मीडिया Now - टीम इंडिया ने दिल तोड़ दिया

टीम इंडिया ने दिल तोड़ दिया

medianow 24-06-2021 14:55:42


वीर विनोद छाबड़ा / मैंने एक कमेंट पढ़ा, न्यूज़ीलैंड ने कप्तान विराट कोहली और टीम इंडिया के सपनों के चकनाचूर कर दिया है. मैं इसके उल्ट कुछ कहना चाहूंगा - विराट कोहली और टीम इंडिया ने करोड़ों भारतीय क्रिकेट प्रेमियों का दिल चकनाचूर कर दिया. बहुत अच्छा मौका था पहले वर्ल्ड टेस्ट चैंपियन बनने का. लेकिन ये सपना पहले तो बारिश ने धोया और फिर पहली पारी में टीम इंडिया के मामूली 217 के स्कोर सिमटते ही पता चल गया था कि भारतीय वीरों के बस में नहीं है वेट पिच और वेदर में खेलना. हालांकि तनिक उम्मीद तब बनी थी जब जवाब में न्यूज़ीलैंड के 160 प्लस पर छह विकेट गिर गए थे लेकिन उनके टेल एंडर्स ने 32 रन की लीड लेकर पलड़ा अपनी तरफ झुका लिया. दूसरी पारी में इंडिया महज़ 170 पर सिमट गयी. उसके बाद न्यूज़ीलैंड के लिए जीत की रोड पक्की हो गयी. 

दरअसल, ये तो होना ही था. अब हमारे पास कोई घायल शेर कपिल देव तो था नहीं जिसने ज़ख़्मी होने के बावजूद 1981 के मेलबोर्न टेस्ट में ऑस्ट्रेलिया को 143 के जीत के टारगेट तक पहुँचने ही नहीं दिया, महज़ 83 रन पर ढेर कर दिया. मित्रों ये वही टेस्ट था जिसमें कप्तान सुनील गावस्कर खुद को गलत आउट दिए जाने पर नाखुश होकर वॉकओवर देने तक को तैयार हो गए थे. कुछ समझदारों ने अगर दखल न दिया होता तो मैच हाथ से गया था. ख़ैर कपिल जैसा जज़्बा न बुमरा पैदा कर पाएंगे और शमी और न इशांत शर्मा. 

अब कोई कोहली से पूछे कि जब न्यूज़ीलैंड के कप्तान पांच पेसर लेकर खेल रहे हैं तो आप तीन पेसर और दो स्पिनर लेकर क्यों उतरे? सभी एक्सपर्ट्स का यही कथन था कि चौथे पेसर के रूप में भुवी को उतारना चाहिए था जो वेट कंडीशंस में गेंद मूव कराने के एक्सपर्ट हैं. लेकिन वो बेचारा वेटिंग बेंच पर बैठा रह गया. सबसे बड़ी परेशानी तो टीम इंडिया के टॉप आर्डर न क्रिएट दी. न पहली इनिंग में चले और दूसरी में. एक भी बैट्समैन 50 तक नहीं पहुँच पाया. 
गलतियां तो बहुत हुई हैं कहाँ तक गिनाएं. लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि हम अपनी गलतियां गिनाने के चक्कर में न्यूज़ीलैंड की जीत को श्रेय देने से वंचित कर दें. वो बहुत अच्छा खेले और पूरे हार्ट आउट यानी जी जान से खेले. हफ्ते भर पहले इंग्लैंड से टेस्ट श्रंखला जीतने के कारण वो सब बहुत लय में भी थे. इस लिहाज़ से उनका पलड़ा शुरू से बहुत भारी था. और टीम इंडिया ने एक प्रैक्टिस मैच भी नहीं खेला था. ऐसी सूरत में चालाक दुश्मन को सामने वाले बेपरवाह दुश्मन का टेंटुआ पूरी तरह दबा लेना चाहिए और तीस लाख की आबादी वाले न्यूज़ीलैंड ने वही किया. अपने देश की आबादी के बारे में क्या कहा जाए? यहाँ टीवी चैनलों पर मेज़ पर मुक्का मार मार कर बताया जाता है कि 125 करोड़ भारतीय विपक्ष से जानना चाहते हैं. 

बहरहाल, कीवी ने बहुत क़ायदे आठ विकेट से हराया और ये बहुत बड़ी जीत है. खेल में हार-जीत तो होती ही रहती है. आज हम हारे हैं कल जीतेंगे. शायद इसीलिए सुनील गावस्कर ने सुझाव दिया था कि वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप बेस्ट ऑफ़ थ्री होनी चाहिए थी. बहरहाल, आगे और लड़ाई है. टीम इंडिया को आगे इंग्लैंड के विरुद्ध पांच टेस्ट की सीरीज़ खेलनी है. और पनघट की राह कठिन है. मगर क्रिकेट का अलिखित नियम है, कल क्या होगा कोई नहीं जानता. 
- लेखक एक वरिष्ठ पत्रकार हैं

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