मीडिया Now - 'प्रीडेटर नरेंद्र मोदी'

'प्रीडेटर नरेंद्र मोदी'

medianow 08-07-2021 16:03:13


गिरीश मालवीय / 'यह मैं नही कह रहा हूँ यह दुनिया भर में प्रेस की स्वतंत्रता और पत्रकारों के अधिकारों के लिए काम करने वाली संस्था रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स की राय है RSF ने ऐसे 37 राष्ट्राध्यक्षों और शासनाध्यक्षों के नाम प्रकाशित किए हैं जो उसके मुताबिक 'प्रेस की आज़ादी पर लगातार हमले कर रहे हैं' 

इस सूची में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ
पाकिस्तान के पीएम इमरान खान, सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान, उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग-उन, म्यांमार के तख्तापलट नेता मिन आंग हलिंग, ब्राजील के राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो, श्रीलंका के राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग शामिल हैं।

यानी दुनिया के बड़े तानाशाहों की लिस्ट में नरेंद्र मोदी का नाम भी बड़ी इज्जत से शामिल किया गया है। आरएसएफ के महासचिव क्रिस्टोफ डेलोयर इस रिपोर्ट की भूमिका में लिखते हैं 'इन प्रीडेटर  (शिकारियों) में से प्रत्येक की अपनी शैली है। कुछ तर्कहीन और मनमाने आदेश जारी करके आतंक का शासन लगाते हैं। अन्य लोग कठोर कानूनों के आधार पर सावधानीपूर्वक बनाई गई रणनीति अपनाते हैं, इन शिकारियों के लिए अब एक बड़ी चुनौती उनके दमनकारी व्यवहार के लिए उच्चतम संभव कीमत चुकाना है। हमें उनके तरीकों को नया सामान्य नहीं बनने देना चाहिए।"

RSF की वेबसाइट पर भारत की स्वतंत्र पत्रकारिता की वास्तविक स्थिति को बयान करता और एक लेख मिलता है जिसमे कहा गया है कि......'उन पत्रकारो के लिए भारत दुनिया के सबसे खतरनाक देशों में से एक है, जो अपना काम ठीक से करने की कोशिश कर रहे हैं।......... वे पत्रकारों के खिलाफ पुलिस की हिंसा, राजनीतिक कार्यकर्ताओं द्वारा घात लगाकर हमला करने और आपराधिक समूहों या भ्रष्ट स्थानीय अधिकारियों द्वारा उकसाए गए प्रतिशोध सहित हर तरह के हमले का सामना करते हैं।'

'2019 के वसंत में आम चुनावों के बाद से, प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की भारतीय जनता पार्टी ने भारी जीत हासिल की, मीडिया पर हिंदू राष्ट्रवादी सरकार की लाइन पर चलने का दबाव बढ़ गया है। हिंदुत्व का समर्थन करने वाले भारतीय, वह विचारधारा जिसने कट्टरपंथी दक्षिणपंथी हिंदू राष्ट्रवाद को जन्म दिया, सार्वजनिक बहस से "राष्ट्र-विरोधी" विचारों की सभी अभिव्यक्तियों को मिटाने की कोशिश कर रहे हैं। उन पत्रकारों के खिलाफ सोशल नेटवर्क पर समन्वित घृणा अभियान छेड़े गए, जो उन विषयों के बारे में बोलने या लिखने की हिम्मत करते हैं जो हिंदुत्व के अनुयायियों को परेशान करते हैं और इसमें संबंधित पत्रकारों की हत्या के लिए कॉल शामिल हैं।'

RSF सालाना प्रेस फ्रीडम इंडेक्स जारी करता है जिसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मीडिया की आज़ादी को मापने का एक पैमाना समझा जाता है. इस इंडेक्स में नरेंद्र मोदी का भारत पिछले चार सालों से लगातार नीचे खिसकता जा रहा है, वह साल 2017 में 136वें, साल 2018 में 138वें, साल 2019 में 140वें और पिछले साल 142वें नंबर पर पहुँच गया. यह भारत की स्वतंत्र पत्रकारिता के इतिहास का सबसे बुरा दौर है आपातकाल से भी बुरा.
- लेखक एक नामी समीक्षक हैं

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