मीडिया Now - खबर के अन्दर की खबर

खबर के अन्दर की खबर

medianow 24-06-2021 21:05:59


राकेश श्रीवास्तव / भारत सरकार, वित्त मंत्री,ईडी और डीआरटी द्वारा विजय माल्या, नीरव मोदी और मेहुल चोक्सी से ₹9000 करोड़ की वसूली निसंदेह प्रशंसनीय है। बताया जा रहा है कि इससे इन खातों पर बकाया 40 प्रतिशत राशि वसूल ली जाएगी और कुल बकाया 22585.83 करोड़ के 80 प्रतिशत की चल अचल संपत्ति बंधक है।  23 जून 2021 को विजय माल्या की कंपनी यूनाइटेड ब्रेवरीज लिमिटेड (यूबील)के रुपए 5824.50 करोड़ के शेयर बेचे गये हैं और 25 तारीख को 800 करोड़ रुपए के और शेयर बेच कर 6624 करोड़ों रुपए की वसूली हो जाएगी।पहले भी माल्या के शेयरों की बिक्री से रू 1357 करोड़ वसूले जा चुके हैं तथा रुपए 5646. 54करोड़ की संपत्ति भी ज़ब्त की जा चुकी है।विजय माल्या के ऊपर अनुमानित लगभग ₹9000 करोड़ की देनदारी के विरुद्ध ₹13000 करोड़ की चल अचल संपत्तियां अटैच/बिक्री की जा चुकी हैंl


नीरव मोदी और मेहुल चोक्सी की लगभग ₹13000 की देनदारी हैं।इन दोनों की लगभग 5000 करोड़ की संपत्ति जिसमें शेयर,ज्वेलरी और रियल स्टेट शामिल हैं,बंधक है।ज्वेलरी की वास्तविक कीमत अभी सामने नहीं आई है। बड़े आश्चर्य की बात है कि समाचार पत्र यहां तक की आर्थिक जगत के अखबार भी इस बात को बिना विश्लेषण के ही प्रकाशित कर रहे है और सत्य सामने नहीं ला रहे हैं। 

इस खबर के अन्दर की खबर है 
1)बैंक अकाउंटिंग की दृष्टि से यह सभी खाते बिल्कुल अलग अलग हैं।विजय माल्या का ऋण नीरव मोदी व मेहुल चोक्सी के ऋण से अलग है। 
2)इन प्रकरणों मे अलग अलग चल अचल सम्पत्तियां बंधक हैं।
3)एक की रिकवरी राशि दूसरे में कदापि नहीं डाली जा सकती है। 
4)यदि किसी डिफाल्टर की सभी संपत्तियों के निस्तारण से मिली कुल धनराशि उसकी कुल देनदारियों से अधिक है तो अतिरिक्त राशि ऋणी को वापस करनी होगी। 

प्रश्न उठता है कि इन खातों की वसूली की राशि एक साथ दिखाने का औचित्य क्या है?अखबारों मे दिखाये जा रहे आंकड़ों से लगता है कि इन सभी खातों मे समान रूप से वसूली हो रही है।विजय माल्या से वसूली की राशि देखने पर नीरव मोदी और मेहुल चोक्सी के विषय में स्थिति स्पष्ट होती है।पब्लिक डोमेन मे उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार माल्या से 7157 करोड़ रुपये वसूले जा चुके हैं तथा 24 जून को शेयर बेच कर रू 800 करोड़ और वसूले जायेंगे।

दूसरी तरफ़ नीरव के मामले में यह राशि रू 1060 करोड़ ही है जो लगभग 10 प्रतिशत है। यह 40 प्रतिशत वसूली का दावा भ्रम की स्थिति पैदा करने वाला है। यह आंकड़े गुमराह करने वाले हैं।वित्त मंत्री को अगर ऐसे ही आंकड़े देने हैं तो जो और भगोड़े हैं उनके ऋण को भी जोड़कर जनता के सामने सही स्थिति रखें।देश अपेक्षा करता है कि जिम्मेदार लोग देश के सामने सही स्थिति रखें।इन तीनों के बाद भी किस तरह डिफाल्टर देश छोड़कर भाग जाते हैं यह किसी से छुपा नहीं है। कम से कम विश्वसनीयता तो बनाये रखिए। इस तरह आंकड़ों का प्रस्तुतिकरण न करें और सही स्थिति से अवगत करायें। 

  

Comments

Subscribe

Receive updates and latest news direct from our team. Simply enter your email below :