मीडिया Now - विकास के विवाद में लुप्त होता लक्षद्वीप!

विकास के विवाद में लुप्त होता लक्षद्वीप!

medianow 08-06-2021 15:02:57


अमित प्रकाश सिंह / अब तेज अभियान है विकास का।देश में तकरीबन दो सौ नगर अब स्मार्ट हो चले हैं! ऐसे ही शहरों में मशहूर रहा है बनारस ! दुनिया भर में पर्यटन को बढावा देने के लिए यहां की मशहूर आकर्षक संकरी गलियां जो कभी  बाबा विश्वनाथ मंदिर के आसपास या गंगा किनारे चली जाती थीं। वे संकरी गलियां अब रही नहीं।लेकिन काम चल रहा है विकास का। इसी तरह काम जारी है दूसरे भी शहरों में विकास का।असलियत में तो पता नहीं पर  फाइल में जरूर ।अब बारी है यूनियन टेरिटरी में आने वाले शहरों की । फिर समुद्री द्वीपों में  विकास की मुहिम !  ऐसे ही शहरों में प्राचीन होते हुए भी सारी  दुनिया में मशहूर  है लक्षद्वीप समूह का । इसके विकास की असीम संभावना बताने के लिए आए नए विशेष अधिकारी। उन्होने 2020 में यह अतिरिक्त पद भार बतौर उप राज्यपाल  संभाला!

लक्षद्वीप  सारी दुनिया में अपनी हरीतिमा, स्वच्छ समुद्री जल,और जलीय वनस्पति,और विविध जैविक प्राणियों  के लिए ख्यात रहा है।यहां विश्व स्तरीय मैरीन रीसर्च सेंटर जैसी परियोजना के निर्माण  की योजना कहीं अच्छी होती। लेकिन वहां विकास के नाम पर मूर्तियों की स्थापना और विकास के उन पुराने मापदंड अपनाने की पहल हो रही है जिनसे समाज में अशांति का अंदेशा ही हमेशा बढता है। पद संभालते ही नए विशेष अधिकारी ने अपने तीन मसविदे घोषित किए।जिनसे विवाद को बल मिला।लक्षद्वीप ऐसा क्षेत्र रहा है जहां होने वाले अपराध बमुश्किल तीन फीसद हैं।लेकिन लक्षद्वीप डेवलपमेंट अथारिटी रेगुलेशन  के तहत लक्षद्वीप प्रिवेंशन आफ एंटी सोशल एक्टिविटीज रेगुलेशन (जो मशहूर है,पी ए ऐस ए,पासा या गुंडा एक्ट), एक और मसविदा आया लक्षद्वीप  अधारिटी एनिमल प्रिजर्वेंशन रेगुलेशन इससे लोगों के खाने-पीने के सबंध में नियम होंगे और फिर आया लक्षद्वीप डेवेलपमेंट पंचायत रेगुलेशन ।इसके तहत  पंचायत चुनाव में भाग लेने के काबिल वे लोग ही माने जाएंगे जिनके बच्चे दो ही हों ।इन सभी मसविदों को लक्षद्वीप  की छोटी सी जनसंख्या ने  अपने जीवन में सरकारी तौर पर दखलंदाजी माना ।

पूरे भारत ने लक्षद्वीप  के  प्रशासक के मसविदे पर अपनी आपत्ति जताई ।सात जून को द्वीप के नागरिकों ने अपना विरोध प्रदर्शन किया।लोगों ने भूख हड़ताल करके अपना विरोध जताया।दिल्ली में अरुणा राय के नेतृत्व में विभिन्न गैर सरकारी स्वयंसेवी संगठनों,सिविल सोसाइटी के लोगों ने लक्षद्वीप  की जनता के आंदोलन को अपना समर्थन दिया। जनता ने अपना विरोध जताया ।पर प्रशासक कहां सुनने वाले । लक्षद्वीप  के सबसे पुराने न्यूज पोर्टल '  द्वीप डायरी' पर भारत सरकार के डीओटी विभाग ने पाबंदी लगा दी  । वरिष्ठ पत्रकार  के बशीर कहते हैं कि उनके पोर्टल पर 23 मई को पाबंदी इसलिए लगी क्योंकि' 'हैशटैग सेव लक्षद्वीप ' के तहत वहां के लेखक, पत्रकार और दूसरे बुद्धिजीवी अपनी प्रतिक्रिया में बता रहे थे कि कैसे वे नए प्रशासक के मसविदों में यह भांप रहे हैं कि कैसे उनके खानपान,परिवार नियोजन ,भूमिकानून, और चुनाव में उनकी भागीदारी पर रोक लगाने के तरीकों को अब कानूनी तौर पर अमल में लाने की कोशिश की जा रही है। और सरकारी नाराजगी 'द्वीप डायरी' पर पाबंदी लगा कर  दिखा दी गई।

उधर केरल सरकार ने 31 मई को विधानसभा में यह प्रस्ताव पेश किया कि वह केंद्रशाषित राज्यों में सबसे छोटे राज्य लक्षद्वीप  की जनता के साथ है। लक्षद्वीप  की अधिकांश जनता मुस्लिम है ।वे बडी ही शांति से पर्यावरण की चिंता  करते हुए राज्य की हरीतिमा और जैविक, वानस्पतिक देखभाल करते हैं।वहां एक विश्वविद्यालय है जहां पढने वाले युवा अच्छे तरीके से पढाई लिखाई करते हैं।

नए मसविदों पर युवाओं में भी नाराजगी है ।वे कहते हैं कि शहर में अपने आप, नशाबंदी अपने तरीके से अमल में है।पर्यटन को बढावा देने के नाम पर यहां उसे बढावा न दिया जाए। देश के 93 पूर्व  प्रशासनिक अधिकारियों ने  प्रधानमंत्री ,केंद्रीय गृहमंत्री, केन्द्रीय पर्यावरण और वन मंत्री को भी पत्र लिख कर यह अपील की है अतिरिक्त तौर पर लक्षद्वीप  में विकास संबंधी मामलों के लिहाज  से मसविदा लाने वाले इस अधिकारी को वापस किया जाए ।लक्षद्वीप  में विकास संबंधी काम वहां की जनता से बातचीत करके हीअमल में  लाए जाएं । हालांकि  जनता की राय लेकर विकास कार्य करने का नियम  पर्यावरण विभाग ने खुद ही  इतना ढुलमुल कर दिया है कि उत्तराखंड में लगातार दो साल बडी बांध दुर्घटना हुई। लेकिन कहीं कोई बेचैनी नहीं दिखी।

केरल के सांसद और कांग्रेस के नेता राहुल गांधी ने देश के प्रधानमंत्री के नाम लिखी चिट्ठी में  लिखा है कि भारतीय समुद्र में लक्षद्वीप   एक बहुमूल्य जेवर है। इस द्वीप पर रहने वाले लोग आज दहशत में हैं क्योंकि वहां के प्रशासन द्वारा प्रचारित मानव विरोधी नीतियों के कारण आज उनका भविष्य खतरे में पड गया है। व्यावसायिक लाभ के लिए जो नई  नीतियां बनी हैं उनसे यहां के निवासियों की आजीविका,जीवनशैली,और सुरक्षा को लेकर खतरे बहुत बढ गये  हैं।उन्होने अपील की,, जनता को साथ लेकर ही विकास कार्य किए जाएं। अपने ही देश की सरकार अपने ही द्वीप समूह के लोगों पर ऊलजलूल कानूनों के तहत  कार्रवाई करे यह दुनिया भर के विभिन्न लोकतांत्रिक  देशों में कभी देखा नहीं गया। भारतीय उप महाद्वीप में लक्षद्वीप और छत्तीस और द्वीप खासे महत्वपूर्ण  द्वीप माने जाते हैं।ये हमेशा भारतीय रहे और रहेंगे।
- लेखक एक वरिष्ठ पत्रकार हैं

Comments

Subscribe

Receive updates and latest news direct from our team. Simply enter your email below :