मीडिया Now - सरकारी अस्पताल के मुर्दा घर में चेहरा दिखाने के पांच सौ मांग रहे हैं

सरकारी अस्पताल के मुर्दा घर में चेहरा दिखाने के पांच सौ मांग रहे हैं

medianow 20-04-2021 12:32:23


पंकज चतुर्वेदी / विदिशा मध्य प्रदेश के हमारे साथी पत्रकार तिवारी जी लिख रहे हैं कि सरकारी अस्पताल के मुर्दा घर में  चेहरा दिखाने के लिए पांच  सौ मांग रहे हैं -- अब लोग पोजिटिव रिपोर्टिंग के उम्मीद करते है तो बस यही कहा जा सकता है कि देखो उन्होंने  बगैर मास्क का न्यूनतम चलन दो हज़ार तो नहीं माँगा? लखनऊ में एक वरिष्ठ पत्रकार की मौत अस्पताल में हो गयी - उनके कमरे से पच्चीस हज़ार रूपये चोरी कर लिए गये. 

कोरोना से मरे लगों के घने उतारना तो आम घटना है. दवाई की काला बाजारी दस्तूर बन गया है। अस्पताल में इलाज केवल वीआइपी को है -- यह बात इलाहबाद हाई कोर्ट कह रही है. जानलें काला बाजारी, मुनाफाखोरी, संसाधनों पर आस्मां हिस्सेदारी और इन्सान-इन्सान में हैसियत के आधार पर  भेद ही बीती हज़ारों साल के मानवीय सभ्यता के विकास में संघर्ष का कारण रहा हैं. 

आज जरूरत है हर शहर -गाँव में दस पन्द्रह ऐसे लोगों की जो केवल मुनाफाखोर, अधिक दाम पर दवा बेचने  वालो, कफ़न चोरों के फोटो- नाम उजागर करें -- प्रमाण सहित -- उनकी सेवा पूजा करें और यह तय करने कि ऐसे लोगों का सामजिक बहिष्कार हो -- भले ही मर जाओ लेकिन ऐसे की दूकान से सामन ना लो-- उनकी सेवा न लो भ्रष्टाचार बरसात नहीं जो ऊपर से बरस रहा है -- यह आग है जो नीचे से लगी है -- इसमें समाजो को ऊपर से पानी डालना होगा- जरूरत पड़े तो जूते मार कर बुझाना होगा
- लेखक एक वरिष्ठ पत्रकार हैं

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