मीडिया Now - सराहनीय कदम: उप मुख्यमंत्री व लविवि कुलपति ने कोरोना से अनाथ छात्रा को लिया गोद

सराहनीय कदम: उप मुख्यमंत्री व लविवि कुलपति ने कोरोना से अनाथ छात्रा को लिया गोद

medianow 25-06-2021 22:18:14


लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय ने एक सराहनीय कदम उठाया है। विश्वविद्यालय परिवार ने ऐसे 47 छात्रों की सहायता के लिए आगे आया है, जिन्होंने कोरोना महामारी के कारण माता अथवा पिता या दोनों को ही खोया हैं। उनकी पढ़ाई से लेकर सर्वांगीण विकास तक पूरी मदद करेंगे। ऐसे छात्रों को विश्वविद्यालय परिवार के लोगों ने गोद लिया। स्वयं उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा व कुलपति प्रो. आलोक राय ने भी जिम्मेदारी ली।

इसी संदर्भ में कुलपति प्रो. आलोक कुमार राय की प्रेरणा से विश्वविद्यालय की छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रो. पूनम टंडन ने 19 जून 2021 को विश्वविद्यालय के सभी अध्यापकों, पूर्व अध्यापकों, प्रशासनिक अधिकारियों से एक पत्र के जरिए अपील की कि वे कोरोना महामारी के चलते अपने माता या पिता या दोनों को खोने वाले विश्वविद्यालय के छात्रों की जिम्मेदारी लेने के लिए आगे बढ़े जो अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं। मात्र एक हफ्ते के अंदर सभी 47 छात्रों की जिम्मेदारी विश्वविद्यालय के शिक्षकों, पूर्व शिक्षकों और प्रशासनिक अधिकारियों ने ले ली है।

इन छात्रों को गोद लेने वालों में स्वयं प्रदेश के उपमुख्यमंत्री और लखनऊ विश्वविद्यालय के वाणिज्य विभाग के प्रो. दिनेश शर्मा जिन्होंने एम कॉम की छात्रा सुनिधि श्रीवास्तव और विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आलोक कुमार राय ने बीबीए की छात्रा दीक्षा अग्रवाल को गोद लिया। कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने यह निर्देशित किया कि इन छात्रों की न सिर्फ आर्थिक ज़िम्मेदारी उठाई जाय बल्कि उनके सर्वांगीण व समेकित विकास में अपना योगदान किया जाय।

विश्वविद्यालय के कुल 39 शिक्षक, छह पूर्व शिक्षक और तीन प्रशासनिक अधिकारियों ने छात्रों की जिम्मेदारी उठाई है। लाभान्वित छात्रों में से एक छात्रा ज्योति यादव है, ने इस महामारी में अपने पिता को खोया। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय के प्रोफेसर ने उन्हें ईमेल के जरिए संपर्क किया और उनके दुख में भागीदार होते हुए उन्हें सभी प्रकार के सहायता व सहयोग देने का वादा किया। ज्योति ने सोशल मीडिया पर उन्हें धन्यवाद देते हुए यह कहा कि वो और उसका पूरा परिवार विश्वविद्यालय परिवार का आभारी है क्योंकि उनकी मुश्किल समय में विश्वविद्यालय ने उनका हाथ नहीं छोड़ा।

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