मीडिया Now - 'सिंधिया के अच्छे दिनों के आने की आहट'

'सिंधिया के अच्छे दिनों के आने की आहट'

Administrator 07-06-2021 10:08:04


नवीन जैन , वरिष्ठ पत्रकार / मध्यप्रदेश की राजनीति के भाजपाई गलियारों में चमक दमक का मौसम लौटने के आसार बताए जा रहे है । वजह है, राज्यसभा सदस्य ज्योदित्यादित्य सिंधिया  को केन्द्रीय मंत्रिमंडल में सम्मिलित किए जाने के संकेत मिलना ।भाजपा के अंदरखानों में से खबरें निकल रही है, कि ज्योदित्यादित्य को मानव संसाधन विकास मंत्री बनाने की मानसिक कवायद ज़ोरों पर है। ऐसा  कदम उठाने से भाजपा आला कमान को मिल रही दो चुनोतियों से निज़ात मिल सकती है। एक, तो यह कि आला कमान से लगातार चल रहा सिंधिया का गुस्सा पिघल जाएगा। कारण, कि सिंधिया को राज्यसभा सीट ऑफर करने के अलावा सूबे का मुख्यमंत्री या केन्दीय मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने जाने का वादा भी हुआ था। दूसरा, फायदा यह बताया जा रहा है, कि मध्यप्रदेश में कोविड की दूसरी लहर के थोड़े  शांत होते ही भाजपा संगठन में हलचल धीरे धीरे दम पकड़ रही  हैं। प्रदेश अध्यक्ष  वी. डी. शर्मा की राज्य के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा से बंद कमरे में लम्बी गुफ्तगू हो चुकी है। वहीं ,पश्चिम बंगाल से अपना काम करके लौटे पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव, और राज्य में पार्टी के स्तम्भ माने जाने वाले कैलाश विजयवर्गीय प्रदेश में अपनी ज़मीन फ़िर मजबूत करने  के लिए  ज़ोरदार मेहनत  कर रहे हैं । वे ,कितने महत्वाकांक्षी, और केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह के कितने नजदीक  है , यह बात राजनीतिक गलियारों में आम है । कुछ समय पहले दमोह से उप चुनाव में मिली हार के कारण मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को जवाब देना भारी पड़ गया है। यूँ सूबे की  भाजपा राजनीति के मामा चौहान ने  चुनाव प्रचार के दौरान कांग्रेस को  जमकर ज़ोर करवाए थे, मगर सीट जब से गई है वे अंतर्ध्यान बताए जाते हैं।

भले ही मामाजी के लिए कैलाश विजयवर्गीय , नरोत्तम मिश्रा ,या किसी और से भविष्य में चुनौती मिले या न मिले ,लेकिन सिंधिया अगर पीएम नरेंद्र मोदी के मंत्रिमंडल में ले लिए जाते हैं तो  ,प्रदेश भाजपा का बड़ा संकट टल सकता है । मतलब ,शिवराज सिंह चौहान की कुर्सी फ़िलहाल ,तो बनी रहेगी। चौहान चौथी बार मुख्यमंत्री बनकर वैसे भी  रेकॉर्ड कायम कर चुके हैं। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं ,कि जब चौहान दमोह का उप चुनाव ही नहीं जितवा पाए ,तो 2024 में होने वाले विधानसभा चुनावों में उनकी वोट अपील शंकास्पद ही रहेगी। वे ,क्राउड पूलर  नेता भी नहीं माने जाते। कहा जा रहा है कि उक्त सभी पैमानों पर प्रदेश के पूर्व उद्योगमंत्री भी रहे कैलाश विजयवर्गीय अन्य सभी वरिष्ठ भाजपा नेताओं को टसल दे सकते हैं। विजयवर्गीय तेज तर्रार, बेलौस , एवं स्पष्टवादी नेता माने जाते हैं । सबसे बडी बात यह भी है कि उन्हें आरएएस  के साथ ही भाराछासं का पूरा समर्थन प्राप्त है। उनकी छवि अयोध्या प्रकरण के चलते कट्टर हिंदुत्व नेता की बन गई थी ,मग़र अब इस तरह की कोई बात नहीं बताई जाती।

माना यह भी जा रहा है , अब विजयवर्गीय के लिए पश्चिम बंगाल में करने को कुछ रह नहीं गया है । उन्होंने 2019 के आम चुनाव में तब नाम कमाया था ,जब पीएम नरेंद्र मोदी की सुनामी के चलते उक्त सूबे की कुल 42 लोकसभा सीटों में से 18 सीटें भाजपा ने झटक लीं थीं ।कहा गया था , कि इस सफलता की पटकथा कैलाश विजयवर्गीय ने ही लिखी थी । हालिया विधानसभा चुनावों के पहले उन्होंने काफी समय से  वहाँ डेरा जमाए रखा ,मग़र टीएमसी की तीसरी बार जीत ने फिलहाल ,तो स्पष्ट कर दिया है ,कि इस प्रदेश के निवासियों की सोनार बांग्ला की अंतिम परिकल्पना क्या है ।ज्योदित्यादित्य सिंधिया क़रीब 19 साल कांग्रेस में रहने के बाद भाजपा में शामिल हुए थे ।यूपीए सरकार में वे मंत्री रहे।फच्चर यह फँसा था कि इतने इंतज़ार के बाद या , तो वे  मध्यप्रदेश का मुख्यमंत्री बनना चाहते थे ,या प्रदेश इकाई के के प्रेसिडेंट ।तब की मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार कांग्रेस के तत्कालीन मुख्यमंत्री कमलनाथ ने  सत्ता ,और संगठन के दोनों  शक्ति केन्द्र अपने ही पास रखने को लेकर अड़ियल रुख अपनाए रखा ।

इस मौके को अवसर में बदलने के लिए भाजपा तैयार ही बैठी थी ,और सिंधिया के गले में आखिरकार  गृह मंत्री अमित शाह ने पीएम नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में  भाजपा का दुपट्टा डाल ही दिया।भाजपा की नब्ज़ के जानकारों का ,तो यहाँ तक कहना है कि यह हिंदुत्व वादी पार्टी भविष्य में ज्योदित्यादित्य सिंधिया में अपना भी भविष्य भी देख रही है । सिंधिया का बैकग्राउंड कुल मिलाकर हिंदू वादी ही है। उनकी दादी स्व. विजयाराजे सिंधिया की अयोध्या में प्रभु श्रीराम के मन्दिर निर्माण आंदोलन में अग्रणी भूमिका रही। जिन लोगों ने सिंधिया को संसद में कांग्रेस या भाजपा की ओर से डिबेट करते हुए सुना है ,वे तस्दीक कर सकते हैं  कि देश को एक पढ़े लिखे सभी को साथ लेकर चलने वाले नायक की  आवश्यकता है।जान लें कि ज्योदित्यादित्य सिंधिया स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के एम. बी . ए . प्रोडक्ट हैं। इंग्लिश के साथ हिंदी में भी जब वे धाराप्रवाह बोलते हैं ,तो बातें लच्छेदार नहीं होतीं,बल्कि उनके पीछे आवश्यक होम वर्क  ,और ठोस तर्क होते हैं ।लब्बोलुआब यह कि हो सकता है सिंधिया के अच्छे दिन आ रहे हों ।

नवीन जैन ,वरिष्ठ पत्रकार
 

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