मीडिया Now - बिल्लू का इर्रफ़ान

बिल्लू का इर्रफ़ान

medianow 29-04-2021 19:47:21


वीर विनोद छाबड़ा / मास्टर एक्टर इर्रफ़ान को गुज़रे एक बरस हो गया है. मगर आज भी वो दिल के बहुत क़रीब हैं. उनकी याद में पिछले साल की पोस्ट पुनः हाज़िर है. एक एक्स्ट्रा 'र' की ध्वनि के कारण इरफ़ान को इर्रफ़ान ख़ान कहलाना अच्छा लगता था. वो बाकी ख़ानों से अलग ख़ान थे, बेजोड़ ख़ान. चीखने-चिल्लाने और जगमग रोशनी में नहाई सेल्फ प्रमोशन की फ़िल्म नगरी में चुपचाप और अकेले रहे. वो पर्दे पर भी इसी रूप में दिखे.  उन्हें खुद को एक्सप्रेस करने के लिए ऊँची आवाज़ और लम्बे डायलॉगस का सहारा नहीं लेना पड़ा, चेहरा ही बोलता रहा. और इसी एक्सप्रेसिव चेहरे की बदौलत एक अलग और ऊँचा मुकाम हासिल किया.  अनेक राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पुरुस्कारों से नवाज़े गए, पद्मश्री देकर सरकार भी गौरवांवित हुई. लेकिन इरफ़ान ने सफलता को सर पर नहीं चढ़ने दिया.  बनने चले थे क्रिकेटर.  सुना गया कि सीके नायडू अंडर-23 में सिलेक्शन भी हो गया था मगर डेस्टिनी ने उन्हें नाटक और सिनेमा के लिए बनाया था. क्रिकेट का नुक्सान और सिनेमा का फ़ायदा. संयोग से नेशनल स्कूल ऑफ़ ड्रामा में दाख़िला मिल गया. क्रिकेट का मैदान छोड़ दिया. 

मैंने उनकी कई फ़िल्में देखी हैं, मक़बूल और पान सिंह तोमर भी, जिसने उन्हें श्रेष्ठ अभिनेता का राष्ट्रीय पुरूस्कार दिलाया. मगर मुझे उनकी 'बिल्लू' बहुत पसंद आयी.  इसलिए नहीं कि मेरा निकनेम भी बिल्लू है. बल्कि इसलिए कि पूरी फ़िल्म में वो शायद ही कहीं बोले, उनका एक्सप्रेसिव फेस ही व्यथा, ख़ुशी और ग़म का अहसास करता रहा. इसमें वो एक ग़रीब नाई बिल्लू हैं, अथाह क़र्ज़ में डूबे हुए. पत्नी लारा दत्ता है और दो बच्चे.  जैसे-तैसे गुज़र हो रही है. तभी कस्बे में एक फिल्म की शूटिंग शुरू होती है, हीरो हैं साहिल ख़ान (शाहरुख़ ख़ान). बिल्लू पत्नी और बच्चों को बताता है साहिल से उसका बचपन का नाता है. मगर क़िस्मत ने उसे स्टार बना दिया और उसे नाई. जाने कैसे ये बात बाहर लीक हो जाती है और नतीजा ये होता है तमाम कस्बे की निगाह में बिल्लू हीरो बन जाता है. सबको उम्मीद है बिल्लू की साहिल से नज़दीकियां उन्हें साहिल से मिला देंगी. मगर स्वयं बिल्लू को बॉडी गार्ड्स ने साहिल से मिलने नहीं दिया. तो सबको लगा साहिल झूठ बोल रहा था. सब एकाएक उसके दुश्मन बन गए. पत्नी और बच्चे भी उसे शक़ की निगाह से देखने लगे. लेकिन साहिल नहीं भूला. एक स्कूल के फंक्शन में उसने बिल्लू से अपनी नज़दीकियां बयान कीं, बताया कि आज वो जिस ऊँचे मुक़ाम पर उसका कारण बिल्लू ही है. बिल्लू ये सब चुपचाप पीछे खड़ा सुन रहा है. वो घर लौट आता है और उसके पीछे-पीछे साहिल भी आ जाता है.  

शाहरुख़ ने बाद में एक इंटरव्यू में बताया कि इसकी कथा उन्हें कृष्ण-सुदामा की दोस्ती की याद दिलाती रही. ये फिल्म शुरूआत में अक्षय कुमार-तब्बू को ऑफर हुई थी, मगर एन मौके पर अक्षय बैकऑउट कर गए और तब्बू भी, इसलिए कि ये इर्रफ़ान और लारा की क़िस्मत में लिखी थी. प्रियदर्शन ने फिल्म का प्रचार तो 'बिल्लू बारबर' के नाम से किया, लेकिन नाई समाज ने विरोध किया तो 'बारबर' हटा कर सिर्फ 'बिल्लू' कर दिया गया. किसी न किसी चैनल पर 'बिल्लू' आती रहती है, मैं इसे देखते हुए कभी बोर नहीं होता बल्कि भाव-विभोर हो जाता हूँ, बिल्लू के इरफ़ान को अपनी ज़िंदगी के बहुत क़रीब पाता हूँ. 
- लेखक एक नामी फिल्म समीक्षक हैं

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