मीडिया Now - मधुबनी हत्याकांड: बिहार की सियासत में जाति का उबाल, जानिए क्या था पूरा मामला

मधुबनी हत्याकांड: बिहार की सियासत में जाति का उबाल, जानिए क्या था पूरा मामला

medianow 06-04-2021 23:39:06


पटना। बिहार के मधुबनी ज़िले में होली के दिन 29 मार्च को बेनीपट्टी थाना के मोहम्मदपुर गांव में एक ही परिवार के पांच लोगों की निर्मम तरीके से हत्या कर दी गई। मधुबनी पुलिस के अनुसार इस हत्याकांड की वजह आपसी रंजिश है। इस केस के 35 लोगों को नामज़द किया है जिनमें से 11 को गिरफ़्तार किया जा चुका है। लेकिन केस का मुख्य नामज़द अभियुक्त अभी तक पुलिस की पकड़ से बाहर है। यह हत्याकांड  इस वक़्त बिहार की राजनीति का केंद्र में बना हुआ है। 

मंगलवार को पीड़ित परिवार से मिलने पहुँचे नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने इसे नरसंहार बताया है। उन्होंने पुलिस और प्रशासन के साथ भाजपा के स्थानीय विधायक पर भी अभियुक्तों को संरक्षण देने के आरोप लगाए हैं। वहीं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने हत्याकांड को लेकर कहा है कि घटना की जाँच कराई जा रही है और स्पीडी ट्रायल चलाकर इसकी सुनवाई होगी। उन्होंने दावा किया कि किसी भी दोषी को बख़्शा नहीं जाएगा।

स्थानीय मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक़ हत्याकांड की वजह दोनों पक्षों के बीच पुरानी रंजिश है. यह रंजिश एक मठ (मंदिर) की ज़मीन को लेकर है. इस पर मठ के महंत का क़ब्ज़ा था। पुलिस रिकॉर्ड की मानें तो पिछले साल नवंबर में भी मठ की ज़मीन पर बने पोखरे से मछली पकड़ने को लेकर दोनों पक्षों के बीच मारपीट हुई थी। वह मामला बेनीपट्टी थाने में एससी/एसटी एक्ट के तहत दर्ज़ है। उस मामले के एक अभियुक्त अभी भी जेल में बंद हैं।

मधुबनी के एसपी डॉ सत्य प्रकाश ने एक हिंदी न्यूज से बात करते हुए कहा, "अभी तक की जांच में पता चला है कि यह हत्याकांड पोखर से मछली पकड़ने को लेकर हुई मारपीट का नतीजा है। घटनास्थल से कुल पाँच बाइक, गोली के आठ खोखे, एक मोबाइल, खून लगे लोहे के दो रॉड और ख़ून लगी मिट्टी बरामद की गई है। फोरेंसिक जाँच से सब कुछ साफ़ हो जाएगा।"

क्या कहते हैं पीड़ित?
मधुबनी हत्याकांड के पीडितों के परिवार की तस्वीरें और वीडियो इस वक़्त सोशल मीडिया पर वायरल हैं। उनमें तीन सहोदर भाइयों समेत परिवार के पाँच सदस्यों की हत्या से समूचा परिवार ग़मगीन है। पीडितों के परिवार के मुखिया सुरेंद सिंह ने फ़ोन पर बताया, "मेरे तीन बेटों को गोलियों से भून दिया गया। एक बेटा ज़िंदा इसलिए बच गया क्योंकि वह जेल में है। अगर मैं भी वहां रहता तो वे लोग मुझे भी मार देते। वे लोग पूरी तैयारी के साथ यहां आए थे।"

मठ की ज़मीन और पोखरे से मछली मारने के विवाद पर सुरेंद्र सिंह कहते हैं, "मठ के लिए वह जमीन हमारे पुरखों ने ही दी थी। हमारे परिवार के लोग ही हमेशा से मठ के महंत रहे हैं। पिछले साल जब उन लोगों (अभियुक्तों) ने पोखरे से जबरन मछली पकड़नी चाही तो हमने उन्हें रोका। उन्होंने मेरे ही बड़े बेटे के पैर काट दिए और उल्टा उसी के ख़िलाफ़ एससी/एसटी एक्ट के तहत मुक़दमा दर्ज कराकर उसे जेल भिजवा दिया।" पीडितों के परिजनों का आरोप है कि स्थानीय पुलिस और प्रशासन अभियुक्तों को हमेशा से संरक्षण देता आया है क्योंकि उनकी राजनीतिक पैठ बहुत ज़्यादा है।

सुरेंद्र सिंह कहते हैं, "आप ही सोचिए न कि मेरे ही बेटे का पैर कटा और उसे ही जेल में डाल दिया गया! इस बार घटना के बाद दर्जनों बार पुलिस को कॉल किया गया लेकिन पुलिस चार घंटे बाद आई और तब तक सारे अभियुक्त भाग चुके थे। अब पुलिस कह रही है कि मुख्य अभियुक्त फ़रार है लेकिन हमारी जानकारी में वह खुलेआम घूम रहा है।"

कौन है अभियुक्त?
वैसे तो इस हत्याकांड में 35 अभियुक्तों के नाम पुलिस की केस डायरी में दर्ज हैं, लेकिन इनमें सबसे ख़ास नाम प्रवीण झा और नवीन झा हैं। इन दोनों को मुख्य अभियुक्त बनाया गया है। प्रवीण झा का फ़ेसबुक प्रोफ़ाइल बताता है कि वे आगामी पंचायत चुनाव में मुखिया का चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे थे। वे स्वयं को भावी मुखिया बताते हैं। स्थानीय पत्रकार विजय कुमार कहते हैं, "प्रवीण झा बजरंग दल के ज़िलाध्यक्ष हैं और 'रावण सेना' नाम से एक स्थानीय संगठन भी चलाते हैं। यह संगठन कथित रूप से ब्राह्मणों के हित की बात करता है। वे राजनीतिक रूप से काफ़ी सक्रिय हैं।"

बहरहाल, दोनों मुख्य अभियुक्त फ़रार हैं। मधुबनी के पुलिस कप्तान डॉ सत्य प्रकाश ने बताया कि रविवार और सोमवार को मुख्य अभियुक्तों की कुर्की ज़ब्ती की जा चुकी है। वहीं इस हत्याकांड के अन्य अभियुक्तों मुकेश साफ़ी, चंदन झा, अंकित झा, विनीत झा, भोला सिंह, मुन्ना सिंह, कौशिक सिंह और शिवेश्वर भारती उर्फ़ फूलबाबू के घर की कुर्की ज़ब्ती की कार्रवाई की जा रही है।

जाति पर राजनीति
मधुबनी हत्याकांड में सबसे अधिक चर्चा पीड़ितों और अभियुक्तों की जाति को लेकर हो रही है। कहा जा रहा है कि दोनों पक्षों की लड़ाई जातिगत वर्चस्व की लड़ाई भी थी। पीड़ितों का परिवार राजपूत जाति का है जबकि ज्यादातर अभियुक्त ब्राह्मण जाति के हैं।

स्थानीय पत्रकार विजय कहते हैं, "पीड़ितों के घर संवेदना प्रकट करने प्रदेश भर के राजपूत नेता जुट रहे हैं। चाहे वे सत्ता पक्ष के हों या विपक्ष के। स्थानीय स्तर पर इसे ब्राह्मणों और राजपूतों की लड़ाई बताया जा रहा है। दोनों पक्षों के बीच मठ का महंत बनने को लेकर कई पीढ़ियों से लड़ाई हो रही है।" मधुबनी हत्याकांड के बाद अखिल भारतीय करणी सेना भी काफ़ी सक्रिय है। करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुखदेव सिंह गोगामेड़ी ने इस मामले पर एक वीडियो संदेश जारी किया है। इसमें उन्होंने कहा है कि यदि सात दिनों के भीतर अभियुक्तों की गिरफ़्तारी नहीं हुई तो उनका संगठन इसे लेकर बड़ा आंदोलन करेगा।

क्या कहती है पुलिस?
हालांकि, पुलिस प्रशासन फ़िलहाल इसे जातिगत लड़ाई मानने से इनकार कर रहा है। दरभंगा रेंज के आईजी अजिताभ कुमार ने महमदपुर गांव पहुँचकर हत्याकांड की जाँच की थी। इस बारे में वे कहते हैं, "यह कांड दो जाति का मामला नहीं बल्कि दो गुटों के आपसी रंजिश का है। पुलिस के पास जो सबूत हैं, उसके आधार पर पुलिस अभियुक्तों को गिरफ़्तार करने के लिए छापेमारी कर रही है। आईटी सेल का भी सहयोग लिया जा रहा है।"

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