मीडिया Now - कोरोना संक्रमण फैलाने में चुनाव आयोग की भूमिका पर मद्रास हाईकोर्ट ने एक बेहद सख्त टिप्पणी की है

कोरोना संक्रमण फैलाने में चुनाव आयोग की भूमिका पर मद्रास हाईकोर्ट ने एक बेहद सख्त टिप्पणी की है

medianow 27-04-2021 22:10:25


राकेश कायस्थ / कोरोना का संक्रमण फैलाने में चुनाव आयोग की भूमिका पर मद्रास हाईकोर्ट एक बेहद सख्त टिप्पणी की है। मैं आपको थोड़ा पीछे ले जाना चाहूंगा। आपको याद होगा कि सुप्रीम कोर्ट के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ था, जब चार वरिष्ठतम जज खुलेआम सड़क पर उतर आये थे। उन्होंने जो कुछ कहा था उसका मतलब यही निकलता था कि सत्तातंत्र ने इस देश की न्यायिक व्यवस्था को बंधक बना लिया है। बागी जजों की अगुआई कर रहे वरिष्ठतम न्यायधीश जस्टिस चेलमेश्वर ने साझा बयान में जो बातें कही थी वो मौजूदा संदर्भ काफी हद तक जुड़ती है। ध्यान रहे मैं जो लिख रहा हूँ कि वो जस्टिस चेलमेश्वर के कथन का भावानुवाद है, शब्दानुवाद नहीं। 

उनका कहना था कि हाईकोर्ट्स का इतिहास इस देश में सुप्रीम कोर्ट से भी पुराना रहा है और इन अदालतों ने भारत की न्यायिक प्रक्रिया के क्रमिक विकास में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। सुप्रीम कोर्ट एक अभिभावक की भूमिका निभाता है लेकिन उसे हाईकोर्ट्स की स्वायतत्ता का सम्मान करना चाहिए। काम में अनावश्यक दखल उचित नहीं है। सुप्रीम कोर्ट का चीफ जस्टिस समकक्षों में प्रथम होता है लेकिन वो कोई क्लास मॉटीनटर या बॉस नहीं होता कि इशारा करे और बाकी लोग उसके कहे मुताबिक आचरण करने लगें।

जस्टिस चेलेमेश्वर के इस कथन को बार-बार याद किये जाने की ज़रूरत है। एक ऐसे समय जब दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र गहरे दलदल में धंसा हुआ है। 
प्रधानमंत्री भी समकक्षों प्रथम होता है, सुपर बॉस नहीं। एक एडल्ट फैमिली में परिवार का मुखिया भी यही होता है। लोकतांत्रिक ढंग से संस्थाओं के चलने की यह बुनियादी शर्त है। देश किस तरह चल रहा है, यह समझने के लिए हाल के दिनों बहुत से हाईकोर्ट और उसके साथ-साथ सुप्रीम कोर्ट में चली कार्रवाइयों पर नज़र डालें। आपको खुद ब खुद सब समझ में आ जायेगा। कहानी  का दूसरा भाग ये है कि जस्टिस चेलमेश्वर ने रिटायरमेंट के चौबीस घंटे के भीतर अपना सरकारी आवास खाली कर दिया था और पैतृक गाँव में जाकर खेती बाड़ी करने लगे थे। 

न्याय के दूसरे बड़े धर्मयोद्दा जस्टिस रंजन गोगोई बाद में सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस बने। राफेल का मामला न्यायालय के विचाराधीन था। इसी दौरान कोर्ट परिसर में प्रधानमंत्री मोदी ने उनसे मुलाकात की। भारतीय न्यायपालिका के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ। अपने उपर लगे छेड़खानी के मामले की जस्टिस गोगोई ने खुद सुनवाई की और न्याय की जीत हुई। फिर रामजन्मभूमि का ऐतिहासिक निर्णय आया। इतिहास बनने का सिलसिला रूका नहीं। भगवत कृपा से जस्टिस गोगोई बीजेपी के राज्यसभा सांसद बन गये और सफाई मांगे जाने पर कहा-- अगर मुझे सौदा करने होता तो इतना छोटा सौदा करता। बाकी सब कुशल है।
- लेखक एक वरिष्ठ पत्रकार हैं

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