मीडिया Now - वाशिंगटन पोस्ट का यह लेख पढ़कर बतौर भारतीय मैं शर्म से गड़ा हुआ महसूस कर रहा हूँ

वाशिंगटन पोस्ट का यह लेख पढ़कर बतौर भारतीय मैं शर्म से गड़ा हुआ महसूस कर रहा हूँ

medianow 30-04-2021 14:05:14


गिरीश मालवीय / वाशिंगटन पोस्ट का यह लेख पढ़कर बतौर भारतीय मैं स्वयं को शर्म से गड़ा हुआ महसूस कर रहा हूँ........ इस लेख का शीर्षक है 'Modi’s pandemic choice: Protect his image or protect India. He chose himself

महामारी में मोदी की प्राथमिकता क्या थी: अपनी इमेज को सुरक्षित रखें या भारत की रक्षा करें। 
मोदी ने अपनी इमेज को चुना

यह लेख सुमित गांगुली ने लिखा है जो इंडियाना यूनिवर्सिटी में पोलिटिकल साइंस के प्रोफेसर हैं और जानेमाने लेखक है.  इस लेख के कुछ हिस्सों का गूगल से अनुवाद कर थोड़ा एडिट करने का प्रयास किया है, वैसे यह भारत के मुख्य मीडिया की जिम्मेदारी थी कि इस लेख का ढ़ंग सर अनुवाद करता ...ओर छापता.... लेकिन  !....बहरहाल पढिए वाशिंगटन पोस्ट की क्या राय है मोदी जी के बारे में........'भारत के कोरोना वायरस से उपजे  संकट को देखना आश्चर्यजनक है। उत्तरी भारत में, सार्वजनिक पार्कों में शवों का अंतिम संस्कार किया जा रहा है क्योंकि श्मशान अपनी क्षमता से अधिक हो गए हैं। लोग घरों के पिछवाड़े में रिश्तेदारों को दफना रहे हैं जला रहे हैं'

'दुनिया में टीकों के सबसे बड़े उत्पादक होने के बावजूद, भारत ने अपने 1.3 बिलियन लोगों में से 2 प्रतिशत से कम का टीकाकरण किया है। ......एंटीवायरल दवा रेमेडिसविर की कमी है कहाँ से मिल पाएगी इसलिए लोग सोशल मीडिया पर दोस्तों और रिश्तेदारों से भीख मांग रहे हैं। परिवार के सदस्य मरीज के लिए बेड मिल जाने की उम्मीद में एक-दूसरे को कई अस्पतालों में भटक रहे हैं

'भारत ने जनवरी तक कोरोना की प्रारंभिक लहर को नियंत्रित कर लिया था। तब, प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने असावधानी बरतते हुए, आश्चर्यजनक रूप से लापरवाह फैसलों की एक श्रृंखला में, दूसरी लहर को आमंत्रित किया जो अब देश को कुचल रही है।'

'मोदी की घिनौनी निर्णय लेने की शैली वर्षों से महामारी को जन्म देती है। उनकी सरकार ने पहले कार्यकाल मे भारत की 80 प्रतिशत से अधिक मुद्रा के विमुद्रीकरण और एक बहु-आवश्यक गुड्स ओर सर्विस टैक्स GST का समान रूप से लेकिन गलत तरीके से रोलआउट किया'. 'अब जब पब्लिक पार्क अस्थायी श्मशान बन रहे हैं, मरीज अस्पतालों के बाहर फुटपाथों पर लेटे हुए हैं और एंबुलेंस (उपलब्ध होने पर) में ऑक्सीजन की कमी है, लेकिन तब भी मोदी के सहयोगियों ने अधिक कठोर, यद्यपि परिचित, रणनीति का सहारा लिया है। उनका तर्क है कि सरकार के आलोचक  राष्ट्रव्यापी कलह बोना चाहते हैं  दिल्ली में बैठी सरकार अब फेसबुक और इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया आउटलेट्स पर दबाव डाल रही है कि उनकी आलोचना करने वालों के मुँह बन्द करवाए जाए' इस लेख को एक बार अवश्य पढिए... आपको भी एक शर्मिंदगी का अहसास होगा अंधभक्तो को न पढ़ने की सलाह दी जाती है वो तो पहले से ही बेशर्म है!
- लेखक एक नामी समीक्षक हैं

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