मीडिया Now - प्रधानमंत्री ने प्रतीकात्मक कुम्भ की अपील बहुत देर से की, चुनाव रैली करने के बाद याद आई

प्रधानमंत्री ने प्रतीकात्मक कुम्भ की अपील बहुत देर से की, चुनाव रैली करने के बाद याद आई

medianow 17-04-2021 17:32:28


देहरादून। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट किया कि हरिद्वार कुम्भ जितना हो चुका, काफी है। कोरोना के खूनी पंजों से मचे हाहाकार के बाद अब इसको प्रतीकात्मक स्वरूप में मनाया जाए। मोदी ने कहा तो दुरुस्त लेकिन कहने में बहुत देर कर दी। कुम्भ-कोरोना से जो नुक्सान होना था, वह तकरीबन हो चुका है। शाही स्नान में लाखों-लाखों श्रद्धालु गंगा में डुबकी लगा के कोरोना या तो दे चुके हैं या फिर ले चुके हैं। 3-6 महीने पहले अगर प्रतीकात्मक कुम्भ पर फैसला होता तो क्रूर कोरोना महालहर से देवभूमि-ऋषिभूमि-देश कहीं अधिक सुरक्षित होता।

’लोगों का कहना है कि वेटिकन सिटी में सेंट पीटर स्क्वायर पर पोप का क्रिसमस संदेश पिछले साल महामारी के कारण रद्द कर दिया गया। पोप ने खुद स्क्वायर पर उपस्थित न हो के लोगों की जिंदगी बचाने की खातिर ऑनलाइन संदेश जारी किया। प्रभु यीशु की जन्म भूमि बेथलहम में क्रिसमस आयोजन रद्द किया गया। कुम्भ को भी प्रतीकात्मक ढंग से किया जा सकता था। लोगों की जिंदगी आस्था से बड़ी होती है। लोग रहेंगे तो आस्था-श्रद्धा रहेगी’। उत्तराखंड के लिए दिव्य-भव्य कुम्भ का आयोजन कहीं अधिक घातक साबित हो रहा। पिछले साल के मुक़ाबले इस बार कोरोना के केस प्रकाशगति से बढ़ते दिख रहे हैं। मौतों की तादाद भी बढ़ रही है।

ये आरोप लग रहे हैं कि कुम्भ के लिए केंद्र-राज्य से मिले बजट को न्यायोचित ठहराने के लिए सरकार और नौकरशाहों ने कुम्भ को दिव्य-भव्य-विशाल स्वरूप देने पर ज़ोर दिया। इसमें बीजेपी हाई कमान और आरएसएस की भी अहम भूमिका मानी जा रही। कुम्भ के आयोजन और स्वरूप को ले के कोरोना के बावजूद किसी प्रकार का कोई समझौता करने के हक में दोनों नहीं थे। बीजेपी के मुखिया जगत प्रकाश नड्डा और आरएसएस के सर संघ चालक मोहन भागवत कुम्भ में आए। ये बात दीगर है कि दोनों ही कोरोना पॉज़िटिव हो के लौटे या फिर लौटने के तत्काल बाद कोरोना पॉज़िटिव पाए गए।

हकीकत ये है कि कोरोना के फैलाव ने कुम्भ के व्यापक-भव्य आयोजन के लिए राज्य और केंद्र सरकार के साथ ही बीजेपी को भी आलोचनाओं के घेरे में ले लिया है। जिस मीडिया को अब तक गोदी-गोदी कह के तिरस्कृत किया जाता रहा है, वह भी कुम्भ को ले के सरकारों से सवाल पूछ रही है। आलोचना कर रही है। मोदी के ट्वीट और कुम्भ के प्रतीकात्मक आयोजन की अपील के पीछे कोरोना की महालहर और मीडिया में अब आलोचनाओं को देखा जा रहा है।

प्रतीकात्मक कुम्भ से शायद बहुत अधिक फायदा अब न हो लेकिन खुद ही सतर्क हो जाने का संदेश तो लोगों में जा ही सकता है। माना जा रहा है कि जो लाखों लोग अब तक गंगा में डुबकी लगाने हरिद्वार कुम्भ आए, उनमें से कई लोगों ने कोरोना फैलाया होगा। कई ऐसे होंगे जो कोरोना ले के लौटे होंगे। ये मुमकिन नहीं था कि प्रशासन हर श्रद्धालु को राज्य और जिले की सीमा पर चेक करता। कई बिना कोरोना नेगेटिव रिपोर्ट के भी कुम्भ में आए।

प्रधानमंत्री की अपील-ट्वीट अगर 3-6 महीने पहले लोगों तक पहुँचती तो बहुत हद तक कोरोना से प्रदेश और देश के बाकी हिस्सों से आए लोगों को सुरक्षित किया जा सकता था। गैर जरूरी खर्च-बजट की भी बचत होती। लोग कुम्भ आने की तैयारी न करते। अब कुम्भ के खत्म होने में 12 दिन ही रह गए हैं। जो और जितना नुक्सान होना था, हो चुका होगा। ऐसे में ये कहा जा सकता है कि पीएम का प्रतीकात्मक कुम्भ का ट्वीट भी एक किस्म से प्रतीकात्मक से अधिक नहीं है।

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