मीडिया Now - वैक्सीन लगवाने के लिए विभाग, अधिकारी व कम्पनियां लोगों को प्रताड़ित और बाध्य कर रही हैं

वैक्सीन लगवाने के लिए विभाग, अधिकारी व कम्पनियां लोगों को प्रताड़ित और बाध्य कर रही हैं

medianow 23-06-2021 20:50:45


लखनऊ। कोविड राष्ट्रीय राष्ट्रवादी पार्टी के राष्ट्रीय संगठन अध्यक्ष सत्येन्द्र कुमार पाण्डेय नें स्वास्थ मंत्री को पार्टी की और से पत्र लिखा कि कोविड महामारी के विषय में निश्चित रूप से सरकार का उद्देश्य और आशय होगा कि देश के हर नागरिक में कोविड एंटीबॉडी हो जाये जिससे कोविड का खतरा ख़त्म किया जा सके | कोविड वेक्सिन का उद्देश्य व आशय है कि भारत में कोई भी बिना “एंटीबोडी” के न रहे जिससे कोविड से बचा जा सके | ICMR का कहना है कि वेक्सिन से शरीर में गुड लेविल की “एंटीबोडी” बनती है, उसके बाद लगभग 80% लोगों को कोरोना से लड़ने लायक इम्युनिटी बनता है और लगभग 20% को इम्युनिटी नहीं बनती है पर एंटीबोडी बनती है |

05 जून 2021, लखनऊ, राष्ट्रीय सहारा समाचार पत्र के माध्यम से जानकारी हुई कि केजीएमयू के सर्वे में बताया गया कि वेक्सिनेशन के बाद सिर्फ 7% में बनी एंटीबॉडी | बिना एंटीबोडी टेस्ट किये वेक्सिन लगाने से वेक्सिनेशन तो हो जायेगा पर न सुरक्षा हो पायेगी क्यूंकि शत प्रतिशत को एंटीबोडी नहीं बनती और न ही बगैर जरुरत वेक्सिन लेने से रोका जा सकेगा जो मानवता के अधिकार को वंचित करने जैसा है |

जबकि हमारी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री प्रताप चन्द्र नें ये जानते हुए कि कंपनी नें अपनी वेबसाईट पर स्पष्ट लिखा है कि सीरम कोविड शील्ड वेक्सिन में अजन्में बच्चे की किडनी (HEK) का सीरम जो GMOs बेस्ड है, ये भी जानते हुए कि इसका साइड इफेक्ट न जाने कितना खतरनाक होगा, फिर भी कोविड से बचनें के लिए शाकाहारी होते हुए भी लगवाया, पर इसके बावजूद भी गुड लेविल की एंटीबोडी नहीं बनी, रिपोर्ट निगेटिव आई जो वेक्सिन पर संदेह पैदा करता है |

देश में अधिकारिक रूप से RT-PCR जांच से मालूम हुआ लगभग 3 करोण लोग कोविड से संक्रमित हुए और अधिकतर कोविड को हराकर ठीक हुए और अब उनमें गुड लेविल की प्राकृतिक कोविड एंटीबोडी बन चुकी है इसलिए उन्हें बाहर से इंजेक्शन द्वारा कोविड वेक्सिन लगाने की कोई आवश्यता ही नहीं क्यूंकि उनमें एंटीबोडी बन चुकी है | हालाँकि गावों में जहाँ RT-PCR जांच नहीं हो पाती थी, ऐसे में अनुमान है कि लगभग 7 करोण लोग पोजिटिव हुए और उनमें एंटीबोडी बन चुकी है |

समाचार पत्र अमर उजाला, लखनऊ के 22 जून 2021 संकरण में प्रमुखता से छपा केजीएमयू में किये गए अध्यन में 7 % लोग ऐसे हैं जिनमें बिना संक्रमण और बिना टीकाकरण के एंटीबॉडी पाई गई है | 

11 जून 2021, नई दिल्ली (भाषा) राष्ट्रीय सहारा समाचार पत्र के माध्यम से जानकारी हुई है कि AIIMS के  डाक्टर कोविड-19 सम्बन्धी राष्ट्रीय कार्यबल समूह, पब्लिक हेल्थ एसोसियेशन, इन्डियन एसोसिअशन ऑफ़ एपिडमोलाजिस्ट और इंडियन एसोसियेशन ऑफ़ प्रिवेंटिव एंड सोशल मेडिसिन के विशेषज्ञों नें अपनी रिपोर्ट में कहा है देश में महामारी की मौजूदा स्थिति मांग करती है कि इस चरण में सभी आयु समूहों के लिए टीकाकरण को खोलनें की जगह हमें महामारी सम्बन्धी आंकड़ों से खुद को निर्देशित करना चाहिए | रिपोर्ट प्रधानमंत्री को सौंपी गई है | इसमें यह रेखांकित किया गया है कि कम उम्र के वयस्कों और बच्चों का टीकाकरण साक्ष्य समर्थित नहीं है और यह किफायती नहीं होगा | रिपोर्ट में कहा गया है कि अनियोजित टीकाकरण से वायरस के उत्परिवर्तित स्वरूपों को बढ़ावा मिल सकता है | समूह नें सुझाव दिया है कि जो लोग कोरोना वायरस संक्रमण की चपेट में आ चुके हैं, उनके टीकाकरण की आवश्यकता नहीं है |

विदित हो, कि कई लोग जो पिछले वर्ष कोविड से संक्रमित होकर ठीक हो गये, उनमे से एक मानवाधिकार कार्यकर्ता संगीता सिंह भी 05 अगस्त 2020 को कोविड से संक्रमित हुई, ईलाज के बाद ठीक हो गई, आज १० महीने बाद भी कोविड एंटीबॉडी टेस्ट में बिना वेक्सिन के प्राकृतिक रूप से भरपूर एंटीबोडी और इम्युनिटी मौजूद है | मैं और मेरे कई साथी भी कोविड से संक्रमित होकर ठीक हो गये और कोविड एंटीबॉडी टेस्ट में प्राकृतिक रूप से भरपूर एंटीबोडी मौजूद है 

जो लोग कोविड से संक्रमित नहीं हुए, उनके लिए कोविड एंटीबोडी बनाने का मजबूरन एक ही उपाय है कोविड वेक्सिन लगवाना, जिन्हें लगवाना चाहिए, यानि जरुरतमंदों को लगाना प्राथमिक होना चाहिए, लेकिन वेक्सिन कंपनी और सरकार दोनों ही बताते हैं कि शत प्रतिशत लोगों में कोविड से बचनें लायक इम्युनिटी नहीं बनेगी यानि कुछ लोग कोविड वेक्सिन लगने के बाद भी खतरे में रहेंगे |

ICMR की गाइडलाइन है कि “कोविड वेक्सिन की पहली डोज़ जिस ब्रांड की लगाईं है, उसी ब्रांड की दूसरी डोज़ भी लेनी होगी, बदलना नहीं है”....अबतक कोविड वेक्सिन कंपनियों नें ऐसी कोई शोध रिपोर्ट नहीं पेश की है जिसमें कोविड बीमारी से संक्रमित होकर ठीक होने वालों को कोविड वेक्सिन लगाने की क्यूँ जरुरत है जबकि गुड लेविल की “एंटीबोडी” उनमें बन चुकी है, और न ही सरकार या कंपनियों नें ये बताया कि उनपर वेक्सिन लगाने से क्या, कितना और कैसा साइड इफेक्ट होगा |   

जबकि हमारी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री प्रताप चन्द्र नें ये जानते हुए कि कंपनी नें अपनी वेबसाईट पर स्पष्ट लिखा है कि सीरम कोविड शील्ड वेक्सिन में अजन्में बच्चे की किडनी (HEK) का सीरम जो GMOs बेस्ड है, ये भी जानते हुए कि इसका साइड इफेक्ट न जाने कितना खतरनाक होगा, फिर भी कोविड से बचनें के लिए शाकाहारी होते हुए भी लगवाया, पर इसके बावजूद भी गुड लेविल की एंटीबोडी नहीं बनी, रिपोर्ट निगेटिव आई जो वेक्सिन पर संदेह पैदा करता है (जाँच रिपोर्ट संलग्न) |

वेक्सिन की अनिवार्यता पर सरकार के स्पष्ट आदेश अबतक न जारी होने के कारण उहपुह की स्थिति बनी हुई है | तमाम सरकारी विभाग, प्राइवेट कम्पनियाँ, स्कूल, आदि अपने कर्मचारियों, इन्स्युरेंस उपभोक्ताओं को कोविड वेक्सिन लगवानें की बाध्यता कर रही हैं, बिना वेक्सिन के रेल यात्रा नहीं होने देने का भी समाचार पत्रों नें खबर दिया, यहाँ तक कि चंबा के खंड विकास अधिकार नें आदेश निकाला कि “अगर वेक्सिन नहीं लगवाई तो मनरेगा में नहीं मिलेगा काम”, वाराणसी के जिलाधिकार नें आदेश किया कि “टीका लगवाने वाले ही अनलॉक में खोल सकेंगे दुकान, शत प्रतिशत टीकाकरण कराने का निर्देश दिया, कहा कि जबतक समस्त सरकारी कर्मचारियों का टीकाकरण नहीं हो जाता है, तबतक उनके विभागाध्यक्ष जून की सैलरी जारी नहीं करेंगे | टीकाकरण नहीं तो ऑटो और रिक्शा चालकों का चालन होगा |” इसी तरह सड़क परिवहन के लखनऊ के क्षेत्रीय प्रबंधक नें “कर्मियों द्वारा कोविड-19 का टीका न लगवाए जानें की स्थिति में कार्य पर न लेनें एवं आगामी माह का वेतन आहरित न किये जानें जानें के सम्बन्ध में” आदेश जारी किया (संलग्न) | उत्तर प्रदेश में कर्मचारियों पर एस्मा कानून लागू होने के कारण कोई कर्मचारी इस गैरजरूरी आदेश की अवहेलना न करते हुए प्रताड़ना सहनें को बाध्य है | आगे हवाई जहाज, माल, बैंक, इत्यादि जगहों पे नहीं जा सकेंगे | और भी आगे बाध्यता की जा सकती है | ये मानवता के अधिकार का उलंघन है |

उक्त विषय पर मैंने दिनांक 08/06/2021 और 19/06/2021  को भी पत्र लिखा था परन्तु अबतक किसी कार्यवाई की सूचना प्राप्त नहीं हुई है |

मांग :-
१-    वेक्सिन की अनिवार्यता पर तत्काल सरकार स्पष्ट आदेश जारी करे जिससे कोई संस्था नागरिकों का शोषण या भेदभाव न कर सके |

२-    जिनमें गुड लेविल की “एंटीबोडी” बन चुकी है उन्हें कम से कम तबतक, जबतक उन्हें वेक्सिन की जरुरत नहीं पड़ती है या जबतक कम्पनियाँ ये शोध नहीं पेश कर देती हैं कि कोविड वेक्सिन लगाने की इन्हें क्यूँ जरुरत है, कितना और कैसा साइड इफेक्ट होगा, तबतक एंटीबोडी की रिपोर्ट देने पर कोविड वेक्सिन लगवानें की बाध्यता समाप्त किया |

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