मीडिया Now - तू जिन्दा है तो जिन्दगी की जीत में यकीन कर!'

तू जिन्दा है तो जिन्दगी की जीत में यकीन कर!'

medianow 30-04-2021 10:49:00


उर्मिलेश / जिन परिस्थितियों में हम सब लिख रहे हैं  या अपने-अपने 'यूट्यूब शो' कर रहे हैं, उसकी कल्पना करना मुश्किल नहीं! चारों तरफ हाहाकार है. जिन संस्थाओं के जरिये हम आपके पास अपनी बात पहुचाते हैं, उनमें भी कई साथी या उनके परिजन परेशानी में हैं. आप और हम सबके लिए बहुत बुरा दौर है. कितना बुरा और कितना कठिन है, यह सिर्फ हम ही नहीं, आप भी जानते हैं! हमने न कभी ऐसा देखा था और न ही कल्पना की थी. हम जिस मोहल्ले में रहते हैं, वहां के हालात भी बहुत खराब हैं, हमारे आस-पास कई जिंदगियां जा चुकी हैं. सभी असुरक्षित और असहज़ हैं. 

हमारा मानना है कि एक लेखक और पत्रकार को अपनी जिंदगी में हर कीमत पर सच के साथ खड़ा रहना चाहिए. क़ोई जरूरी नहीं कि सबका 'सच' एक ही हो! लेकिन दुनिया भर के दार्शनिकों और विचारकों की अनेक पीढ़ियों ने सत्य के संधान के अपने महान् प्रयासों से मानवता के समक्ष बहुत बड़ी थाती सौंपी है. इसमें काफी कुछ साझा है. इसमें कुछ बड़े मानवीय मूल्य हैं: स्वतंत्रता, समता, बंधुत्व और न्याय! हमारे संविधान में भी इनका समावेश किया गया है. पर हमारे यहां ये मूल्य संविधान के पन्नों  तक सीमित रखे गये. इतना विशद संविधान के बावजूद बीते तिहत्तर सालों में हम समता, स्वतंत्रता, न्याय और बंधुत्व पर आधारित एक राष्ट्र नही बना सके. ऐसा राष्ट्र बना होता तो इस भयावह महामारी में आज आम भारतीय दवा, अस्पताल के बेड, दवाई और यहां तक कि ऑक्सीजन के लिए नहीं चीखता-पुकारता! उसकी जान अस्पताल के बाहर किसी सडक, गली, एम्बुलेंस, कार या रिक्शे में नही जाती.

एक लेखक-पत्रकार के रूप में हमने स्वतंत्रता, समता, बंधुत्व और न्याय के महान् मूल्यों की रोशनी में अपना रास्ता खोजा. इसीलिए, इन बेहद मुश्किल दिनों में भी हम आपसे संवाद करना जरूरी समझते हैं. हमें अपने अध्ययन, सूचनातंत्र या विश्वसनीय सूत्रों जो मालूम होता है, उसे आपसे शेयर करते हैं. चीजें तभी बेहतर होंगी,  जब सबको सच मालूम होगा. आज मनुष्यता पर ही नहीं, सच पर भी आफत है. सच बड़ी कैजुएल्टी है! 
हमारे पास बहुत सीमित साधन हैं, पर कोशिश जारी है- 'शो मस्ट गो ऑन'! 
शब्द सच के साथ खड़े हों तो लिखने, बोलने या कहने की शक्ति और साहस आ जाता है! 
वह संदर्भ कुछ अलग है, जिसमें हरदिल-अजीज गीतकार  शैलेंद्र ने वो लाइनें लिखी थीं. आज सुबह अचानक ही उनकी पंक्तियाँ जुबां पे आ गईं: 'तू जिन्दा है तो जिन्दगी की जीत में यकीन कर----!'
- लेखक एक नामी पत्रकार हैं

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