मीडिया Now - मकर और कर्क राशि की धुरी जब पीड़ित होती है तो हमारे देश को बहुत सारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है

मकर और कर्क राशि की धुरी जब पीड़ित होती है तो हमारे देश को बहुत सारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है

medianow 13-04-2021 22:51:51


ज्योतिषाचार्य जया सिंह /  1991 से 2019 तक हमारी अर्थव्यवस्था liberalisation उदारीकरण स्वरूप में स्वतत्रं और निर्बाध रूप से चलती हईु अचानक 2020 मार्च से रुक गई। 24 मार्च 2020 पूर्ण-लॉक डाउन लगा दिया गया। पूरी अर्थव्यवस्था ठप पड़ गई। 1950 से हमारे देश का आर्थिक विकास प्रारंभ हुआ जो 1960 तक बहतु धीमी गति से प्रगति पर चला। 1930 का घोर मंदी का युग शुरु हो गया- ग्रेट डिप्रेशन जिसका सीधा असर हमारी भारतीय अर्थव्यवस्था पर 1950 तक पड़ा था। जैसा कि मैंने पहले भी बताया था कि जब भी हमारे देश की मकर और कर्क राशि की धुरी पीड़ित होती है तो देश को बहतु सारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है ।

1962 में मकर राशि में शनि था- इसी वर्ष चीन से हमारा युद्ध हुआ था, जिसमें हम बुरी तरह से हारे थे साथ ही हमारी अर्थव्यवस्था को भी हानि पहुंची थी...ग्रोथ रेट 1961 में...3.10% था जो कि 1962 में 2.12% हो गया। 1990 में जब कि हमने उदारीकरण की अर्थव्यवस्था के रूप में आगे बढ़ने का प्रयास किया तो 1991 में शनि मकर राशि में आ गया विकास की जो ग्रोथ रेट थी 1990 में 5.29% से घटकर के 1991 में 1.43% रह गई ।

इस प्रकार से आप देख सकते हैं- कि जब भी मकर और कर्क राशि की थुरी शनि से पीड़ि त होती है तो देश को आर्थिक संकटों का भी सामना करना पड़ता है। 2020 के वर्ष पर अगर नजर डालें तो यहां 2019 में जीडीपी ग्रोथ रेट 4.18 थी 2020 में -10.28% हो गई ज्ञात हो कि 25 जनवरी 2020 को शनि मकर राशि में प्रवेश कर गया था। 22 मार्च 2020 को मंगल मकर राशि में प्रवेश करता है। और 30 मार्च 2020 को गुरु मकर राशि में प्रवेश करता है। चैत्र प्रतिपदा 2020 में

आप देख सकते हैं- गुरु केतु केसाथ में स्थित था, जिसका संबधं द्वितीय भाव और एकादशेश इन दोनों के साथ था और जैसे ही गुरु मकर राशि में प्रवेश करता है शनि के साथ छठे, सातवें, आठवें, पांचवें एवं दस दसवें भाव का संबधं आपस में हो जाता है जिसका परिणाम भारत की अर्थव्यवस्था को पूरी तरीके से ठप्प कर देता है जिससे अप्रैल के महीने में बेरोजगारी दर 23 पॉइटं 5 परसेंट पहंचु गई ।

25 अप्रैल 2020 को बुद्ध मेष राशि में प्रवेश करता है जो कि चैत्र प्रतिपदा का दशम भाव है और बुध तृतीय और द्वादशेश है इसलिए डिस्टेंस एजुकेशन और ऑनलाइन क्लासेज लगभग सभी स्कूलों में स्टार्ट हो जाता है। 10 मई 2020 को बुद्ध वृषभ राशि में प्रवेश करता है एवं19 मई 2020 से शेयर मार्केट मैं धीरे-धीरे प्रगति होने लगती है। और सोशल डि स्टेंस के साथ नौकरि यां भी शुरू हो जाती है और अब बेरोजगारी में लगभग 13 परसेंट की कमी हो जाती है। क्योंकि एकादश भाव का संबधं जब भी गुरु और बुध से होता है तो रोजगार के अवसर उत्पन्न होते हैं। 17 अगस्त 2020 को मंगल मेष राशि में प्रवेश करता है रोजगार में वृद्धि होती है और स्वास्थ्य संबंधी सेवाओं में बहतु अधिक प्रगति होती है।

चैत्र प्रति पदा 2021 ---निश्चित तौर पर यह कहा जा सकता है कि यह वर्ष 2021-2020 के चैत्र प्रति पदा से बेहतर है कारण-- द्वितीय भाव का स्वामी एवंपचं म भाव का स्वामी बुद्ध एकादश भाव में सूर्य और चंद्रमा के साथ स्थित है और एकादशेश गुरु दशम भाव में स्थित होकर के द्वितीय भाव से संबधं बना रहा है। आर्थिक गति विधियों के लिए हम वर्ष के प्रारभं में-पाया से भी आंकलन करते हैं ---यहां पर नक्षत्र पाया एवं राशि पाया दोनों ही स्वर्ण है एक बार फिर धन संबंधी अच्छी गति विधियों का संकेत दे रहे हैं ।

नकारात्मक पक्ष --बुध नीच का होकर एकादश भाव में स्थित है और गुरु अष्टमेश होकर दशम भाव में स्थि त है और वहां से द्वितीय भाव को देखता है। शनि मकर राशि में ही स्थि त है और वहां से वह द्वितीय भाव के स्वामी बुद्ध एवंएकादश भाव को देखता है। निश्चित तौर पर कहा जा सकता है कि विकास दर धीमी गति से ही रहेगी मंदी की स्थिति बनी रहेगी। सरकार को आर्थिक संकटों का भी सामना करना पड़ सकता है। लग्न का द्वादश भाव के साथ स्थान परिवर्तन भी है जो कि छठे और सातवें भाव का भी स्थान परिवर्तन है मंगल और शुक्र का-- अभी भी सोशल डिस्टेंसिंग एवं ऑनलाइन कामों को ही बढ़ावा दिया जायेगा ।
17 अप्रैल 2021 से 1 मई 2021 तक शेयर मार्केट में उठापटक की संभावना है। इस प्रकार 2021 पूरे अर्थव्यवस्था में मंदी की संभावना ही दिखाई दे रही है।

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