मीडिया Now - निष्पक्ष पंचायत चुनाव की तैयारी मुकम्मल: एएसपी

निष्पक्ष पंचायत चुनाव की तैयारी मुकम्मल: एएसपी

medianow 08-04-2021 00:16:49


रोका जाएगा दोहरी नागरिकता वालों का प्रवेश
(नेपाल सीमा से यशोदा श्रीवास्तव) :
त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर सरकार और जिलों का प्रशासन मुस्तैद है। नेपाल सीमा के जिलों में पंचायत चुनाव को लेकर खास सतर्कता बरते जाने का निर्देश है। सिद्धार्थ नगर जिला भी नेपाल सीमा पर स्थित है। यूपी में सात ऐसे जिले हैं जो नेपाल सीमा पर है। ये हैं बलरामपुर, गोंडा, श्रावस्ती, सिद्धार्थ नगर, महराजगंज, बहराइच तथा खीरीलखीमपुर। भारत नेपाल सीमा के खुला होने के नाते यहां आतंकी और आपराधिक घटनाओं की संभावनाएं बनी रहती है। पिछले कुछ सालों से नेपाल बार्डर की सुरक्षा चाक चौबंद हुई है। आपराधिक घटनाएं तो अपनी जगह हैं, दोहरी नागरिकता नेपाल सीमा की बड़ी समस्या है। अकेले सिद्धार्थ नगर जिले को स्पर्श कर रही करीब 60 किमी की नेपाल सीमा के कसबे व गांवों में करीब 50 हजार से अधिक ऐसे नागरिक हैं जिनकी भारत और नेपाल दोनों देशों की नागरिकता है।

ऐसे नागरिक दोनों देशों में चल रही सरकारी सुविधाओं का लाभ उठाते ही हैं, चुनाव में भी ये बढ़चढक़र हिस्सा लेने में कामयाब हो जाते हैं। पंचायत चुनाव में तो तमाम ऐसे सीमायी क्षेत्र हैं जहां ये निर्णायक भूमिका में हैं। इस चुनाव में इनके प्रवेश को रोकने की रणनीति बनी है। शांति पूर्वक पंचायत चुनाव की तैयारी भी मुकम्मल है। नेपाल सीमा के जिलों में दरअसल आपराधिक गतिविधियों के अलावा पुलिस की सबसे बड़ी चुनौती दोहरी नागरिकता वालों को मतदान से रोकना होता है। तमाम बूथों और क्षेत्रों में इनके पहुंच जाने से फर्जी वोटिंग को लेकर आरोप प्रत्यारोप पर ऐसी बहस होती है कि तनाव जैसी स्थित बन जाती है। यह स्थिति पैदा ही न हो इसके लिए सिद्धार्थ नगर की पुलिस ने खास रणनीति तैयार की है।

इस रणनीति के पीछे एडिशनल एसपी सुरेश चंद्र रावत का दिमाग है। बता दें कि आज जिस मुख्तार अंसारी के खौफ की चर्चा जोरों पर है, उसके जिला मऊ में इन्होंने विधानसभा चुनाव की ऐसी रणनीति बनाई थी कि एक नहीं दो दो जगह से चुनाव लड़े मुख्तार अंसारी की चुनाव में विघ्न डालने की कोशिश कामयाब नहीं हो पाई। यह 2012 का चुनाव था।मुख्तार अंसारी दो जगह से चुनाव लड़ा था।घोसी और मऊ से।घोसी से उसे हार मिली थी जबकि मऊ से जीता था। सुरेश चंद्र रावत तब मऊ जिले के घोसी सर्किल के सीओ थे।ऐन पंचायत चुनाव के वक्त बतौर एएसपी जिले में आए सुरेश चंद्र रावत ने नेपाल सीमा सहित जिले की भौगोलिक नक्शे का अध्ययन कर लिया है। इतना ही नहीं यहां किस कटेगरी के अपराध और अपराधी हैं, यह भी वे बखूबी समझ लिए हैं। साफ कहते हैं कि यहां 90 प्रतिशत लोग अपने काम से काम रखने वाले लोग हैं।मात्र 10 प्रतिशत ऐसे हैं जिन्हें विघ्नकारी तत्व कह सकते हैं। नेपाल की खुली सीमा को छोड़ बाकी कहीं भी चिन्हित अपराध स्थल नहीं है। एएसपी रावत के काम करने का तरीका जरा हटकर है।पूरी कोशिश करते हैं कि छोटे मोटे अपराध थाना स्तर से ही निपट जाय।वे मामूली घटनाओं पर लोगों के कचहरी का चक्कर लगाने के पक्ष में नहीं रहते। थानों के थानेदारों से कहा गया है कि छोटी मोटी घटनाओं को सुलह समझौते से समाप्त करने की कोशिश करें लेकिन जबर्दस्ती नहीं। दोनों पक्षों की रजामंदी पर ही।  अबतक तमाम ऐसे मामले आए जिसमें ज्यादातर मामलों में दोनों पक्षों में सुलह हुआ।

उनके रणनीति के अनुसार
पंचायत चुनाव को सकुशल संपन्न कराने के लिए ऐसी पुलिस टीम तैयार की गई है जो किसी भी बूथ या कहीं भी, विवाद की सूचना पर 5--7 मिनट में पहुंच जाय। सुरक्षा के सारे इंतजाम से लैश पेट्रोलिंग की यह टीम जिले भर में चक्रमण करती हुई नजर आएगी। नेपाल सीमा के दोहरे मतदाताओं से निपटने की तैयारी के बाबत उन्होंने बताया कि अभी कोविड के कारण नेपाल बार्डर पर दो तरफा सख्ती है ही। ऐसे में बहुत कुछ करने की जरूरत नहीं है। मतदान के 24 घंटे पहले बार्डर को सील करना होगा और झाड़झंखाड़ वाले पगडण्डी रास्तों पर पेट्रोलिंग बढ़ा देनी है। इस तरह हम दोहरी मतदाताओं को नेपाल के रास्ते बूथ तक पहुंचने से रोक सकते हैं। लेकिन यदि कोई वोटर भारतीय भूक्षेत्र में रह रहा हो,भले ही वह नेपाल का भी वोटर हो और उसके पास भारतीय वोटरकार्ड है और उसका वोटरलिस्ट में नाम है तो नियमतः उसे वोट डालने से नहीं रोका जा सकता।हां आपत्ति करने वाला चाहे तो सबूतों के साथ न्यायालय जा सकता है।
एएसपी रावत ने कहा कि फिलहाल उनका सारा जोर निष्पक्ष, निडर और शांति पूर्वक पंचायत चुनाव संपन्न कराना है। इसमें अपने अपने स्तर पर सबसे सहयोग की अपेक्षा है।

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