मीडिया Now - चंडीगढ़ बिजली विभाग: बस बेचना है यानी बेचना है

चंडीगढ़ बिजली विभाग: बस बेचना है यानी बेचना है

medianow 28-03-2021 00:50:14


गिरीश मालवीय / चंडीगढ़ बिजली विभाग के निजीकरण का मुद्दा लोकसभा में उठा..... कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी के सवाल उठाया कि साल 2020-21 में चंडीगढ़ बिजली विभाग का लाभ 365.11 करोड़ है। फिर सरकार इसे निजी कंपनी को क्यों सौंप रही है। इस पर ऊर्जा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) आरके सिंह ने लिखित में जवाब दिया कि निजी कंपनी शहरवासियों को बेहतर सुविधा देगी। यह फैसला आत्मनिर्भर भारत अभियान के अंतर्गत केंद्र सरकार की ओर से लिया गया है। यानि दरअसल इन्हे कैसे भी कर के निजी कम्पनी को अपने एसेट सौपने है मुद्दा हानि या लाभ है ही नहीं 

चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन की भी यही कहानी है  2017 में अम्बाला मंडल ने चंडीगड़ रेलवे स्टेशन को बेस्ट रेलवे स्टेशन घोषित किया था उस पुरे वर्ष एक भी यात्री की कंप्लेंट रेलवे स्टेशन के बारे में नहीं की गयी थी लेकिन उसके बावजूद चंडीगढ़  के रेलवे स्टेशन को 99 साल की लीज पर प्राइवेट कम्पनियों को सौपा जा रहा है चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन की बोली को जीतने वाली कंपनी को कमर्शियल यूज के लिए करीब 25 लाख स्केयर फुट जगह उपलब्ध होगी, जिनमें 30 फीसदी आवासीय उद्देश्य के लिए होगी सूत्र कह रहे हैं कि 'डेवलपमेंट मिश्रित उपयोग वाला होगा, जिससे कंपनियों को फायदा होगा। इसमें स्टेशन परिसर में आवासीय अपार्टमेंट बनाए जाएंगे। इसके साथ ही परियोजना को अग्रणी बैंकों से बुनियादी ढांचा का दर्जा दिया जाएगा 
इसमें भी  अदाणी समूह और जीएमआर जैसी कम्पनिया आगे आ रही है 

21 मार्च को चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन की खाली पड़ी जमीन को कमर्शियल डेवलपमेंट के लिए लीज पर देने से पहले प्री बिड मीटिंग आयोजित की गई खाली जमीन को लीज पर देने के लिए आइआरएसडीसी ने कंपनियों से टेंडर भी मांग लिए हैं। यह जमीन 99 वर्षों के लिए लीज पर दी जाएगी। .........

यह बात सिर्फ चंडीगढ़ की ही नहीं है सारे भारत में यही किया जा रहा है देश की सम्पत्ति को मनमाने ढंग से लुटाया जा रहा है अब यह तो प्रश्न ही नहीं है कि कौन से संस्थान घाटे में है या उनका मैनेजमेंट खराब है बस बेचना है यानी बेचना है
-लेखक एक नामी समीक्षक हैं

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