मीडिया Now - यूपी: जांच में 197 शिक्षक मिले फर्जी, कई अभी भी संदिग्ध, ऐसे खुली पोल

यूपी: जांच में 197 शिक्षक मिले फर्जी, कई अभी भी संदिग्ध, ऐसे खुली पोल

medianow 03-07-2021 18:23:48


हरदोई। जिले में बेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षक भर्ती में फर्जीवाड़े की जड़े काफी गहरी हैं। कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों में फर्जी वाड़े से नौकरी करने वाली अनामिका प्रकरण ने तो विभाग को हिलाकर ही रख दिया है। हालांकि जिले में ऐसा मामला तो पकड़ में नहीं आया, लेकिन पूर्व में हुई शिक्षक भर्ती में कई खेल पकड़ में आए थे। विभागीय जांच में जिले में 197 फर्जी वाड़े के प्रकरण सामने आ चुके हैं। जिन पर विभाग की ओर से कार्रवाई की जा चुकी है। मगर अभी भी जिले में कई शिक्षक संदिग्ध है। जिनकी जांच चल रही है। जिले में कुछ प्रकरणों की एसआईटी भी जांच कर रही है। जिले में विशिष्ट बीटीसी के तहत वर्ष 2004 में बीएड डिग्री धारकों को बेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षक के पद पर तैनाती की शुरूआत की गई थी।

विशिष्ट बीटीसी की नियुक्ति के साथ ही जिले में फर्जीवाड़े की नींव पड़ गई थी। प्रथम विशिष्ट बीटीसी के वैच की नियुक्ति के दौरान 30 शिक्षक फर्जी मिले थे। जिसमें सभी को बर्खास्त कर दिया गया था। उनमें से 24 के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराई गई थी। उसके बाद से हर भर्ती में फर्जीवाड़े का सिलसिला जारी रहा। वर्ष 2007 में हुई भर्ती में सात फर्जीवाड़े के प्रकारण सामने आए। इसके बाद 2010 में 13 फर्जी शिक्षक मिले। वर्ष 2014 में दस हजार भर्ती में 66 शिक्षक फर्जी पाएं गए। जिनके बर्खास्तगी की कार्रवाई की गई। इसके बाद वर्ष 2015 में 72 हजार भर्ती में 32 शिक्षक फर्जी मिले। वहीं तीन प्रशिक्षु शिक्षकों की टीईटी के अंक पत्र में गड़बड़ी मिली थी। जिस पर उनके विरुद्ध कार्रवाई की गई।

इसके बाद विज्ञान- गणित विषय के शिक्षकों की भर्ती हुई। जिसमें 15 शिक्षक फर्जी पाएं गए। इसी बीच एसआईटी ने अागरा विश्व विद्यालय से डिग्री धारक शिक्षकों की जांच की थी। जिसमें जिले में 16 शिक्षक संदिग्ध मिले थे। जिनके विरुद्ध विभाग की ओर से कार्रवाई की गई है। इसके साथ ही केजीबीवी में नियुक्ति में गड़बड़ी के तीन मामले प्रकाश में आए थे। जिसमें शिक्षिका दूसरे के अभिलेखों पर शिक्षण कार्य करती मिली थी। जिसके विरुद्ध एफअाईआर दर्ज कराई गई थी। अनामिका प्रकरण के बाद फिर एक बार फर्जीवाड़े का प्रकरण चर्चा में आया है। जिस पर विभाग में फिर फर्जी अभिलेखों पर नौकरी कर रहे शिक्षकों की जांच शुरू कर दी है।

इस प्रकार सामने आया था फर्जीवाड़ा

विभागीय जांच में जिले में 197 फर्जीवाड़े के प्रकरण सामने आ चुके हैं। विशिष्ट बीटीसी के तहत वर्ष 2004 में हुई भर्ती में 30 शिक्षक फर्जी मिले थे। वर्ष 2007 में सात, 2010 में 13,वर्ष 2014 में दस हजार भर्ती में 66, वर्ष 2015 में 72 हजार भर्ती में 32,तीन प्रशिक्षु शिक्षकों, विज्ञान- गणित विषय की भर्ती में 15 शिक्षक फर्जी पाएं गए थे। अागरा विश्व विद्यालय से डिग्री प्राप्त करने वाले 16 शिक्षक और केजीबीवी में नियुक्ति में तीन फर्जीवाड़े के मामले प्रकाश में आए थे।

फर्जी अभिलेखों से नौकरी पाने वाले शिक्षकों से होगी रिकवरी

बेसिक शिक्षा विभाग में फर्जी अभिलेखों से नौकरी पाने वाले 88 शिक्षकों से नौ करोड़ रुपये की रिकवरी की जाएगी। विभाग की ओर से डाटा तैयार कर वित्त विभाग को परीक्षण के लिए भेज दिया गया है। वित्त विभाग की जांच के बाद सूची राजस्व विभाग को सौंपी जाएगी। राजस्व विभाग की ओर से सभी शिक्षकों से वसूली की जाएगी।

बेसिक शिक्षा विभाग में फर्जी शैक्षिक अभिलेखों के आधार पर नौकरी करने वाले शिक्षकों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई के साथ एफआईआर दर्ज कर रिकवरी के निर्देश दिए गए थे। जिले में जांच के दौरान अब तक 129 शिक्षक फर्जी पाएं गए थे। जिनमें से 127 के विरुद्ध एफआईआर दर्ज हो चुकी है। दो के विरुद्ध हरियावां थाने में खंड शिक्षा अधिकारी की ओर से तहरीर दी जा चुकी है। एफआईआर के बद इन सभी से विभाग से प्राप्त वेतन की रिकवरी के लिए खंड शिक्षा अधिकारी व ब्लाक लिपिक से विवरण मांगा गया था।  खंड शिक्षा अधिकारियों की ओर से विवरण उपलब्ध कराया गया है।

जिसके आधार पर जिले में 88 शिक्षकों से नौ करोड़ 7 लाख 30 हजार रुपये की रिकवरी की जाएगी। इनमें आगरा विश्व विद्यालय से डिग्री प्राप्त करने वाले 16 शिक्षकों से 572.3 लाख रुपये वसूले जाएंगे। इन शिक्षकों से वर्ष 2009-10 से दिसंबर 2019 तक कार्य किया। एक शिक्षक से अधिकतम 42 लाख रुपये और न्यूनतम 30 लाख रुपये वसूले जाएंगे। दस हजार भर्ती में 66 शिक्षक फर्जी पाएं गए थे। इनमें से प्रत्येक से चार लाख 75 हजार रुपये वसूले जाएंगे। इन लोगों ने अगस्त 2014 से दिसंबर 2015 तक विभाग से वेतन प्राप्त किया। 29 हजार भर्ती में 15 शिक्षक फर्जी मिले थे। छह शिक्षकों से एक लाख 80 हजार रुपये की वसूली की जाएगी।

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