मीडिया Now - कोविड का कहर इस बार गांवों में पहुंच चुका है

कोविड का कहर इस बार गांवों में पहुंच चुका है

medianow 30-04-2021 10:35:24


सुभाष चन्द्र कुशवाहा / कोविड का कहर गांवों में पहुंच चुका है। विगत साल ऐसा नहीं हुआ। मास्क खरीद कर प्रयोग करना गरीबों के वश में नहीं।  हम लोगों ने सैकड़ों की संख्या में सर्जिकल मास्क बांटे हैं। बाद में देखा कि दस दिन बाद भी किसान उन्हीं मास्कों को लगाते रहे यानी वे मास्क लगाने की वैज्ञानिक विधि नहीं जानते और गरीबी के कारण मास्क पर पैसा नहीं खर्च कर सकते। गांवों में बुखार, बदन दर्द, दस्त, गले में खरांस को लोग मौसमी बीमारी या काम धंधे की वजह से थकान, कमजोरी समझ रहे हैं। कोई सलाह देने वाला नहीं। कोई जांच की सुविधा नहीं। आप जांच करा कर देखेंगे, ज्यादातर  मामले कोविड के निकलेंगे। सबसे मुसीबत वाली बात तो यह है कि कोविड मरीज की कैसे देखभाल करें?

आम जनता नहीं जानती। मरने पर शव के पास लोग बैठकर रोते हैं। शव को छूते हैं । इन मौतों को कोविड रिकॉर्ड में शामिल नहीं किया जाता। साबुन से हाथ धोते रहने या सेनेटाइजेशन की व्यवस्था गांवों में नहीं है। गाँव-गाँव में प्रशिक्षित कार्यकर्ताओं द्वारा जांच कराई जाए तो स्थिति स्पष्ट हो। उसके बाद पॉजिटिव मरीजों को आइसोलेशन में रखा जाए अन्यथा स्थिति गंभीर होगी।
- लेखक एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी रहे हैं

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