौधे लगाए जा चुके है। शुद्ध हवा के मामले में इसी तरह की पहल राजकोट के एक इलाके में भी की गई है। कम इलाके में फैले इस ऑक्सीजन पार्क में 150 से अधिक प्रजाति के तकरीबन साढ़े तीन हजार ओषधीय पेड़ लगाए गए है। यह पार्क अब मिनी फारेस्ट का रूप ले चुका है। ऑक्सीजन पार्क के ढेरों फायदों के बीच एक खबर यह भी रोमांचक है कि महाराष्ट्र के बड़े शहर नासिक में देश का पहला ऑक्सीजन पार्लर बनाया गया है। नासिक रेलवे स्टेशन पर बना यह पार्लर लोगो को शुद्ध हवा के साथ नए नए पेड़ पौधों की जानकारी भी देगा । मजेदार यह भी है कि इस पार्लर से पेड़ पौधे खरीद भी सकते है। 24 घण्टे ऑक्सीजन देने वाले पेड़ पौधों के इस पार्लर की खासियत यह भी है कि नासा ने जो 38 ऑक्सीजन देने वाले पौधों की सूची जारी की है उनमें से 18 पौधे भारत मे बहुत बड़ी मात्रा में पाए जाते है। इनमे पीपल,तुलसी ,बरगद भी है।

गौरतलब है कि शहरों के विस्तार का असर हरियाली पर पड़ा है। कई जगहों पर पार्क पार्किंग में बदल गए है। लेकिन अब सीमित जगह के बेहतर इस्तेमाल पर जोर दिया जा रहा है। यही वजह है कि सिंगापुर के एक अस्पताल जहाँ जाते ही मरीजो का रक्तचाप नॉर्मल हो जाता है तथा वह मानसिक रूप से खुद को प्रफुल्लित महसूस करने लगता है। सिंगापुर के खू टेक पुआट  अस्पताल में तकरीबन 1000 पौधे लगाए गए है जिसमे 700 पौधे खुशबूदार है। फर्म इस बात का दावा करती है कि हरियाली मेंटल फिजिकल हेल्थ के लिए दवा का काम कर रही है। सिंगापुर की तर्ज पर मलेशिया चीन के अलावा कई देश इस तरह की परियोजना पर विचार विमर्श कर रहे है। इस अस्पताल ने अपने अनोखे प्रयास से कई पुरस्कार जीते है।इसी तरह के नए प्रयोग चीन के "ए हाउस इन चीन " शिकागो का "सिटी हॉल" फोर्स आइस लेंड का " कोझी हाउस  "केनेडा का " गेराज हाउस" ऑस्ट्रिया का "होटल इन आइस ट्रीया " जापान का "मोमिन हाउस" यूएस का "स्वीडिश रेस्टोरेंट"तथा सिंगापुर का "ननयीग टेक्नोलॉजी यूनिवर्सिटी कैम्पस " में हो रहे है। इन जगहों पर छतों पर बालकनियों में हरियाली के लिए बड़े सुंदर बगीचे बन रहे है। जो किसी का भी मन मोह सकते है। "फारेस्ट बॉथिंग " नाम की एक पद्धति जो जापानी लोगो मे पेड़ पौधों के प्रति आकर्षण पैदा करने के लिए बनाई है।

कम होते पेड़ो के बारे में "नेचर" जर्मन की एक रिपोर्ट चिंतनीय है कि जब से मानव सभ्यता की शुरुआत हुई ,तब से मौजूद पेड़ो की संख्या में अब तक 46 फीसदी की कमी आ चुकी है । दुनियाभर में हर वर्ष 10 अरब पेड़ काटे जा रहे है । चिंता की बात यह भी है कि एक सेकेंड में एक फुटबाल के मैदान जितना जंगल काटा जा रहा है । यदि दुनिया मे जंगलो की गति यही रही तो इस सदी के आखिर तक समूची दुनिया के जंगलों के सफाया हो सकता है। इस रिपोर्ट की माने तो दुनियाभर में एक व्यक्ति के लिए 422 पेड़ मौजूद है । पेड़ो की संख्या के मामले में रूस सबसे आगे है । कनाडा दूसरे स्थान पर और तीसरे स्थान पर ब्राजील है । इसके बाद अमेरिका का स्थान है। भारत इस मामले में बहुत पीछे है। कहने का आशय यह है कि यदि इन शहरों की तरह अन्य छोटे बड़े शहरों में भी खाली पड़ी जमीनों को ऑक्सीजन पार्क में बदलने का प्रयास करे तो बहुत कम खर्च में हम अपने शहरों की आबोहवा शुद्ध बना सकते है क्योकि हैरानी की बात यह है कि भारत मे सिर्फ 35 अरब पेड़ है। यानी एक व्यक्ति के लिए सिर्फ 28 पेड़।

रेणु जैन, इंदौर

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