मीडिया Now - सुनो कलेक्टर साहब आपकी नाकामी से पनपा आक्रोष कहीं अराजकता में ना बदल जाये

सुनो कलेक्टर साहब आपकी नाकामी से पनपा आक्रोष कहीं अराजकता में ना बदल जाये

medianow 27-04-2021 14:28:52


धीरज चतुर्वेदी / छतरपुर जिले के हालात बेकाबू हो चुके हैं। जिले के कलेक्टर की नाकामी बताती है कि वे निर्दोषो को डंडो से पीटकर अपनी भड़ास निकाल रहे है। मानसिक विकलांगता को दर्शाने वाले दो मामले सामने आये है। अस्पताल में आक्सीजन नहीं मिलने से अपने भाई की जान को बचाने के लिये खुद आक्सीजन का इंतजाम करने वाले एक युवक पर कलेक्टर व कुछ पुलिस कर्मियेा ने डंडो से कहर बरपाया, ऐसा कृत्य इस आपदा में कोई मानसिक रूप से स्वस्थ इंसान नही कर सकता। दूसरा मामला एडवोकेट के परिवार का है जिनके पिता जिला अस्पताल में भर्ती है। उस युवक को पीट दिया जिसके पास घर से अस्पताल तक जाने का अनुमति पाास खुद जिला प्रशासन ने जारी किया था। कोरोना आपदा में स्वयं की नाकामी छुपाने के लिये डंडे ठोकना कोैन से कानून में लेख है। 

एक ओर आम जनमानस कोरोना काल में अव्यवस्थाओ के कारण बदहवास हालात में है। अस्पताल में जीवन रक्षक आक्सीजन की कमी है, सुविधाओ का आभाव है। फिर भी लेाग अपने मरीज को जीवन देने के लिये खुद इंतजाम में जुटे है। दूसरी ओर आपदा में पूरी तरह से असफल अधिकारी मरीजो के परिजनो पर डंडे ठोक रहे है। कहा जाता है कि असफल इंसान अपनी असफलता को छुपाने के लिये दूसरो पर आक्रोष या भडास निकालता है। कुछ ऐसे ही मामले मप्र के छतरपुर शहर में देखने को मिल रहे है। सौरा रोड निवासी प्रदीप साहू को सांस लेने में परेशानी के बाद सोमवार की रात्रि जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। आक्सीजन सिलेंडर था पर इम्यूलेटर नही था। परिजनो ने किसी तरह इस उपकरण की व्यवस्था बनाई लेकिन आक्सीजन कुछ घंटे में ही समाप्त हो गई । आज सुबह मरीज प्रदीप साहू का भाई राजेन्द्र साहू पन्ना रोड पर स्थित प्लांट से सिलेंडर में आक्सीजन भरवाने जा रहा था तभी पन्ना रोड पर उसे रोककर पूछताछ की गई। जिला कलेक्टर ने इस परिवार की मजबूरी बिना डंडो से पीटना शुरू कर दिया। साथ में कुछ पुलिसकर्मियो ने भी डंडो से इस युवक को इस कदर पीटा की शरीर के कई भाग चोटिल हो गये। अस्पताल में आक्सीजन ना मिलने से खुद के इंतजाम पर व्यवस्था बनाकर अपने भाई के जीवन की रक्षा करना कोई अपराध है। यह सवाल उन कलेक्टर से पूछा जा रहा है जो पूरी तरह नाकारा साबित हुये है। 

दूसरी घटना भी कलेक्टर के मानसिक दिवालियापन के रूप में देखी गई। एडवोकेट निरंजन खरे के पिता हार्टअटेक के बाद से जिला अस्पताल के आईसीयू में भर्ती है। जिला अस्पताल से बजरंग नगर स्थित घर तक आवाजाही के लिये कार्यालय कलेक्टेªट एंव जिला मजिस्ट्रेट द्धारा इस परिवार को पास जारी किया गया है। एडवोकेट निरंजन के भाई लोकेश खरे आज सुबह अनुमति पास लेकर अपने पिता को लिये जूस लेकर अस्पताल जा रहे थे। तभी कलेक्टर महोदय ने बिना किसी सुनवाई के उन्हे डंडो से पीटना शुरू कर दिया। इस मारपीट में लोकेश खरे की उगली में चोट आई है। 

कोरोना के तांडव के बीच जिला प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारी की यह हैवानियत इस ओर इंगित करती है कि निरकुंशता हावी हो चुकी है। व्यवस्थाये आपा खो चुकी है तभी असफलता को छुपाने के लिये हैवानियत का सहारा लिया जा रहा है। सरकार के उच्च स्तर के अधिकाारियो और जिम्मेदार जनता के नुमाइंदो को सोचना होगा कि अगर इस तरह के आंतक राज को कायम कर कोरोना से लडने की मानसिकता वाले अधिकारी अपनी विफलता में तांडव राज कायम करेगे तो यह आम आक्रोश कहीं आने वाले दिनो में अराजकता में बदल जाये ।

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