मीडिया Now - बीते दिनों मैसूर में एक पुस्तकालय जला दिया गया

बीते दिनों मैसूर में एक पुस्तकालय जला दिया गया

medianow 11-04-2021 17:28:26


पंकज चतुर्वेदी / बीते दिनों मैसूर में एक पुस्तकालय जला दिया गया -- ग्यारह हज़ार किताबे जल गयीं --- लेकिन यह हमारे समाज के लिए चिंता का विषय कभी नहीं रहा . यह कोई सरकारी या किसी सार्वजनिक संस्था द्वारा स्थापित पुस्तकालय नहीं था -- इसे भूमिगत गंदा सीवर साफ़ कर पेट पालने वाले ६२ साल के मुहम्मद इशाक ने जनता के सहयोग से जनता के लिए शुरू किया था. पहले मुहम्मद इशाक की कहानी सुन लें -- एक लगभग  गुमनाम व्यक्ति- बचपन में कभी पन्द्र दिन को स्कूल गया लेकिन पढाई के डर से घर से भाग गया - कहीं बंधुआ मजदूर बना तो कहीं नालियां साफ़ की -- फिर समझ आया कि काश पढाई की होती तो यह दिन न देखने पड़ते -- इशहाक ने अपनी सीमित आय और जनता के सहयोग से सं २०११ में मैसूर के राजिव नगर में अमम्र मस्जिद के पास एक शेड में शुरू की - कोई टाला नहीं - कोई बंधन नहीं -- कई अखबार शुरू करवाए- पुस्तकालय में कन्नड़, तमिल, अंग्रेजी और उर्दू भाषाओं में 17 से अधिक समाचार पत्रों की सदस्यता थी। हालांकि इसहाक ने दानदाताओं की मदद से पुस्तकालय का निर्माण किया और वह इसके मासिक रखरखाव पर 6000 से 8000 रुपये खर्च आता था .  हर दिन डेढ़ सौ से अधिक लोग वहां पढने आते। 

सैयद लोगों में पढ़ने की आदत डालना चाहते थे, वे चाहते थे कि वे चाहे पढ़ लिखा नहीं पाए लेकिन समाज में कोई अनपढ़ न रहे . वे  कन्नड़ भाषा को भी प्रोत्साहित करते थे। इस पुस्तकालय में सामान्य ज्ञान से ले कर मनोरंजन तक की पुस्तकें थीं तो इस संग्रह के बाइबिल की कन्नड़ सहित कई भाषा में प्रतियों के अलावा कुरान की 1000 प्रतियों , भगवद गीता की तीन हजार प्रतियां शामिल थीं। बीते शुक्रवार की रात किसी ने उनके पुस्तकालय को आग लगा दी.इसहाक ने उदयगिरी पुलिस स्टेशन का दरवाजा खटखटाया, जहां आईपीसी की धारा 436 के तहत एक प्राथमिकी दर्ज की गई है . इशहाक का कहना है कि पहले भी कुछ लोग उनको धमकी देते रहे थे और पहले भी पुस्तकालय को नुक्सान पहुँचाने का प्रयास हुआ है।

इस बीच, इसहाक ताकत और भरोसे से फिर खड़े हो गए हैं । "मैं हार नहीं मानने जा रहा हूं और पुस्तक दाताओं की मदद से, मैं फिर से लाइब्रेरी को खरोंच से पुनर्निर्माण करूंगा। मैं नहीं चाहता कि कोई मेरी दुर्दशा का सामना करे और शिक्षा से वंचित हो। मैं चाहता हूं कि लोग सीख सकें। इस बीच समाज का बड़ा वर्ग उनकी मदद को भी आगे आ गया है और लोगोंका संकल्प पहले से बड़ी लायब्रेरी खड़ा करने का है। याद करें विश्व के इतिहास में जिसने पुस्तकालय जलाए उनकी क्या गति हुयी है -- बहरहाल मुहम्मद इश्तेहक जैसे लोग समाज को भरोसा दिलवाते हैं कि समाज अभी ज़िंदा हैं
- लेखक एक वरिष्ठ पत्रकार हैं

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