मीडिया Now - मुख्तार योगी और कैप्टन अमरेंद्र

मुख्तार योगी और कैप्टन अमरेंद्र

medianow 16-04-2021 12:03:49


यशोदा श्रीवास्तव / यूपी में आजकल मुख्तार अंसारी की खूब चर्चा है। मुख्तार अंसारी का जैसा नाम है, वैसा ही उसका रसूख भी है। वह अपनी मर्जी का मुख्तार है। यूपी के जिला मऊ सदर से बसपा के इस विधायक की पूछ सपा व कांग्रेस में भी है। अपराध के जरिए राजनीति में आए मुख्तार 2005 से ही जेल में है। 2017 के पहले तक जेल उसका उसकी मर्जी के हिसाब से आवास हुआ करता था। विधानसभा सत्र के दौरान उसे विधानसभा में शिरकत करने की छूट मिलती थी। इस दौरान वह बिना रोक टोक जब जहां चाहता आता जाता। अपने विधानसभा क्षेत्र का काम वह जेल से ही निपटाता।अधिकारी उसकी हुक्म बजाने को पूरी मुस्तैदी से तैयार रहते थे।

डान खिताब धारी मुख्तार यदि जरायम की दुनिया में न कदम रखता तो वह एक प्रतिष्ठित और जंगे आजादी के मशहूर नायक के परिवार का आइने हस्ती होता। मुख्तार के नाना स्व.बिग्रेडियर उस्मान को सारा देश जानता है तो गाजीपुर में इसका पुस्तैनी आवास  बड़ा फाटक के नाम से मशहूर है। इसके मझले भाई अफजल अंसारी पीएम मोदी के क्षेत्र बनारस से भी सांसद रह चुके हैं जो इस वक्त गाजीपुर से सांसद हैं।बड़ा भाई सिगबतुल्लाह गाजीपुर जिले के उसी मोहम्मदाबाद विधानसभा क्षेत्र से विधायक थे जहां से स्व.कृष्णा नंद राय विधायक चुने जाते रहे जिनकी हत्या का आरोप मुख्तार पर है।

इस क्षेत्र से अब स्व.राय की पत्नी अलका राय भाजपा की विधायक हैं।(मुख्तार पर यूं तो संगीन आरोपों की लंबी फेहरिस्त है) मुख्तार के वालिद सुभानअल्लाह अंसारी मोहम्मदाबाद नगर पंचायत के अध्यक्ष रहे हैं।मुख्तार ने राजनीति में अपने बेटे अब्बास अंसारी को भी उतार दिया है। 2017 के विधानसभा चुनाव में वह मऊ जिले के घोसी विधानसभा क्षेत्र से बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ा था लेकिन हार गया था। 

हैरत है कि पूर्वांचल में राजनीति से लेकर हर क्षेत्र में इतना बड़ा रसूखदार घराने का सदस्य जो एक विधायक भी है, आज किस तरह भीगी बिल्ली बना हुआ है।बात भले ही मुख्तार से शुरू हुई है लेकिन योगी राज के कानून के जद में कई मुख्तार हैं। मुख्तार के पहले आजम खां और अतीक पर कानून का डंडा चल चुका है। और ये लोग भी जेल में हैं।मुख्तार, आजम और अतीक की बात चलती है तो लोगों को योगी की यह कार्रवाई एक पक्षीय नजर आता है।हालांकि इसे इस  दृष्टि से भी देखा जाना चाहिए कि योगी नहीं कानून अपना काम कर रहा है। 

यद्यपि कि इस राज में भी सबकुछ पारदर्शी नहीं है। उन्नाव के बीजेपी विधायक कुलदीप सेंगर के मामले में योगी सरकार को आगे पीछे होते देखा गया है। हाल ही सेंगर की पत्नी को भाजपा द्वारा जिलापंचायत सदस्य के उम्मीदवार की घोषणा से इस परिवार पर भाजपा की मेहरबानी का पर्दाफाश हुआ है। पार्टी के इस निर्णय का विरोध हुआ तो बीजेपी को अपना फैसला बदलना पड़ा।

इस सबके बावजूद योगी राज का यह संदेश साफ है कि विधायक हो जाने का मतलब यह नहीं कि आप कानून को अपने हाथ में लें। पूर्व में सपा बसपा सरकार में राजनीति का अपराधी करण खूब हुआ। यूपी के पूर्व डीजीपी अब राज्यसभा सांसद बृजलाल की मानें तो सपा और बसपा ने हर स्तर के अपराधियों को राजनीतिक संरक्षण दिया और टिकट देकर माननीय बनाया। उन्होंने यह भी कहा कि यह कहना गलत है कि सीएम योगी ने खास निहितार्थ के तहत मुख्तार, आजम और अतीक पर कानूनन सख्ती की। विधायक विजय मिश्रा, पूर्व सांसद धनंजय सिंह,एमएलसी बृजेश सिंह किस निहतार्थ के तहत जेल में हैं? घोसी के बसपा सांसद अतुल राय महीनों जेल में रहकर हाल ही छूटे हैं। ऐसे कई हैं जो विभिन्न राजनीतिक दलों से संवद्ध हैं,पूर्व मंत्री हैं और जेल में हैं। वे कहते हैं कि योगी ने अपराध के रास्ते राजनीति में आए यूपी के विधायक और सांसदों को यह संदेश तो दिया ही है कि वे अपराधी हैं तो राजनीति का लबादा उन्हें कानून से नहीं बचा सकता। बृजलाल कहते हैं कि सच मायने में अब सिद्ध हुआ है कि कानून के हाथ लंबे होते हैं।

एक ओर यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ किसी भी रूप के अपराधियों को "रामनाम सत्य है"का रास्ता दिखाने को लेकर सुर्खियों में हैं तो वहीं पंजाब में कांग्रेस की सरकार मुख्तार को अपने जेल में रखकर सुरक्षा मुहैया कराने को लेकर चर्चा में थी। योगी को मुख्तार को पंजाब से यूपी लाने में लंबी कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी। मुख्तार को बचाने में पंजाब के सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह खुलकर सामने थे।

अमरिंदर का मुख्तार के खुले तौर पर डिफेंस के पीछे क्या था,यह तो वही जाने लेकिन यूपी में कांग्रेस की किरकिरी जरूर हुई। स्व.कृष्णा नंद राय की पत्नी विधायक अलका राय का कांग्रेस महासचिव व यूपी प्रभारी प्रियंका गांधी को लिखा खत अखबारोंं के जरिए सुर्खियों में रहा। गोरखपुर के डा.कफील "जिनपर भी योगीराज में तमाम मुकदमे लादकर उन्हें लंबे समय तक जेल में रखा गया" को कांग्रेस द्वारा प्रश्रय दिये जाने की जितनी तारीफ हुई,निश्चय ही पंजाब सरकार द्वारा मुख्तार को प्रश्रय देकर कांग्रेस की उतनी ही आलोचना हुई।

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